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...तो मेरी जुबान कट जाए
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोह
Updated Mon, 27 Mar 2017 02:06 AM IST
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उर्स में कलाम पेश करती शायर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल कुद्दूस के उर्स के उपलक्ष्य में गंगोह विकास संघर्ष समिति की ओर से शनिवार रात ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने कलाम सुनाकर श्रोताओं से खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।
बालाजी गार्डन में रात दस बजे कार्यक्रम का शुभारंभ सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन, चौधरी वसीम, असदुल्लाह अजमेरी एवं चौधरी रुद्रसेन ने किया। आगाज कारी मसरूर की तिलावते कलाम ए पाक से हुआ। सउद अहमद ने दरूदो सलाम और अरशद जिया ने नाते पाक पेश की।
नदीम अनवर देवबंदी ने यूं पढ़ा ‘यादों को तेरी दिल से निकलने नहीं दिया, सूरज तेरे ख्याल का ढलने नहीं दिया’, मंसूर राना सहारनपुरी ने पेश किया ‘वतन को अपना घर हर साहिबे इमान कहता है’, नफीस देवबंदी ने पढ़ा ‘पतवार चलाने का जिन्हें हौंसला न हो, फिर उनकी कश्तियों को किनारा नहीं मिला’, शायरा दानिश गजल ने ‘जब से तुम्हारे शहर में आई हुई हूं...’, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।साकिब गंगोही ने समाज में रिश्तों के बिखराव को यूं बयान किया ‘मेरी जुबान से अगर खानदान बट जाए तो फिर जरूरी है कि मेरी जुबान कट जाए’।
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इनके अलावा अमर सिंह अंबालवी, गुफरान बस्तवी, अल्तमश अब्बास, इरफान अलीम, इस्लाम सहारनपुरी, जुनैद, वासिल खान आतिफ, राशिद गंगोही, चौकस देवबंदी, शाहनवाज पप्पू, वक़ार बेधड़क, शकील अहमद शकील, काशिफ रजा, मसूद अजमल अरशद जिया, मेकश दर्पण, उजमा सरधन्वी और लता साबरी और समर ने भी कलाम पेश किए।
बुजुर्ग शायर अर्श सहबाई के कलाम के साथ मुशायरे का समापन हुआ। इससे पूर्व कमेटी की ओर से मीडिया के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डा. राकेश गर्ग, भारत गर्ग, अजहर मियां कुद्दूसी, सलाहुद्दीन और डा. प्रवीण आलम को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता हजरत कुतबे आलम की दरगाह के नायब सज्जादा नशीं मख्दमू अली और संचालन अल्तमश अब्बास ने किया। आयोजन कमेटी अध्यक्ष इरफान अलीम ने आभार जताया।
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बालाजी गार्डन में रात दस बजे कार्यक्रम का शुभारंभ सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन, चौधरी वसीम, असदुल्लाह अजमेरी एवं चौधरी रुद्रसेन ने किया। आगाज कारी मसरूर की तिलावते कलाम ए पाक से हुआ। सउद अहमद ने दरूदो सलाम और अरशद जिया ने नाते पाक पेश की।
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नदीम अनवर देवबंदी ने यूं पढ़ा ‘यादों को तेरी दिल से निकलने नहीं दिया, सूरज तेरे ख्याल का ढलने नहीं दिया’, मंसूर राना सहारनपुरी ने पेश किया ‘वतन को अपना घर हर साहिबे इमान कहता है’, नफीस देवबंदी ने पढ़ा ‘पतवार चलाने का जिन्हें हौंसला न हो, फिर उनकी कश्तियों को किनारा नहीं मिला’, शायरा दानिश गजल ने ‘जब से तुम्हारे शहर में आई हुई हूं...’, सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।साकिब गंगोही ने समाज में रिश्तों के बिखराव को यूं बयान किया ‘मेरी जुबान से अगर खानदान बट जाए तो फिर जरूरी है कि मेरी जुबान कट जाए’।
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इनके अलावा अमर सिंह अंबालवी, गुफरान बस्तवी, अल्तमश अब्बास, इरफान अलीम, इस्लाम सहारनपुरी, जुनैद, वासिल खान आतिफ, राशिद गंगोही, चौकस देवबंदी, शाहनवाज पप्पू, वक़ार बेधड़क, शकील अहमद शकील, काशिफ रजा, मसूद अजमल अरशद जिया, मेकश दर्पण, उजमा सरधन्वी और लता साबरी और समर ने भी कलाम पेश किए।
बुजुर्ग शायर अर्श सहबाई के कलाम के साथ मुशायरे का समापन हुआ। इससे पूर्व कमेटी की ओर से मीडिया के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डा. राकेश गर्ग, भारत गर्ग, अजहर मियां कुद्दूसी, सलाहुद्दीन और डा. प्रवीण आलम को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। अध्यक्षता हजरत कुतबे आलम की दरगाह के नायब सज्जादा नशीं मख्दमू अली और संचालन अल्तमश अब्बास ने किया। आयोजन कमेटी अध्यक्ष इरफान अलीम ने आभार जताया।