{"_id":"f0dea0c421ab35e4f849bc45e7122285","slug":"oppression-endure-the-side-of-the-bloodthirsty-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"\" जुल्म सहना भी जालिम की तरफदारी है \"","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
" जुल्म सहना भी जालिम की तरफदारी है "
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 08 Oct 2015 11:54 PM IST
विज्ञापन
मेला गुघाल में बुधवार को ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। इसमें नामचीन शायरों ने अपने कलाम पेश कर शमा बांध दिया। इस दौरान देश के वर्तमान हालात पर भी जमकर कटाक्ष किए गए।
अंबाला रोड स्थित मेला गुघाल के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा का आगाज विश्व विख्यात शायर नईम अख्तर बुरहानपुरी ने नाते पाक पेश कर किया। प्रख्यात शायर मुनव्वर राना ने कलाम ‘दरबार में ओहदों के लिए पैरों पर अना गिर जाती है, कौमों के सिर झुक जाते हैं चकरा कर हया गिर जाती है, अब तक तो हमारी आंखों ने दो ही मंजर देखे है, या कौम के रहबर गिरते हैं या लोकसभा गिर जाती है’ पढ़ा तो हजारों की भीड़ से खचाखच भरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
शायर इमरान प्रतापगढ़ी के इस शेर ‘पिफजा में उड़ रहे जहरीले जुगनू क्यों नहीं दिखते, किसी भी हादसे के सारे पहलू क्यों नहीं दिखते, जो मां को याद कर परदेस में आंसू बहाता है, उसे अखलाक की अम्मी के आंसू क्यों नहीं दिखते’। रईस अंसारी ने अपना यह शेर ‘हमने ये सोचकर तलवार उठा ली बढ़कर, जुल्म सहना भी जालिम की तरफदारी है’ सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद बटौरी।।
विज्ञापन
नईम अख्तर बुरहानपुरी के इस शेर ‘यूं ही उलझा नहीं है पांव मेरा, कोई मुझको गिराना चाहता है’ पर श्रोताओं ने खूब दाद दी। अकील नौमानी ने सुनाया ‘पायदारी क्या लफ्जों के असर से गिर गए, कुछ मकां सैलाब की झूठी खबर से गिर गए। शायरा शबीना अदीब ने कुछ यूं कहा ‘करोड़ों लोग यहां चीथड़ों में लिपटे है, मगर वतन का निगेहबां सूट बूट में है’। उस्मान मीनाई ने कुछ यूं कहा ‘जुर्म पूछकर न गलत काम पूछकर, मुझको सजा मिलेगी अब मेरा नाम पूछकर’।
हास्य व्यंग्य शायर सज्जाद झंझट ने अपना यह शेर ‘सुंदर सी इक नारी जिसका राधे मां है नाम, लेकिन गोद में लेकर लड़के करते है प्रणाम, कुछ दिन ठहरों हो जाएगा उसका भी कल्याण, जेल में उसका वेट है करते बापू आसाराम’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। सैफ बाबर लखनवी के इस कलाम ‘गांधी ने ख्वाब में आकर हमसे ये कहा, हाय हमारे मुल्क में ये दादरी भी है’ को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
इनके अलावा डा. नुजहत अंजुम, नदीम शाद, मन्नान फराज, अशोक साहिल, अल्तमश अब्बास, मीसम गोपालपुरी ने भी अपने कलाम पेश किए। इससे पूर्व ऑल इंडिया मुशायरे का उद्घाटन मजाहिर हसन मुखिया, शादान मसूद, जावेद साबरी व चंद्रशेखर यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। जबकि शमा रोशन शाहनवाज खान, फैजानुर्रहमान, तसलीम, रियाज हाशमी ने संयुक्त रूप से की। अध्यक्षता पूर्व मंत्री सरफराज खान और संचालन शायर अनवर जलालपुरी ने किया। अबूबकर शिब्ली व पूर्व सभासद फजलुर्रहमान ने सभी का आभार जताया।
इस दौरान डीएम पवन कुमार, एसएसपी राजेंद्र प्रसाद यादव, एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार गुप्ता, शिलेश सक्सेना, कुमार योगेश, नवाजिश खान, मुन्नू खान, अनिल कुछाड़िया, आफताब मलिक, शब्बीर शाद, डा. शाहिद जुबैरी, डा. खुर्शीद आलम, मुस्तकीम अंसारी, हाजी फजलुर्रहमान, हाजी इलियास कुरैशी, इरफान सागर, अनवर कुरैशी, हाजी मिस्बाउर्रहमान, शरद कुमार, खालिद हसन सहित भारी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। इसमें पहले डीएम पवन कुमार ने भी नज्म पेश किया।
विज्ञापन
अंबाला रोड स्थित मेला गुघाल के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा का आगाज विश्व विख्यात शायर नईम अख्तर बुरहानपुरी ने नाते पाक पेश कर किया। प्रख्यात शायर मुनव्वर राना ने कलाम ‘दरबार में ओहदों के लिए पैरों पर अना गिर जाती है, कौमों के सिर झुक जाते हैं चकरा कर हया गिर जाती है, अब तक तो हमारी आंखों ने दो ही मंजर देखे है, या कौम के रहबर गिरते हैं या लोकसभा गिर जाती है’ पढ़ा तो हजारों की भीड़ से खचाखच भरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
विज्ञापन
शायर इमरान प्रतापगढ़ी के इस शेर ‘पिफजा में उड़ रहे जहरीले जुगनू क्यों नहीं दिखते, किसी भी हादसे के सारे पहलू क्यों नहीं दिखते, जो मां को याद कर परदेस में आंसू बहाता है, उसे अखलाक की अम्मी के आंसू क्यों नहीं दिखते’। रईस अंसारी ने अपना यह शेर ‘हमने ये सोचकर तलवार उठा ली बढ़कर, जुल्म सहना भी जालिम की तरफदारी है’ सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद बटौरी।।
विज्ञापन
नईम अख्तर बुरहानपुरी के इस शेर ‘यूं ही उलझा नहीं है पांव मेरा, कोई मुझको गिराना चाहता है’ पर श्रोताओं ने खूब दाद दी। अकील नौमानी ने सुनाया ‘पायदारी क्या लफ्जों के असर से गिर गए, कुछ मकां सैलाब की झूठी खबर से गिर गए। शायरा शबीना अदीब ने कुछ यूं कहा ‘करोड़ों लोग यहां चीथड़ों में लिपटे है, मगर वतन का निगेहबां सूट बूट में है’। उस्मान मीनाई ने कुछ यूं कहा ‘जुर्म पूछकर न गलत काम पूछकर, मुझको सजा मिलेगी अब मेरा नाम पूछकर’।
हास्य व्यंग्य शायर सज्जाद झंझट ने अपना यह शेर ‘सुंदर सी इक नारी जिसका राधे मां है नाम, लेकिन गोद में लेकर लड़के करते है प्रणाम, कुछ दिन ठहरों हो जाएगा उसका भी कल्याण, जेल में उसका वेट है करते बापू आसाराम’ सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। सैफ बाबर लखनवी के इस कलाम ‘गांधी ने ख्वाब में आकर हमसे ये कहा, हाय हमारे मुल्क में ये दादरी भी है’ को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।
इनके अलावा डा. नुजहत अंजुम, नदीम शाद, मन्नान फराज, अशोक साहिल, अल्तमश अब्बास, मीसम गोपालपुरी ने भी अपने कलाम पेश किए। इससे पूर्व ऑल इंडिया मुशायरे का उद्घाटन मजाहिर हसन मुखिया, शादान मसूद, जावेद साबरी व चंद्रशेखर यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। जबकि शमा रोशन शाहनवाज खान, फैजानुर्रहमान, तसलीम, रियाज हाशमी ने संयुक्त रूप से की। अध्यक्षता पूर्व मंत्री सरफराज खान और संचालन शायर अनवर जलालपुरी ने किया। अबूबकर शिब्ली व पूर्व सभासद फजलुर्रहमान ने सभी का आभार जताया।
इस दौरान डीएम पवन कुमार, एसएसपी राजेंद्र प्रसाद यादव, एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव, सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार गुप्ता, शिलेश सक्सेना, कुमार योगेश, नवाजिश खान, मुन्नू खान, अनिल कुछाड़िया, आफताब मलिक, शब्बीर शाद, डा. शाहिद जुबैरी, डा. खुर्शीद आलम, मुस्तकीम अंसारी, हाजी फजलुर्रहमान, हाजी इलियास कुरैशी, इरफान सागर, अनवर कुरैशी, हाजी मिस्बाउर्रहमान, शरद कुमार, खालिद हसन सहित भारी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे। इसमें पहले डीएम पवन कुमार ने भी नज्म पेश किया।