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जिले में डेढ़ हजार हैंडपंप खराब, गर्मी बढ़ने पर होगी पेयजल किल्लत
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बड़गांव के दल्हेड़ी में हैंडपंप से गायब हुई मशीन
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले के 11 विकासखंडों के गांवों में डेढ़ हजार से ज्यादा हैंडपंप खराब पड़े हैं। एक बार हैंडपंप खराब होने के बाद कई कई माह तक उसकी सुध नहीं ली जाती है। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले इन्हें ठीक नहीं कराया गया है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ ही पेयजल किल्लत से भी लोगों को दो चार होना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्र में तो लोग पीने के पानी के साथ ही अन्य जरूरतों के लिए भी इन्हीं हैंडपंपों पर निर्भर हैं। बावजूद इसके अधिकारी इन हैंडपंपों को ठीक कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ज्यादातर ग्राम प्रधानों का कहना है कि वे बजट के अभाव में इन्हें ठीक नहीं करा पा रहे हैं। मंगलवार को जब पड़ताल की गई तो शहर के साथ ही देहात में भी बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद मिले।
नकुड़ के गांवों में 176 हैंडपंप खराब
नकुड़ ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में सरकारी अभिलेखों में ही 176 हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या ज्यादा है। विकासखंड के लेखाकार रवि गुप्ता ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र में टोटल 3435 हैंडपंप हैं। इनमें से 157 को रिबोर कराया गया है, जबकि 176 हैंडपंप खराब पड़े हैं।
देवबंद नगर में खराब पड़े 35 हैंडपंप
देवबंद। नगरपालिका परिषद द्वारा नगर के विभिन्न मोहल्लों में 140 हैंडपंप लगा रखे हैं। जिनमें से 35 पिछले करीब एक डेढ़ साल से खराब पड़े हैं। जलकल विभाग प्रभारी मो. आरिफ ने बताया कि करीब 30-35 हैंडपंप खराब होने के कारण बंद पड़े हैं। इनमें कुछ के रिबोर तो कुछ को ठीक किया जाना है। अप्रैल माह तक सभी खराब हैंडपंपों को सही कराकर पेयजल आपूर्ति को सुचारु करा दिया जाएगा।
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केस एक
बड़गांव और दल्हेड़ी में दो-दो साल से हैंडपंप खराब पड़े हैं। एक की तो मशीन तक गायब हो चुकी है। बड़गांव के प्रधान नीलम राणा और दल्हेड़ी के प्रधान सुरेंद्र प्रजापति का कहना है कि उनकी पंचायतों में सात हैंडपंप खराब पड़े हैं। बजट के अभाव में ठीक नहीं कराए जा सके हैं।
केस दो
साढ़ौली कदीम के ग्राम पंचायत मुर्तजापुर के मजरे हीराहेड़ी में पथरवा मार्ग पर एक साल से हैंडपंप खराब पड़ा है। इसके आस पास घास उग गई है। इससे बीस परिवार प्रभावित हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी इसका रिबोर नहीं कराया गया है।
केस तीन
नानौता क्षेत्र के गांव तिलफरा ऐनाबाद के मंदिर परिसर में स्थित हैंडपंप के खराब होने के बाद जब कई बार की शिकायत पर भी उसे संबंधित विभाग द्वारा ठीक नहीं कराया गया तो मंदिर समिति ने चंदा इकट्ठा करके इस पर भारत मशीन लगा कर चालू कराया गया।
केस चार
बिहारीगढ़ में फोनलेन निर्माण के दौरान सड़क के दोनो तरफ के हैंडपंप निर्माण की जद में आने के बाद हाईवे अथारिटी द्वारा उखाड़ दिए गए थे। बाद में इनमें से आधे हैंडपंप भी नहीं लगाए जा सके हैं।
केस पांच
मोहंड में लगाए गए हैंडपंपों से ज्यादा गहराई में बोरिंग होने के चलते दो से तीन व्यक्ति मिल कर ही हैंडपंप को चला पानी निकाल पाते हैं।
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नकुड़ के गांवों में 176 हैंडपंप खराब
नकुड़ ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में सरकारी अभिलेखों में ही 176 हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि इनकी वास्तविक संख्या ज्यादा है। विकासखंड के लेखाकार रवि गुप्ता ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र में टोटल 3435 हैंडपंप हैं। इनमें से 157 को रिबोर कराया गया है, जबकि 176 हैंडपंप खराब पड़े हैं।
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देवबंद नगर में खराब पड़े 35 हैंडपंप
देवबंद। नगरपालिका परिषद द्वारा नगर के विभिन्न मोहल्लों में 140 हैंडपंप लगा रखे हैं। जिनमें से 35 पिछले करीब एक डेढ़ साल से खराब पड़े हैं। जलकल विभाग प्रभारी मो. आरिफ ने बताया कि करीब 30-35 हैंडपंप खराब होने के कारण बंद पड़े हैं। इनमें कुछ के रिबोर तो कुछ को ठीक किया जाना है। अप्रैल माह तक सभी खराब हैंडपंपों को सही कराकर पेयजल आपूर्ति को सुचारु करा दिया जाएगा।
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केस एक
बड़गांव और दल्हेड़ी में दो-दो साल से हैंडपंप खराब पड़े हैं। एक की तो मशीन तक गायब हो चुकी है। बड़गांव के प्रधान नीलम राणा और दल्हेड़ी के प्रधान सुरेंद्र प्रजापति का कहना है कि उनकी पंचायतों में सात हैंडपंप खराब पड़े हैं। बजट के अभाव में ठीक नहीं कराए जा सके हैं।
केस दो
साढ़ौली कदीम के ग्राम पंचायत मुर्तजापुर के मजरे हीराहेड़ी में पथरवा मार्ग पर एक साल से हैंडपंप खराब पड़ा है। इसके आस पास घास उग गई है। इससे बीस परिवार प्रभावित हो रहे हैं। शिकायत के बाद भी इसका रिबोर नहीं कराया गया है।
केस तीन
नानौता क्षेत्र के गांव तिलफरा ऐनाबाद के मंदिर परिसर में स्थित हैंडपंप के खराब होने के बाद जब कई बार की शिकायत पर भी उसे संबंधित विभाग द्वारा ठीक नहीं कराया गया तो मंदिर समिति ने चंदा इकट्ठा करके इस पर भारत मशीन लगा कर चालू कराया गया।
केस चार
बिहारीगढ़ में फोनलेन निर्माण के दौरान सड़क के दोनो तरफ के हैंडपंप निर्माण की जद में आने के बाद हाईवे अथारिटी द्वारा उखाड़ दिए गए थे। बाद में इनमें से आधे हैंडपंप भी नहीं लगाए जा सके हैं।
केस पांच
मोहंड में लगाए गए हैंडपंपों से ज्यादा गहराई में बोरिंग होने के चलते दो से तीन व्यक्ति मिल कर ही हैंडपंप को चला पानी निकाल पाते हैं।

बड़गांव में खराब पड़ा हैंडपंप- फोटो : SAHARANPUR

हीराहेडी में एक साल से बंद पड़ा हैंडपंप- फोटो : SAHARANPUR

देवबंद में भायला रेलवे फाटक पर खराब पड़ा हैंडपंप- फोटो : SAHARANPUR