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कागजों में हुआ गोद लिए तालाबों का सुंदरीकरण
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बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव खजूरी अकबरपुर में तालाब की भूमि पर हुआ कब्जा
- फोटो : SAHARANPUR
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पुराने का सौदर्यीकरण हुआ नहीं, नए तालाब किए चिह्नित
सहारनपुर। तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य कागजों में पूरा कर लिया गया है। एक साल पूर्व 98 तालाबोें को सुंदरीकरण और जल संरक्षण संबंधी कार्यों के लिए विभिन्न विभागों को गोद दिए गए थे, लेकिन योजना कागजों में निपट रही है। कुछ ही तालाबों पर कार्य हुआ। अधिकांश तालाबों पर अब भी कब्जे हैं। सबसे मजे की बात यह है कि फिर से 230 तालाबों को सुंदरीकरण के लिए चिह्नित भी कर लिया गया है। गोद लिए तालाबों के संबंध में अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो स्थिति बदतर नजर आई है। पेश है रिपोर्ट...
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-- केस एक - गांव में कभी पहुंचे नहीं अधिकारी
बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव खजूरी अकबरपुर स्थित तालाब को गन्ना विभाग को गोद दिया गया था, लेकिन तालाब का सुंदरीकरण नहीं हो सका। निवर्तमान ग्राम प्रधान रविंद्र यादव का कहना है कि किस विभाग को तालाब गोद दिया गया, उन्हें जानकारी नहीं है। न ही विभाग के अधिकारी आए और न ही उनसे किसी ने संपर्क किया। जो भी काम हुआ है, वह ग्राम पंचायत स्तर से ही कराया गया। उधर, जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी का कहना है कि तालाब की सफाई कराकर पौधरोपण कराया था। देखरेख का कार्य संबंधित विभाग को करना है।
-- केस दो - नहीं मिला विभाग से सहयोग
गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव सुनहेटी खड़खड़ी के तलाब पर जिला पंचायत राज विभाग द्वारा कार्य कराया जाना था। प्रधान जोध सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर से कार्य कराया गया। इसमें विभागीय सहयोग नहीं मिला। वहीं, डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि तालाबों पर सुंदरीकरण कार्य हुआ है, अगर दोबारा कब्जे हुए हैं तो उनको भी हटवाया जाएगा। अलग से कोई बजट नहीं था।
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- केस तीन -- कई वर्षों से हुआ है कब्जा
सढ़ौली कदीम के गांव कांसेपुर के तालाब को लोक निर्माण विभाग को गोद दिया गया था, लेकिन तालाब पर कब्जे हुए और गंदगी बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि न ही तालाब की सफाई कराई गई और न पौधरोपण हुआ।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार का कहना है कि विभाग की ओर सुंदरीकरण का कार्य कराया गया था। अलग से बजट नहीं था। अगर तालाब पर दोबारा कब्जा हुआ है तो तहसील स्तर के अधिकारी उसे हटवाएंगे।
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खानापूर्ति कर गए थे कर्मचारी
तालाबों के सुंदरीकरण के नाम पर अधिकारियों ने सिर्फ खानापूर्ति की है। गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव कुतुबपुर कुसानी के निवर्तमान ग्राम प्रधान हसीन अहमद का कहना है कि उनके गांव के तालाब को डूडा विभाग द्वारा गोद लिया गया था, जिसके बाद एक दिन विभाग के कर्मचारी आए और तालाब पर जेसीबी से कुछ देर कार्य कराकर चले गए, जिसके बाद उन्होंने इसकी कोई खबर नहीं ली। तालाब की स्थिति वर्तमान में बदतर है।
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ग्रामीणों का आरोप, दर्शाया खर्चा, नहीं हुआ काम
विकासखंड नागल के गांव पहाड़पुर में कुकावी रोड स्थित तालाब की स्थिति बदतर है। तालाब में कूड़ा पड़ा और घास से अटा हुआ है। ग्रामीण दीपक, कमल कुमार, मन्नू, अनुज, अक्षय, सचिन का आरोप है कि तालाब के सुंदरीकरण में पंचायत स्तर से पैसा खर्च होना दर्शाया गया है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। सिर्फ कागजों में ही तालाब का सुंदरीकरण हुआ है।
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देवबंद क्षेत्र में भी तालाबों की जमीन पर हुए अवैध कब्जे
तहसील देवबंद के गांव चंदेना कोली, साखन कलां, बढ़ेड़ी मजबता, रणखंडी, मानकी, अंबहेटा सेखां, इबादुल्लापुर और कुलसत गांवों में स्थित तालाबों को प्रशासन द्वारा कब्जामुक्त कराया गया था। मनरेगा के तहत खोदाई कराकर पौधरोपण किया गया, लेकिन वर्तमान में अधिकांश तालाबों की जमीन पर फिर से अवैध कब्जे कर लिए हैं। कहीं कूड़े के ढेर लगे हैं तो कहीं लोगों ने उपले रखकर अतिक्रमण कर रखा है। एसडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि तालाबों पर सुंदरीकरण कार्य हुआ है। कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
---- वर्जन -
अलग से नहीं है बजट: सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह का कहना है कि गोद लिए तालाबों के सुंदरीकरण को लेकर अलग से बजट नहीं है। जिन विभागों के अधिकारियों को तालाब गोद दिए गए थे, उन्हें स्वेच्छा से संरक्षण के तहत कार्य कराना था। कई जगहों पर अच्छा काम हुआ है। कहीं पर अगर लापरवाही बरती गई है तो उसको दिखवाया जाएगा। हाल ही में मनरेगा के तहत कई तालाबों का सुंदरीकरण कार्य भी शुरू होगा।
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सहारनपुर। तालाबों के सुंदरीकरण का कार्य कागजों में पूरा कर लिया गया है। एक साल पूर्व 98 तालाबोें को सुंदरीकरण और जल संरक्षण संबंधी कार्यों के लिए विभिन्न विभागों को गोद दिए गए थे, लेकिन योजना कागजों में निपट रही है। कुछ ही तालाबों पर कार्य हुआ। अधिकांश तालाबों पर अब भी कब्जे हैं। सबसे मजे की बात यह है कि फिर से 230 तालाबों को सुंदरीकरण के लिए चिह्नित भी कर लिया गया है। गोद लिए तालाबों के संबंध में अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो स्थिति बदतर नजर आई है। पेश है रिपोर्ट...
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-- केस एक - गांव में कभी पहुंचे नहीं अधिकारी
बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव खजूरी अकबरपुर स्थित तालाब को गन्ना विभाग को गोद दिया गया था, लेकिन तालाब का सुंदरीकरण नहीं हो सका। निवर्तमान ग्राम प्रधान रविंद्र यादव का कहना है कि किस विभाग को तालाब गोद दिया गया, उन्हें जानकारी नहीं है। न ही विभाग के अधिकारी आए और न ही उनसे किसी ने संपर्क किया। जो भी काम हुआ है, वह ग्राम पंचायत स्तर से ही कराया गया। उधर, जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी का कहना है कि तालाब की सफाई कराकर पौधरोपण कराया था। देखरेख का कार्य संबंधित विभाग को करना है।
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-- केस दो - नहीं मिला विभाग से सहयोग
गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव सुनहेटी खड़खड़ी के तलाब पर जिला पंचायत राज विभाग द्वारा कार्य कराया जाना था। प्रधान जोध सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर से कार्य कराया गया। इसमें विभागीय सहयोग नहीं मिला। वहीं, डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि तालाबों पर सुंदरीकरण कार्य हुआ है, अगर दोबारा कब्जे हुए हैं तो उनको भी हटवाया जाएगा। अलग से कोई बजट नहीं था।
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- केस तीन -- कई वर्षों से हुआ है कब्जा
सढ़ौली कदीम के गांव कांसेपुर के तालाब को लोक निर्माण विभाग को गोद दिया गया था, लेकिन तालाब पर कब्जे हुए और गंदगी बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि न ही तालाब की सफाई कराई गई और न पौधरोपण हुआ।
उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार का कहना है कि विभाग की ओर सुंदरीकरण का कार्य कराया गया था। अलग से बजट नहीं था। अगर तालाब पर दोबारा कब्जा हुआ है तो तहसील स्तर के अधिकारी उसे हटवाएंगे।
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खानापूर्ति कर गए थे कर्मचारी
तालाबों के सुंदरीकरण के नाम पर अधिकारियों ने सिर्फ खानापूर्ति की है। गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव कुतुबपुर कुसानी के निवर्तमान ग्राम प्रधान हसीन अहमद का कहना है कि उनके गांव के तालाब को डूडा विभाग द्वारा गोद लिया गया था, जिसके बाद एक दिन विभाग के कर्मचारी आए और तालाब पर जेसीबी से कुछ देर कार्य कराकर चले गए, जिसके बाद उन्होंने इसकी कोई खबर नहीं ली। तालाब की स्थिति वर्तमान में बदतर है।
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ग्रामीणों का आरोप, दर्शाया खर्चा, नहीं हुआ काम
विकासखंड नागल के गांव पहाड़पुर में कुकावी रोड स्थित तालाब की स्थिति बदतर है। तालाब में कूड़ा पड़ा और घास से अटा हुआ है। ग्रामीण दीपक, कमल कुमार, मन्नू, अनुज, अक्षय, सचिन का आरोप है कि तालाब के सुंदरीकरण में पंचायत स्तर से पैसा खर्च होना दर्शाया गया है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है। सिर्फ कागजों में ही तालाब का सुंदरीकरण हुआ है।
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देवबंद क्षेत्र में भी तालाबों की जमीन पर हुए अवैध कब्जे
तहसील देवबंद के गांव चंदेना कोली, साखन कलां, बढ़ेड़ी मजबता, रणखंडी, मानकी, अंबहेटा सेखां, इबादुल्लापुर और कुलसत गांवों में स्थित तालाबों को प्रशासन द्वारा कब्जामुक्त कराया गया था। मनरेगा के तहत खोदाई कराकर पौधरोपण किया गया, लेकिन वर्तमान में अधिकांश तालाबों की जमीन पर फिर से अवैध कब्जे कर लिए हैं। कहीं कूड़े के ढेर लगे हैं तो कहीं लोगों ने उपले रखकर अतिक्रमण कर रखा है। एसडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि तालाबों पर सुंदरीकरण कार्य हुआ है। कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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अलग से नहीं है बजट: सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी प्रणय सिंह का कहना है कि गोद लिए तालाबों के सुंदरीकरण को लेकर अलग से बजट नहीं है। जिन विभागों के अधिकारियों को तालाब गोद दिए गए थे, उन्हें स्वेच्छा से संरक्षण के तहत कार्य कराना था। कई जगहों पर अच्छा काम हुआ है। कहीं पर अगर लापरवाही बरती गई है तो उसको दिखवाया जाएगा। हाल ही में मनरेगा के तहत कई तालाबों का सुंदरीकरण कार्य भी शुरू होगा।