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Saharanpur News: स्टांप प्रकरण में अधिकारी और लिपिक पर गिरेगी गाज, निलंबन की संस्तुति
Sat, 10 Feb 2024 03:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 10 Feb 2024 03:09 AM IST
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सहारनपुर। स्टांप फर्जीवाड़े का मामला गरमाता जा रहा है। जिलाधिकारी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम के संबंधित अधिकारी और लिपिक के निलंबन की संस्तुति की है। अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई शासन स्तर से होगी, जबकि लिपिक पर नगरायुक्त स्तर से कार्रवाई होनी है। शासन और नगर निगम को भी पत्र जारी कर दिया गया है।
दरअसल, कई दिन पहले नगर निगम के तरफ से छोड़े गए पार्किंग के ठेकों में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए स्टांप में फर्जीवाड़ा पाया गया था। मुख्य नगर लेखा परीक्षक की जांच में इसका खुलासा हुआ था। कम मूल्य के स्टांप को अधिक मूल्य का दर्शाया गया था। जिससे राजस्व को हानि हुई है। इसके अलावा कई ठेकों में 100-00 रुपये के स्टांप लगाए गए हैं जो पर्याप्त नहीं है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के पत्र के बाद नगरायुक्त की तरफ से भी जांच कराई जा रही है।
जिसके लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। अब मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र की ओर से संबंधित अधिकारी और लिपिक के निलंबन के संस्तुति की गई है। लिपिक का निलंबन नगरायुक्त स्तर से होना है, जबकि अधिकारी का निलंबन शासन स्तर से होगा। फिलहाल नगरायुक्त के छुट्टी से लौटने का इंतजार है, जिसके बाद कार्रवाई हो सकती है। जिला प्रशासन के इस कदम से नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है, साथ ही ठेकों में कूट रचित स्टांप लगाने वाले ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। चर्चा के संबंधित ठेकेदार खुद के बचाव में राजनीतिक संरक्षण में चले गए हैं।
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जांच में और भी खुल सकते हैं मामले
मंडलायुक्त डॉ. ह्रषिकेश भास्कर यशोद ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। मंडलायुक्त के आदेश पर नगर निगम में पिछले चार साल में तमाम तरह के ठेकों में लगे स्टांप की जांच शुरू कर दी गई है। आशंका है कि स्टांप में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आ सकता है।
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दरअसल, कई दिन पहले नगर निगम के तरफ से छोड़े गए पार्किंग के ठेकों में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए स्टांप में फर्जीवाड़ा पाया गया था। मुख्य नगर लेखा परीक्षक की जांच में इसका खुलासा हुआ था। कम मूल्य के स्टांप को अधिक मूल्य का दर्शाया गया था। जिससे राजस्व को हानि हुई है। इसके अलावा कई ठेकों में 100-00 रुपये के स्टांप लगाए गए हैं जो पर्याप्त नहीं है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के पत्र के बाद नगरायुक्त की तरफ से भी जांच कराई जा रही है।
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जिसके लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। अब मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र की ओर से संबंधित अधिकारी और लिपिक के निलंबन के संस्तुति की गई है। लिपिक का निलंबन नगरायुक्त स्तर से होना है, जबकि अधिकारी का निलंबन शासन स्तर से होगा। फिलहाल नगरायुक्त के छुट्टी से लौटने का इंतजार है, जिसके बाद कार्रवाई हो सकती है। जिला प्रशासन के इस कदम से नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है, साथ ही ठेकों में कूट रचित स्टांप लगाने वाले ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। चर्चा के संबंधित ठेकेदार खुद के बचाव में राजनीतिक संरक्षण में चले गए हैं।
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जांच में और भी खुल सकते हैं मामले
मंडलायुक्त डॉ. ह्रषिकेश भास्कर यशोद ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। मंडलायुक्त के आदेश पर नगर निगम में पिछले चार साल में तमाम तरह के ठेकों में लगे स्टांप की जांच शुरू कर दी गई है। आशंका है कि स्टांप में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आ सकता है।