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ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया
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उर्दू तालीमी बोर्ड के सदस्यों ने राहत इंदौरी को दी श्रद्घांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। देश और विदेश के प्रसिद्घ शायर राहत इंदौरी के निधन पर दुख जाहिर करते हुए बुधवार को उन्हें श्रद्घांजलि दी गयी। उनके परिवार को दुख सहने की हिम्मत के लिएदुआ की गई।
गौरी शंकर बाजार स्थित एक सभागार में उर्दू तालीमी बोर्ड द्वारा श्रद्घांजलि सभा की गयी। महासचिव दानिश सिद्दीकी ने कहा कि दिल में हिंदुस्तान और शायरी में इंसानियत को प्राथमिकता देने वाले प्रसिद्घ शायर राहत इंदौरी मंगलवार को दुनिया से रुखसत हो गए। उनकी शायरी हमेशा सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। डाक्टर राहत इंदौरी ने कभी शायरी पढ़ते हुए कहा था कि कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया, इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया, दो गज सही ये मेरी मिल्कियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया। इसी तरह उन्होंने शायरी पढ़ी थी कि राहत सबके दिलों की आज उल्फत चली गई, ऐसा लगा कि बज्म से राहत चली गई। मैं अपनी मुट्ठियों में कैद कर लेता जमीनों को, मगर मेरे कबीलों को बिखर जाने की जल्दी थी। बोर्ड के संरक्षक वदूद अहमद ने कहा कि राहत इंदौरी के जाने से देश को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई शायद ही हो पाएगी। वह हिंदी व उर्दू अदब के कद्दावर शायर थे। उनकी शायरी सभी में जोश भर देती थी। इस दौरान नवेद उल हक सिद्दीकी, शहजाद अख्तर, ख्वाजा सलमान, राव रमीज, मजहर उमर, मोहम्मद फरहत, जुनैद सज्जाद, राफे सिद्दीकी, मोहम्म्द इमरान, सलमान थानवी ने राहत इंदौरी के लिए दुआएं की।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। देश और विदेश के प्रसिद्घ शायर राहत इंदौरी के निधन पर दुख जाहिर करते हुए बुधवार को उन्हें श्रद्घांजलि दी गयी। उनके परिवार को दुख सहने की हिम्मत के लिएदुआ की गई।
गौरी शंकर बाजार स्थित एक सभागार में उर्दू तालीमी बोर्ड द्वारा श्रद्घांजलि सभा की गयी। महासचिव दानिश सिद्दीकी ने कहा कि दिल में हिंदुस्तान और शायरी में इंसानियत को प्राथमिकता देने वाले प्रसिद्घ शायर राहत इंदौरी मंगलवार को दुनिया से रुखसत हो गए। उनकी शायरी हमेशा सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। डाक्टर राहत इंदौरी ने कभी शायरी पढ़ते हुए कहा था कि कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया, इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया, दो गज सही ये मेरी मिल्कियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया। इसी तरह उन्होंने शायरी पढ़ी थी कि राहत सबके दिलों की आज उल्फत चली गई, ऐसा लगा कि बज्म से राहत चली गई। मैं अपनी मुट्ठियों में कैद कर लेता जमीनों को, मगर मेरे कबीलों को बिखर जाने की जल्दी थी। बोर्ड के संरक्षक वदूद अहमद ने कहा कि राहत इंदौरी के जाने से देश को जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई शायद ही हो पाएगी। वह हिंदी व उर्दू अदब के कद्दावर शायर थे। उनकी शायरी सभी में जोश भर देती थी। इस दौरान नवेद उल हक सिद्दीकी, शहजाद अख्तर, ख्वाजा सलमान, राव रमीज, मजहर उमर, मोहम्मद फरहत, जुनैद सज्जाद, राफे सिद्दीकी, मोहम्म्द इमरान, सलमान थानवी ने राहत इंदौरी के लिए दुआएं की।
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