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संख्या तो घटी, नहीं खत्म हो सका कुपोषण

Fri, 05 Mar 2021 09:22 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 09:22 PM IST
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Number decreased, malnutrition could not end
सहारनपुर। नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं में हर माह पुष्टाहार बंटने के बावजूद कुपोषण दूर नहीं हो सका। वर्तमान में जनपद में करीब 20 हजार कुपोषित और तीन हजार अत्यंत कुपोषित बच्चे हैं। बीते पांच सालों में संख्या तो घटी है, लेकिन कुपोषण का दंश अब भी बच्चे झेल रहे हैं।
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बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं। पहले पंजीरी और पका भोजन (कुक्ड फूड) वितरित किया जाता था। इसके बाद शासन ने स्वयं सहायता समूहों को शुष्क पोषाहार वितरित करने की जिम्मेदारी है। शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ियां और देहात क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों द्वारा गेेहूं, चावल, दाल वितरित किया गया। इसके अलावा जनपद की 3410 में 70 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाओं का भी निर्माण हुआ।
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फरवरी माह में शुष्क पोषाहार बंट चुका है। मगर, हाल ही में हुए सर्वे में करीब 20 हजार कुपोषित और तीन हजार अत्यंत कुपोषित बच्चे मिले हैं। अत्यंत कुपोषित को इलाज की आवश्यकता है। इसको लेकर सरकारी अस्पतालों में बेड भी आरक्षित हैं, लेकिन बाल एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जागरूक करने के बावजूद ज्यादातर अभिभावक बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने से बचते हैं। ऐसे में लापरवाही इन बच्चों के जीवन पर भारी पड़ सकती है। ---------
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वर्ष---- कुपोषित ---------- अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------ 52410 ---------18105
2018------ 41869----------12547
2019------ 33825-----------6910
2020------ 21315 ----------4375
2021-------20157-----------3030
----------- वर्जन
विभाग की योजना है कि चिह्नित कुपोषित बच्चों को योजनाओं का लाभ दिलवाकर पूर्ण रूप से स्वस्थ बनाया जाए। स्टाफ की कमी की वजह से अभियान चलाने में थोड़ी दिक्कत आती है। कई बार अभिभावकों की अनदेखी की वजह से विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ता है। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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