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नोमान की पाला बदली, काजी परिवार में बिखराव
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सहारनपुर। जिले की सियासत में खासा दखल रखने वाले काजी परिवार में एक बार फिर सियासी बिखराव हो गया। अब नोमान मसूद ने अपनी राजनीतिक राह अलग कर ली है। पूर्व में भी कई साल तक काजी परिवार में ऐसा ही बिखराव रहा था, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में परिवार एकजुट हो गया था।
दरअसल, वर्ष 2012 तक पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद कांग्रेस में ही थे। इसी दौरान इमरान मसूद ने अपना अलग राजनीतिक वजूद बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव में काजी रशीद मसूद को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव सपा में ले आए। ऐसे में इमरान मसूद सपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तो काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद ने परिवार को एकजुट किया और इमरान मसूद को चुनाव लड़ाया। उधर, कुछ समय पहले ही काजी रशीद मसूद का इंतकाल हो गया। इसके बाद काजी परिवार की सियासी विरासत इमरान मसूद के पास आ गई। तब से अब तक काजी परिवार एकजुट ही था, लेकिन एकाएक नोमान मसूद के कांग्रेस छोड़कर रालोद में चले जाने से काजी परिवार में फिर से सियासी बिखराव हो गया है। बदली राजनीतिक राहें क्या गुल खिलाएंगी, यह भविष्य तय करेगा।
गठबंधन में चुनाव लड़ने पर है नजर
नोमान मसूद के रालोद में शामिल होने के कई सियासी मायने हैं। उसमें सबसे बड़ी बात आगामी विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरण की है। चूंकि चुनाव में सपा और रालोद का गठबंधन होना लगभग तय है। उम्मीद लगाई जा रही है कि गठबंधन में रालोद को जिले में कम से कम दो सीट पर प्रत्याशी उतारने का मौका मिल सकता है। इस लिहाज से नोमान मसूद का प्रयास रहेगा कि गंगोह अथवा नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी मजबूत की जाए।
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दरअसल, वर्ष 2012 तक पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद और इमरान मसूद कांग्रेस में ही थे। इसी दौरान इमरान मसूद ने अपना अलग राजनीतिक वजूद बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव में काजी रशीद मसूद को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव सपा में ले आए। ऐसे में इमरान मसूद सपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तो काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद ने परिवार को एकजुट किया और इमरान मसूद को चुनाव लड़ाया। उधर, कुछ समय पहले ही काजी रशीद मसूद का इंतकाल हो गया। इसके बाद काजी परिवार की सियासी विरासत इमरान मसूद के पास आ गई। तब से अब तक काजी परिवार एकजुट ही था, लेकिन एकाएक नोमान मसूद के कांग्रेस छोड़कर रालोद में चले जाने से काजी परिवार में फिर से सियासी बिखराव हो गया है। बदली राजनीतिक राहें क्या गुल खिलाएंगी, यह भविष्य तय करेगा।
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गठबंधन में चुनाव लड़ने पर है नजर
नोमान मसूद के रालोद में शामिल होने के कई सियासी मायने हैं। उसमें सबसे बड़ी बात आगामी विधानसभा चुनाव के सियासी समीकरण की है। चूंकि चुनाव में सपा और रालोद का गठबंधन होना लगभग तय है। उम्मीद लगाई जा रही है कि गठबंधन में रालोद को जिले में कम से कम दो सीट पर प्रत्याशी उतारने का मौका मिल सकता है। इस लिहाज से नोमान मसूद का प्रयास रहेगा कि गंगोह अथवा नकुड़ विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी मजबूत की जाए।
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