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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   No life-saving medicines in District Women's Hospital for six months

जिला महिला अस्पताल में छह माह से जीवन रक्षक दवाएं नहीं

Sat, 17 Apr 2021 11:52 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Apr 2021 11:52 PM IST
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No life-saving medicines in District Women's Hospital for six months
सहारनपुर। सरकारी अस्पतालों में सरकार की व्यवस्थाएं कितनी दुरुस्त हैं इसकी पोल खुल रही है। जिला महिला अस्पताल में छह माह से जीवन रक्षक दवाएं खत्म हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान बचाना संभव नहीं है।
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सरकारी अस्पतालों में दवाईयों की उपलब्धता खोलने के लिए इंडेंट बुक की काफी है। मरीजों द्वारा दवा की मांग करने पर यह लिख दिया जाता है कि दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। दवाईयों की उपलब्धता को लेकर कुछ चिकित्सकों से बात की कई तो उन्होंने बताया कि यह दवाएं मरीज को तब दी जाती हैं, जब लगता है कि मरीज को बचाना मुश्किल हो रहा है। चूंकि महिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ से दस प्रसव ऑपरेशन से होते हैं। यानी प्रति माह 300 से अधिक महिलाओं की जान खतरे में आती है। ऐसी स्थिति में इन दवाओं की जरूरत और बढ़ जाती है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन थियेटर में इन दवाओं की उपलब्धता होना अनिवार्य है। मगर जिला महिला अस्पताल में इन दवाओं का टोटा है।
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यह हैं जीवन रक्षक दवाएं
जीवन रक्षक दवाओं में जिन दवाओं और इंजेक्शन को शामिल किया गया है। उनमें हेमेक्सिल, एडरनिल इंजेक्शन, कैल्शियम ग्लूकोनेट, डैक्सामिथासोन, आयरन सुकरोज इंजेक्शन आदि दवाएं शामिल हैं।
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--- वर्जन
जीवन रक्षक दवाएं हमारे पास पर्याप्त मात्रा में हैं। सरकार से दवा मिले या ना मिले, मगर इन महत्वपूर्ण दवाओं को हम अपने पास हमेशा रखते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर मरीज की जान बचाई जा सके।

- डॉ. ममता सोढी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
जन औषधि केंद्र एक साल से बंद
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों को लेकर भी सरकार और प्रशासन गंभीर नजर नहीं है। जनपद में एसबीडी जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के सामने और राजकीय मेडिकल कॉलेज में जन औषधि केंद्र खोले गए थे। जो कोरोना के समय से यानी करीब 13 माह से बंद पड़े हैं। ऐसे में गरीबों को सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराने की सरकार की योजना फेल साबित हो रही है।
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