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शुभम का नहीं मिला कोई आपराधिक इतिहास
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-- मां-बाप की हो चुकी है मौत और बहन की शादी
-- ओवैसी की गाड़ी पर फायरिंग का आरोपी है शुभम
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर फायरिंग करने का आरोपी शुभम मूल रूप से सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र के गांव सांपला बेगमपुर का रहने वाला है। पुलिस ने शुभम का आपराधिक इतिहास खंगाला है, लेकिन अभी तक कोई मामला नहीं मिला है।
बृहस्पतिवार की शाम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर हापुड़ के पिलखुवा में छिजारसी टोल प्लाजा के पास फायरिंग की गई। इस मामले में मौके एक आरोपी सचिन निवासी बादलपुर जनपद गौतमबुद्ध नगर को पकड़ा गया, जबकि दूसरे आरोपी शुभम पुत्र स्व. प्रमोद ने सरेंडर कर दिया। हापुड़ पुलिस ने सहारनपुर पुलिस से संपर्क कर शुभम के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी की। एसपी देहात अतुल शर्मा ने बताया कि शुभम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी और बहन की शादी हो गई है। शुभम गांव सांपला बेगमपुर बहुत कम आता था। एसएसपी आकाश तोमर ने बताया जांच में पता चला है कि शुभम मोदीपुरम और गाजियाबाद में रहता था।
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सदमे में दादा, चाचा व ग्रामीण
- पुलिस के आने पर घटना की जानकारी हुई
नकुड़। शुभम के पैतृक गांव सांपला बेगमपुर में उसके 80 वर्षीय दादा नेत्रपाल सिंह व अविवाहित चाचा लोकेश रहते हैं, जो इस घटना से सदमे में हैं। शुक्रवार की सुबह आठ बजे शुभम के पैतृक आवास पर पुलिस पहुंची। दादा व चाचा सहित ग्रामीणों को पुलिस ने शुभम द्वारा घटना करने की जानकारी दी। एक बार को शुभम के दादा व चाचा और ग्रामीणों को यकीन नहीं हुआ। चाचा लोकेश ने बताया कि 19 वर्ष पूर्व शुभम के पिता प्रमोद की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके तीन वर्ष बाद शुभम की मां रेखा की भी बुखार से जान चली गई थी। शुभम उस समय पांच और उसकी बहन कोमल की उम्र करीब सात वर्ष थी। माता-पिता की मृत्यु के बाद बचपन से ही नंदी फिरोजपुर में मामा के यहां दोनों भाई-बहन रहते थे। दोनों का पालन पोषण व पढ़ाई उनके मामा के यहां ही हुई है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व शुभम की बहन की शादी हो गई थी। शुभम सांपला बेगमपुर बहुत कम आता था। अंतिम बार वह गांव में डेढ़ वर्ष पूर्व आया था।
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शुभम की शादी के सपने देख रहे दादा, आंखें हुई नम
नकुड़। दादा नेत्रपाल सिंह ने बताया कि शुभम की मां की मृत्यु हो जाने के बाद घर में खाना बनाने के लिए कोई महिला नहीं रही। उनके छोटे बेटे लोकेश की भी शादी नहीं हुई है। पुत्र लोकेश ही खाना बनाता और खेती भी करता है। अब शुभम की शादी करना चाहते थे। ताकि परिवार में बहू आए और वंश आगे बढ़े। नम आंखों से नेत्रपाल ने कहा कि शुभम की हरकत से सदमे में हैं।
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-- ओवैसी की गाड़ी पर फायरिंग का आरोपी है शुभम
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर फायरिंग करने का आरोपी शुभम मूल रूप से सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र के गांव सांपला बेगमपुर का रहने वाला है। पुलिस ने शुभम का आपराधिक इतिहास खंगाला है, लेकिन अभी तक कोई मामला नहीं मिला है।
बृहस्पतिवार की शाम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर हापुड़ के पिलखुवा में छिजारसी टोल प्लाजा के पास फायरिंग की गई। इस मामले में मौके एक आरोपी सचिन निवासी बादलपुर जनपद गौतमबुद्ध नगर को पकड़ा गया, जबकि दूसरे आरोपी शुभम पुत्र स्व. प्रमोद ने सरेंडर कर दिया। हापुड़ पुलिस ने सहारनपुर पुलिस से संपर्क कर शुभम के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी की। एसपी देहात अतुल शर्मा ने बताया कि शुभम का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी और बहन की शादी हो गई है। शुभम गांव सांपला बेगमपुर बहुत कम आता था। एसएसपी आकाश तोमर ने बताया जांच में पता चला है कि शुभम मोदीपुरम और गाजियाबाद में रहता था।
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सदमे में दादा, चाचा व ग्रामीण
- पुलिस के आने पर घटना की जानकारी हुई
नकुड़। शुभम के पैतृक गांव सांपला बेगमपुर में उसके 80 वर्षीय दादा नेत्रपाल सिंह व अविवाहित चाचा लोकेश रहते हैं, जो इस घटना से सदमे में हैं। शुक्रवार की सुबह आठ बजे शुभम के पैतृक आवास पर पुलिस पहुंची। दादा व चाचा सहित ग्रामीणों को पुलिस ने शुभम द्वारा घटना करने की जानकारी दी। एक बार को शुभम के दादा व चाचा और ग्रामीणों को यकीन नहीं हुआ। चाचा लोकेश ने बताया कि 19 वर्ष पूर्व शुभम के पिता प्रमोद की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके तीन वर्ष बाद शुभम की मां रेखा की भी बुखार से जान चली गई थी। शुभम उस समय पांच और उसकी बहन कोमल की उम्र करीब सात वर्ष थी। माता-पिता की मृत्यु के बाद बचपन से ही नंदी फिरोजपुर में मामा के यहां दोनों भाई-बहन रहते थे। दोनों का पालन पोषण व पढ़ाई उनके मामा के यहां ही हुई है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व शुभम की बहन की शादी हो गई थी। शुभम सांपला बेगमपुर बहुत कम आता था। अंतिम बार वह गांव में डेढ़ वर्ष पूर्व आया था।
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शुभम की शादी के सपने देख रहे दादा, आंखें हुई नम
नकुड़। दादा नेत्रपाल सिंह ने बताया कि शुभम की मां की मृत्यु हो जाने के बाद घर में खाना बनाने के लिए कोई महिला नहीं रही। उनके छोटे बेटे लोकेश की भी शादी नहीं हुई है। पुत्र लोकेश ही खाना बनाता और खेती भी करता है। अब शुभम की शादी करना चाहते थे। ताकि परिवार में बहू आए और वंश आगे बढ़े। नम आंखों से नेत्रपाल ने कहा कि शुभम की हरकत से सदमे में हैं।