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बदहाली: चहारदीवारी न दरवाजा, परिसर में खड़े झाड़,  जिस इमारत में बच्चों को सीखना था ककहरा, वहां भरा है भूसा

Thu, 21 Sep 2023 02:24 PM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
मोहित कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 21 Sep 2023 02:24 PM IST
सार

सहारनपुर के राजकीय इंटर काॅलेज की इमारत पिछले पांच साल से बदहाली का शिकार है।दीवारों पर काई जमी है तो खिड़कियों पर जंगली बेल चढ़ आई है। परिसर में बड़े झाड़ खड़े हैं। चहारदीवारी और दरवाजों के अभाव में कॉलेज शिक्षा विभाग को हैंडओवर नहीं हो पा रहा है।

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no boundary wall, no door, School in Saharanpur where the children had to study is filled with straw
कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में छुटमलपुर का एक इंटर कॉलेज बदलाही का शिकार है। थानाक्षेत्र के गांव भैंसराऊ में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से पांच साल पहले निर्मित राजकीय इंटर काॅलेज की जिस इमारत में बच्चों को बैठकर ककहरा सीखना था, उसमें गोशाला का भूसा भरा है।

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चहारदीवारी, दरवाजों और रंगरोगन के अभाव में इमारत को शिक्षा विभाग के हैंडओवर नहीं किया जा सका है। देखरेख के अभाव में परिसर में ऊंची घास और जंगली पेड़ उग आए हैं, लेकिन कार्यदायी संस्था इन्हें साफ करने तक की जहमत नहीं उठा रही है। 

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कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

मुजफ्फराबाद ब्लाॅक के इस गांव में वर्ष 2007 में राजकीय इंटर काॅलेज स्वीकृत हुआ था। पांच साल बाद वर्ष 2012 में इमारत के निर्माण के लिए 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इसके दो साल बाद फरवरी 2014 में निर्माण कार्य शुरू कर वर्ष 2018 में बंद कर दिया था।

निर्माण लागत बढ़ने से स्वीकृत बजट कम पड़ने का हवाला देकर इमारत में दरवाजों, रास्ते, चहारदीवारी और फिनिशिंग का काम नहीं हो सका। इसके चलते इमारत शिक्षा विभाग को हैंडओवर नहीं की जा सकी।

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कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

इन पांच सालों में देखरेख के अभाव में इमारत के अंदर ऊंची घास और बड़े पेड़ उग आए। दीवारों पर काई की परतें और खिड़कियों पर जंगली बेल चढ़ गई है। लिंटर की सफाई न होने से उस पर इकट्ठा हुए कूड़े में जमा पानी लगातार उसे कमजोर बना रहा है। इमारत के कुछ कमरों में फिलहाल गोशाला का भूसा भरा है।

कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस द्वारा लगाया गया बोर्ड भी जर्जर हो गया है, जिस पर कार्य समाप्त होने की तिथि दिसंबर 2018 लिखी है। ग्राम प्रधान सतीश कुमार, ऋषिपाल उपाध्याय, मदन सैनी, नर सिंह, लाल सिंह, केहर सिंह, धीरज कुमार, ऋषिपाल सैनी, गुलेशर अंसारी आदि ग्रामीणों ने इमारत का कार्य पूरा कर आगामी सत्र से इंटर काॅलेज में कक्षाओं का संचालन शुरू कराने की मांग की है।  

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कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

डीएम की नाराजगी से भी नहीं चेते जिम्मेदार 
गांव के पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अनिल राणा का कहना है कि सात सितंबर को डीएम के दौरे के बाद भी कार्यदायी संस्था ने इमारत की सफाई नहीं कराई है, जबकि उस वक्त डीएम यहां खड़े झाड़ झंखाड़ और पेड़ों को देखकर काफी नाराज हुए थे। उन्होंने संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर तक कराने की चेतावनी दी थी।

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कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

गांव के विवेक उपाध्याय कहते हैं कि गांव में राजकीय इंटर काॅलेज स्वीकृत होने से इंटर तक की शिक्षा घर के पास मिलने की आस जगी थी, लेकिन 16 साल की लंबी अवधि के बाद भी इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। इमारत देखरेख के अभाव में बदहाल हो रही है।

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कॉलेज की बदहाली - फोटो : Amar Ujala

काॅलेज के लिए वर्ष 2012 में 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, जबकि अब 11 साल बाद रिवाइज बजट बढ़कर 2.19 करोड़ रुपये हो गया है। जिलाधिकारी द्वारा फंड स्वीकृत करने की कार्रवाई चल रही है। पैसा मिलने पर जल्द ही निर्माण कार्य पूरा करा इंटर काॅलेज की इमारत को शिक्षा विभाग के हैंडओवर कर दिया जाएगा।  - भरत लाल गोंड, नोडल अधिकारी/ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

 

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