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संस्कृति और समाज उत्थान के लिए गुरुकुल की जरूरत
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पंडित प्रपन्नाचार्य का शॉल ओढ़ाते दीपाशंकर महाराज
- फोटो : SAHARANPUR
बेहट (सहारनपुर)। ध्यान ग्रुप स्वामी दीपांकर महाराज ने कहा ज्ञान के प्रचार की जिम्मेदारी सदैव से ही ब्राह्मणों के हाथों में रही है आज पुन: उसी प्रकार के गुरुकुलों की स्थापना की आवश्यकता है।
सिद्ध पीठ श्री शाकंभरी देवी क्षेत्र के गांव नांगल माफी के पास प्रेम नगर में महर्षि विश्वामित्र विद्यापीठ का विधिवत हवन पूजन एवं मंत्रों उच्चारण के साथ ध्यान गुरू स्वामी दीपांकर महाराज एवं सांसद प्रदीप चौधरी ने संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा आज एक जगह से ही नहीं बल्कि हर मंदिर से इसी प्रकार के ज्ञान विज्ञान के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यापीठ के संचालक पंडित संजय प्रपन्नाचार्य की सराहना करते हुए कहा कि विद्यापीठ इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
सांसद प्रदीप चौधरी ने कहा कि हमारी शिक्षा पद्धति त्याग तपस्या एवं सेवा पर आधारित थी, लेकिन आज विदेशी संस्कृति भारतीय संस्कृति पर हावी हो रही है। विद्यापीठ के संचालक संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा हम सभी को पुरानी परंपरा को नये रूप में ज्ञान विज्ञान से सुरुचि पूर्ण बनाकर पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से गुरुकुल परंपरा को पुन: जागृत करने का आह्वान किया। इसमें श्री शांतानंद पुरी, सुशील चैतन्य, प्रगीत कौशिक, श्री मोहन शर्मा, हरीश कौशिक, अभिषेक कृष्णात्रेय, कमल नयन वेदपाठी, गोकरण दत्त शर्मा, शिवकुमार गौड़, राजन शर्मा, लाला नाथीराम, ब्राह्मण नेता राकेश शर्मा, मुकेश दीक्षित, राहुल शर्मा, पंडित अमन कौशिक, गोविंद शर्मा आदि शामिल रहे।
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सिद्ध पीठ श्री शाकंभरी देवी क्षेत्र के गांव नांगल माफी के पास प्रेम नगर में महर्षि विश्वामित्र विद्यापीठ का विधिवत हवन पूजन एवं मंत्रों उच्चारण के साथ ध्यान गुरू स्वामी दीपांकर महाराज एवं सांसद प्रदीप चौधरी ने संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा आज एक जगह से ही नहीं बल्कि हर मंदिर से इसी प्रकार के ज्ञान विज्ञान के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यापीठ के संचालक पंडित संजय प्रपन्नाचार्य की सराहना करते हुए कहा कि विद्यापीठ इस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
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सांसद प्रदीप चौधरी ने कहा कि हमारी शिक्षा पद्धति त्याग तपस्या एवं सेवा पर आधारित थी, लेकिन आज विदेशी संस्कृति भारतीय संस्कृति पर हावी हो रही है। विद्यापीठ के संचालक संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा हम सभी को पुरानी परंपरा को नये रूप में ज्ञान विज्ञान से सुरुचि पूर्ण बनाकर पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से गुरुकुल परंपरा को पुन: जागृत करने का आह्वान किया। इसमें श्री शांतानंद पुरी, सुशील चैतन्य, प्रगीत कौशिक, श्री मोहन शर्मा, हरीश कौशिक, अभिषेक कृष्णात्रेय, कमल नयन वेदपाठी, गोकरण दत्त शर्मा, शिवकुमार गौड़, राजन शर्मा, लाला नाथीराम, ब्राह्मण नेता राकेश शर्मा, मुकेश दीक्षित, राहुल शर्मा, पंडित अमन कौशिक, गोविंद शर्मा आदि शामिल रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते दीपाशंकर महाराज- फोटो : SAHARANPUR
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