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Saharanpur News: नकुड़ और बेहट तहसील को मिली क्लीन चिट, जांच पूरी
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सहारनपुर। प्रदेश भर में शक के घेरे में आए 2016, 2018 और 2019 के स्टांप को लेकर नकुड़ और बेहट तहसील को क्लीन चिट मिल गई है। इस अवधि में बैनामों में लगे स्टांप की बड़ी संख्या में जांच की गई। जांच के दौरान स्टांप ठीक मिले। अब रामपुर मनिहारान तहसील के बैनामों में लगे स्टांप की जांच शुरू की गई है।
बता दें, कि पिछले दिनों शासन की तरफ से आदेश जारी किए गए थे कि 2016, 2018 और 2019 में हुए ऐसे बैनामे, जिनमें 5, 10, 15, 20 या 25 हजार के भौतिक स्टांप का इस्तेमाल हुआ है उनकी जांच कराई जाए। इनमें लगे स्टांप में फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई थी। इन वर्षों में जिले में करीब एक लाख बैनामे हुए थे। इसके बाद रजिस्ट्री कार्यालय से मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय में संदेह के घेरे में आए बैनामों में लगे स्टांप भेजे गए।
सबसे पहले नकुड़ और बेहट तहसील के बैनामों में लगे स्टांप की जांच कराई गई। जांच में देखा गया कि पांच हजार या इससे अधिक के जो स्टांप लगे हैं वह मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय से खरीदे गए हैं या फिर नहीं। उन स्टांप के क्रमांक का मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड से मिलान किया गया। अभी तक की जांच में दोनों तहसीलों को क्लीन चिट दी गई है। सदर तहसील में फर्जीवाड़ा मिल सकता है, क्योंकि सबसे अधिक बैनामे शहरी क्षेत्र में रहते हैं।
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- जिले में किस वर्ष हुए कितने बैनामे
2015-16 : 36411
2016-17 : 29728
2017-18 : 30632
2018-19 : 36925
2019-20 : 39015
2020-21 : 42522
2021-22 : 52634
2022-23 : 67783
2023-24 : 75369
2024-25 : 64126
2024-25 का आंकड़ा जनवरी तक का है।
वर्जन
बैनामों में लगे जो भी स्टांप जांच के लिए भेजे गए थे वह ठीक मिले हैं। नकुड़ और बेहट तहसील की जांच पूरी हो गई है। यहां पर स्टांप में कोई कमी नहीं मिली। - सूरज कुमार, मुख्य कोषाधिकारी
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बता दें, कि पिछले दिनों शासन की तरफ से आदेश जारी किए गए थे कि 2016, 2018 और 2019 में हुए ऐसे बैनामे, जिनमें 5, 10, 15, 20 या 25 हजार के भौतिक स्टांप का इस्तेमाल हुआ है उनकी जांच कराई जाए। इनमें लगे स्टांप में फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई थी। इन वर्षों में जिले में करीब एक लाख बैनामे हुए थे। इसके बाद रजिस्ट्री कार्यालय से मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय में संदेह के घेरे में आए बैनामों में लगे स्टांप भेजे गए।
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सबसे पहले नकुड़ और बेहट तहसील के बैनामों में लगे स्टांप की जांच कराई गई। जांच में देखा गया कि पांच हजार या इससे अधिक के जो स्टांप लगे हैं वह मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय से खरीदे गए हैं या फिर नहीं। उन स्टांप के क्रमांक का मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड से मिलान किया गया। अभी तक की जांच में दोनों तहसीलों को क्लीन चिट दी गई है। सदर तहसील में फर्जीवाड़ा मिल सकता है, क्योंकि सबसे अधिक बैनामे शहरी क्षेत्र में रहते हैं।
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- जिले में किस वर्ष हुए कितने बैनामे
2015-16 : 36411
2016-17 : 29728
2017-18 : 30632
2018-19 : 36925
2019-20 : 39015
2020-21 : 42522
2021-22 : 52634
2022-23 : 67783
2023-24 : 75369
2024-25 : 64126
2024-25 का आंकड़ा जनवरी तक का है।
वर्जन
बैनामों में लगे जो भी स्टांप जांच के लिए भेजे गए थे वह ठीक मिले हैं। नकुड़ और बेहट तहसील की जांच पूरी हो गई है। यहां पर स्टांप में कोई कमी नहीं मिली। - सूरज कुमार, मुख्य कोषाधिकारी