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Saharanpur News: एमएसयू को जलभराव से निजात दिलाने के लिए बजट का इंतजार
Sat, 31 May 2025 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 31 May 2025 12:45 AM IST
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सहारनपुर। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। इसकी एक वजह शासन से बजट नहीं मिलना भी है। बीते दिनों हुई बारिश में परिसर के अन्य भवनों के अलावा कुलपति आवास तक जलमग्न रहा था। बरसात के दिनों में जलभराव बड़ी समस्या बन सकता है।
विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य दो चरणों में होने हैं। अभी तक पहले चरण के कार्य हुए हैं, जिनमें से कुछ में अंतिम चरण का कार्य चल रहा है। गंभीर बात यह है कि कार्यदायी संस्था की खराब इंजीनियरिंग के कारण विश्वविद्यालय में जलभराव की समस्या बन गई है। यह समस्या पहले से है। बीते वर्ष बारिश के कारण पूरे विश्वविद्यालय में जलभराव हुआ था। वाहनों तक का पानी के बीच से निकलना मुश्किल हो रहा था।
उसके बाद जिला अधिकारी द्वारा विश्वविद्यालय का निरीक्षण करते हुए कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को जलभराव की समस्या दूर करने के निर्देश दिए गए थे। मार्च 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विश्वविद्यालय के भ्रमण के दौरान निर्माण कार्यों का जायजा लिया था। जलभराव का मामला उनके भी संज्ञान में था। ऐसे में उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता के साथ गति लाने के निर्देश देने के साथ ही जलभराव की समस्या भी दूर करने को कहा था, लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है।
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पढ़ाई में बन सकता है बाधा
विश्वविद्यालय परिसर में 28 पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यदि जलभराव की समस्या बरसात से पहले दूर नहीं की गई तो बरसात के दिनों में जलभराव फिर से समस्या बन सकता है। इससे विद्यार्थियों का पढ़ने के लिए अलग अलग विभागों में आवागमन प्रभावित हो सकता है।
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जलभराव को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही पीएम उषा योजना के तहत जल निकासी पर काम होना है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा हुआ है। अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। बजट मिलने के बाद ही जलनिकासी की व्यवस्था हो सकेगी।
- वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, एमएसयू
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विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य दो चरणों में होने हैं। अभी तक पहले चरण के कार्य हुए हैं, जिनमें से कुछ में अंतिम चरण का कार्य चल रहा है। गंभीर बात यह है कि कार्यदायी संस्था की खराब इंजीनियरिंग के कारण विश्वविद्यालय में जलभराव की समस्या बन गई है। यह समस्या पहले से है। बीते वर्ष बारिश के कारण पूरे विश्वविद्यालय में जलभराव हुआ था। वाहनों तक का पानी के बीच से निकलना मुश्किल हो रहा था।
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उसके बाद जिला अधिकारी द्वारा विश्वविद्यालय का निरीक्षण करते हुए कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को जलभराव की समस्या दूर करने के निर्देश दिए गए थे। मार्च 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विश्वविद्यालय के भ्रमण के दौरान निर्माण कार्यों का जायजा लिया था। जलभराव का मामला उनके भी संज्ञान में था। ऐसे में उन्होंने कार्यों में गुणवत्ता के साथ गति लाने के निर्देश देने के साथ ही जलभराव की समस्या भी दूर करने को कहा था, लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है।
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पढ़ाई में बन सकता है बाधा
विश्वविद्यालय परिसर में 28 पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यदि जलभराव की समस्या बरसात से पहले दूर नहीं की गई तो बरसात के दिनों में जलभराव फिर से समस्या बन सकता है। इससे विद्यार्थियों का पढ़ने के लिए अलग अलग विभागों में आवागमन प्रभावित हो सकता है।
जलभराव को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही पीएम उषा योजना के तहत जल निकासी पर काम होना है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा हुआ है। अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ है। बजट मिलने के बाद ही जलनिकासी की व्यवस्था हो सकेगी।
- वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, एमएसयू