सहारनपुर। मुहर्रम की दस तारीख पर इस बार कोरोना और लॉकडाउन की वजह से जुलूस नहीं निकला। शिया सोगवारों ने हजरत इमाम हुसैन व करबला के 72 शहीदों की याद में शब्बेदारी की और नोहाख्वानी के बाद मातम किया।
मोहल्ला जाफरनवाज स्थित बड़ी इमाम बारगाह के प्रबंधक डाक्टर अथर हुसैन जैदी और अधिवक्ता मंजर हुसैन काजमी ने बताया कि रविवार को मुहर्रम का अशरा पूरा हो गया है। मजलिसों में बताया गया कि हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बहन हजरत जैनब, बेटे हजरत इमाम जैनुल आबेदीन और कुछ औरतें करबला में बाकी रह गए थे। शहादत के बाद की रात उन मजलूमों पर कयामत की रात थी। सब कुछ उजड़ चुका था। इसी ें मजलिसें शाम-ए-गरीब का आयोजन किया गया, जिसमें सालिम काजमी ने खिताब फरमाया। मजलिस में जैसे ही करबला उजड़ने का ब्यान किया तो मौजूद सोगवार रोने लगे और हाथों से अपनी छातियों पर मातम किया। मजलिस में अनवर अब्बास, फिरोज हैदर, सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जैदी ने अलविदा पढ़ी। मोहल्ला सामानियान स्थित इमाम बारगाह और मोहल्ला अंसारियान स्थित छोटी इमाम बारगाह में मुहर्रम की दस तारीख पर कार्यक्रम हुआ। इस बार कोरोना की वजह से जुलूस नहीं निकाला गया। इसके अलावा शिया सोगवारों ने अपने घरों पर ही मातम किया। इसके साथ ही मुहर्रम का अशरा संपन्न हो गया।

सहारनपुर में मुहर्रम पर फुव्वारा चौक पुलिस के साथ मौजूद एसपी सिटी विनीत भटनागर।- फोटो : SAHARANPUR

सहारनपुर के जाफर नवाज स्थित बडा इमाम बारगाह में मुहर्रम पर मौजूद सोगवार।- फोटो : SAHARANPUR