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Saharanpur News: पेयजल आपूर्ति के लिए नए सॉफ्टवेयर का लाया जाएगा प्रस्ताव

Fri, 25 Sep 2026 11:25 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 11:25 PM IST
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A proposal for new software for drinking water supply will be introduced.
संवाद न्यूज एजेंसी
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मुजफ्फरनगर। शहर में करीब 24 घंटे तक पेयजल आपूर्ति ठप रहने के मामले को नगर पालिका ने गंभीरता से लिया है। पालिका की ओर से पुराने ठेकेदार की जमानत राशि जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जबकि नई कंपनी को नोटिस दिया गया है। ऑटोमेशन सिस्टम के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए नया सॉफ्टवेयर लाने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव रखने की भी तैयारी चल रही है।
नगरपालिका परिषद में जलकल विभाग की ओर से शहरी क्षेत्र में स्थापित 81 ट्यूबवेलों से पेयजलापूर्ति का कार्य किया जा रहा है। इनमें से 70 ट्यूबवेल को स्काडा तकनीक आधारित ऑटोमेशन पैनल से जोड़ा गया है। इसके सहारे इनका संचालन स्वतः किया जाता है।
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बुधवार को स्काडा पैनल सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ गया था। सामने आया कि जलकल विभाग में ऑटोमेशन का कार्य देखने वाले पुराने ठेकेदारों ने स्काडा पैनल को हैक कर सिस्टम को बंद कर दिया था। जिस कारण पेयजलापूर्ति ठप हो गई। सभासदों की ओर से मामले में गंभीर रुख अपनाया गया।
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जलकल विभाग के सहायक अभियंता अनुज कुमार ने बताया कि पूर्व में पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी उठा रही कंपनी प्रियांक एंटरप्राइजेज की करीब 14 लाख रुपये की जमानत राशि जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नई ठेकेदार फर्म सर्वेस इंटरप्राइजेज को नोटिस दिया गया है। इस तरह की किसी भी परेशानी पर कंपनी की निविदा निरस्त कर दी जाएगी।

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टेंडर की लड़ाई में नई और पुरानी फर्म के बीच विवाद
जलकल विभाग में ऑटोमेशन टेंडर की लड़ाई में नई और पुरानी फर्मों के बीच विवाद है। इसी का नतीजा रहा कि पूरा सिस्टम हैक कर पेयजल आपूर्ति को ठप कर दिया गया। साल 2015 से पहले तक शहरी क्षेत्र में पेयजल के लिए सभी ट्यूबवेल मानव संसाधन पर आधारित थे और मैनुअली चलाए जाते थे लेकिन तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम की शुरुआत की। अंशुल सिंह और इंद्र कुमार की फर्म मैसर्स प्रियांक इंटरप्राइजेज ने पालिका में स्काडा ऑटोमेशन सिस्टम लगाया और तभी से ट्यूबवेल ऑनलाइन सिस्टम के अधीन आ गए। साल 2025 में इसके लिए नया टेंडर निकाला गया। इसमें पांच फर्म ने भागीदारी की, एल-1 श्रेणी की शर्त पूरी करने वाली नई कंपनी सर्वेस इंटरप्राइजेज प्रा. लि. लखनऊ को टेंडर स्वीकृत हुआ, लेकिन समय से वर्क ऑर्डर नहीं मिलने पर फर्म मालिक सर्वेस सिंह ने मंडलायुक्त को शिकायत की। अपर नगरायुक्त राकेश यादव ने जांच शुरू कराई तो जलकल विभाग ने सर्वेस सिंह को वर्क ऑर्डर जारी किया। फर्म को एक जुलाई से कार्य शुरू करने की शर्त के साथ, ऐसे में अंशुल और इंद्र की कंपनी 2026 में तीन माह तक कार्य करती रही। दबाव में सर्वेस को कार्य तो दिया गया, लेकिन विवाद कायम रहा और अब बात सिस्टम हैक करने तक पहुंच चुकी है।
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