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मां ने दो बच्चों संग जहर खाया, बच्चों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 08 Jun 2016 12:07 AM IST
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Female Rupa
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में गागहलेड़ी थाना क्षेत्र के गांव नवादा तिवाया में मंगलवार की शाम करीब 35 वर्षीय एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों को जहर खिलाकर खुद भी खा लिया।
कुछ ही देर बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई, जबकि महिला को गंभीर हालत में पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला की हालत को गंभीर मानते हुए चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।
गांव नवादा तिवाया निवासी सोमपाल मजदूरी करता है। मंगलवार को भी वह मजदूरी करने गया हुआ था। शाम करीब चार बजे उसकी पत्नी रूपा ने अपने चार साल के बच्चे अतुल और पांच महीने की बेटी सिमरन को जहरीला पदार्थ खिलाकर खुद भी खा लिया।
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कुछ ही देर बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। इसका पता जैसे ही मोहल्लेवासियों को चला तो सोमपाल के घर पर भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने गागलहेड़ी थाने में सूचना दे दी।
पुलिस के गांव में पहुंचने से पहले दोनों बच्चे दम तोड़ चुके थे। इसके बाद पुलिस आनन फानन में रूपा को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। जहां चिकित्सकों ने रूपा की हालत को गंभीर मानते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
रेफर करने से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष रूपा के बयान हुए। चिकित्सकों द्वारा की गई पूछताछ में रूपा ने गृह क्लेश में बच्चों को खुद जहर देने की बात स्वीकार की है।
जिला अस्पताल पहुंचे सोमपाल ने बताया कि उसकी पत्नी पहले से ही नशे की गोलियां खाने की आदी है। शादी के समय उससे यह बात छुपाई गई थी। बताया कि नशे की गोलियां खाने की वजह से उसकी सोचने और समझने की क्षमता कम हो गई है।
कई बार नशे में अक्सर वह उलटी सीधी बात करती है। सोमपाल ने अपने ससुरालियों को घटना की जानकारी दे दी थी। कुछ ही देर बाद उसके ससुराली पहुंच गए थे। घबराए सोमपाल ने बताया कि ससुराली उसे जेल भिजवाने की धमकी दे रहे हैं, जबकि उसका कोई कसूर नहीं है।
नशा खत्म कर देता है सोचने की क्षमता
मनोचिकित्सक डा. अमरजीत पोपली का कहना है कि नशे का सबसे पहला हमला व्यक्ति के दिमाग पर होता है। यही कारण है कि उसके सोचने की क्षमता समाप्त हो जाती है। ऐसे माहौल में उसे अच्छा-खराब समझ में नहीं आता।
बल्कि नशे के दौर में जो बात मन में बैठ जाती है व्यक्ति यही करता है। उनका कहना है कि नवादा तिवाया में मां ने जिस तरह खुद के साथ मासूम बच्चों को जहर दे दिया। इससे एक बात तो साफ है कि उसने यह काम बिना सोचे-समझे किया होगा।
उसके मन में जरा भी संभावना होती तो शायद वह अपने बच्चों के साथ ऐसा नहीं करती। नशे में व्यक्ति रिश्ते, संबंध, ममता, संवेदना सब भूल जाता है।
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कुछ ही देर बाद दोनों बच्चों की मौत हो गई, जबकि महिला को गंभीर हालत में पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला की हालत को गंभीर मानते हुए चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया।
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गांव नवादा तिवाया निवासी सोमपाल मजदूरी करता है। मंगलवार को भी वह मजदूरी करने गया हुआ था। शाम करीब चार बजे उसकी पत्नी रूपा ने अपने चार साल के बच्चे अतुल और पांच महीने की बेटी सिमरन को जहरीला पदार्थ खिलाकर खुद भी खा लिया।
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कुछ ही देर बाद बच्चों की हालत बिगड़ने लगी। इसका पता जैसे ही मोहल्लेवासियों को चला तो सोमपाल के घर पर भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने गागलहेड़ी थाने में सूचना दे दी।
पुलिस के गांव में पहुंचने से पहले दोनों बच्चे दम तोड़ चुके थे। इसके बाद पुलिस आनन फानन में रूपा को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। जहां चिकित्सकों ने रूपा की हालत को गंभीर मानते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
रेफर करने से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष रूपा के बयान हुए। चिकित्सकों द्वारा की गई पूछताछ में रूपा ने गृह क्लेश में बच्चों को खुद जहर देने की बात स्वीकार की है।
जिला अस्पताल पहुंचे सोमपाल ने बताया कि उसकी पत्नी पहले से ही नशे की गोलियां खाने की आदी है। शादी के समय उससे यह बात छुपाई गई थी। बताया कि नशे की गोलियां खाने की वजह से उसकी सोचने और समझने की क्षमता कम हो गई है।
कई बार नशे में अक्सर वह उलटी सीधी बात करती है। सोमपाल ने अपने ससुरालियों को घटना की जानकारी दे दी थी। कुछ ही देर बाद उसके ससुराली पहुंच गए थे। घबराए सोमपाल ने बताया कि ससुराली उसे जेल भिजवाने की धमकी दे रहे हैं, जबकि उसका कोई कसूर नहीं है।
नशा खत्म कर देता है सोचने की क्षमता
मनोचिकित्सक डा. अमरजीत पोपली का कहना है कि नशे का सबसे पहला हमला व्यक्ति के दिमाग पर होता है। यही कारण है कि उसके सोचने की क्षमता समाप्त हो जाती है। ऐसे माहौल में उसे अच्छा-खराब समझ में नहीं आता।
बल्कि नशे के दौर में जो बात मन में बैठ जाती है व्यक्ति यही करता है। उनका कहना है कि नवादा तिवाया में मां ने जिस तरह खुद के साथ मासूम बच्चों को जहर दे दिया। इससे एक बात तो साफ है कि उसने यह काम बिना सोचे-समझे किया होगा।
उसके मन में जरा भी संभावना होती तो शायद वह अपने बच्चों के साथ ऐसा नहीं करती। नशे में व्यक्ति रिश्ते, संबंध, ममता, संवेदना सब भूल जाता है।