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पढ़ाई में शिक्षकों से अधिक माताओं को करनी पड़ रही मशक्कत
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ऑनलाइन पढ़ाई में मां बनीं शिक्षक
सहारनपुर। कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने के बाद शुरू हुए ऑनलाइन पढ़ाई के ट्रेंड में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षकों से अधिक माताओं को मशक्कत करनी पड़ रही है। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही बच्चों के होमवर्क तक में खासी मेहनत करनी पड़ रही है। इसकी वजह से उनके घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई माएं अपने लिए भी समय नहीं निकाल पा रही हैं। पेश है कुछ मांओं से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
जेजेपुरम निवासी संगीता बावरे के बच्चे इशिका बावरे और भविष्य बावरे सोफिया गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल और आशा मॉडर्न स्कूल में पढ़ते हैं। संगीता ने बताया कि सुबह के समय ऑनलाइन कक्षाएं चलती हैं, जिनमें बच्चों के साथ न बैठें तो वह अच्छे से समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में उनको साथ रहना पड़ता है। इसकी वजह से घर के अन्य काम प्रभावित होते हैं, मगर फिर सोचती हैं कि बच्चों के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है।
पंत विहान निवासी सरिता के बच्चे अभिनव कटारिया और अंशिका पाइनवुड स्कूल के क्रमश: कक्षा आठ और छह के विद्यार्थी हैं। सरिता का कहना है कि बच्चे छोटे हैं, जिनको पढ़ाने में ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के बाद होमवर्क कराने में बच्चों से अधिक उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कई बार अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाती हैं।
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मिशन कंपाउंड निवासी रीटा अग्निहोत्री का बेटा कुश अग्निहोत्री पैटल ब्लूम स्कूल में एलकेजी का छात्र है। चूंकि बच्चा छोटा है। ऐसे में ऑनलाइन कक्षा के दौरान मां रीटा को उसके साथ शामिल होना पड़ता है। रीटा का कहना है कि कुश की पढ़ाई में वह पहले भी साथ देती थी, मगर ऑनलाइन पढ़ाई में उनकी जिम्मेदारी बढ़ी है।
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सहारनपुर। कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने के बाद शुरू हुए ऑनलाइन पढ़ाई के ट्रेंड में बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षकों से अधिक माताओं को मशक्कत करनी पड़ रही है। ऑनलाइन पढ़ाई के साथ ही बच्चों के होमवर्क तक में खासी मेहनत करनी पड़ रही है। इसकी वजह से उनके घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई माएं अपने लिए भी समय नहीं निकाल पा रही हैं। पेश है कुछ मांओं से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
जेजेपुरम निवासी संगीता बावरे के बच्चे इशिका बावरे और भविष्य बावरे सोफिया गर्ल्स सीनियर सेकेंड्री स्कूल और आशा मॉडर्न स्कूल में पढ़ते हैं। संगीता ने बताया कि सुबह के समय ऑनलाइन कक्षाएं चलती हैं, जिनमें बच्चों के साथ न बैठें तो वह अच्छे से समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में उनको साथ रहना पड़ता है। इसकी वजह से घर के अन्य काम प्रभावित होते हैं, मगर फिर सोचती हैं कि बच्चों के भविष्य से बढ़कर कुछ नहीं है।
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पंत विहान निवासी सरिता के बच्चे अभिनव कटारिया और अंशिका पाइनवुड स्कूल के क्रमश: कक्षा आठ और छह के विद्यार्थी हैं। सरिता का कहना है कि बच्चे छोटे हैं, जिनको पढ़ाने में ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के बाद होमवर्क कराने में बच्चों से अधिक उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कई बार अपने लिए भी समय नहीं निकाल पाती हैं।
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मिशन कंपाउंड निवासी रीटा अग्निहोत्री का बेटा कुश अग्निहोत्री पैटल ब्लूम स्कूल में एलकेजी का छात्र है। चूंकि बच्चा छोटा है। ऐसे में ऑनलाइन कक्षा के दौरान मां रीटा को उसके साथ शामिल होना पड़ता है। रीटा का कहना है कि कुश की पढ़ाई में वह पहले भी साथ देती थी, मगर ऑनलाइन पढ़ाई में उनकी जिम्मेदारी बढ़ी है।