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दिखाई दिया चांद, आज से मुहर्रम की शुरुआत
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-- अथर जैदी उर्फ दादू -- प्रबंधक छोटा इमामबाड़ा, सहारनपुर
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। चांद का दीदार होने के साथ ही मुहर्रम की तारीख का एलान हो गया। शुक्रवार को मुहर्रम की पहली तारीख है। इसके साथ ही मजलिसों का दौर शुरू होना है, लेकिन कोविड 19 की गाइडलाइन के मुताबिक एक स्थान पर लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है। इस कारण मुहर्रम के तहत होने वाले आयोजनों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मोहर्रम की 10 तारीख पर 30 अगस्त को करबला के मैदान में समापन हो जाएगा। कोरोना काल के कारण इस बार शिया सोगवार मातमी जुलूस नहीं निकाल पाएंगे।
दरअसल, कोविड-19 के मद्देनजर शासन ने गाइडलाइन जारी की हुई है। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने एक दिन पहले ही शिया समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया था कि कहीं पर भी भीड़ इकट्ठा नहीं होगी और जुलूस भी नहीं निकाला जाएगा। इसी के मद्देनजर शिया समुदाय के लोगों ने मुहर्रम की सभी 10 तारीख पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है। बृहस्पतिवार को चांद दिखाई दे गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मुहर्रम की पहली तारीख होगी और मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। इमामबारगाहों के प्रबंधकों का कहना है कि मजलिसों में 15 से 20 लोगों के बैठने की प्रशासन से अनुमति मांगी है, साथ ही शिया धर्मगुरुओं से भी बात हो रही है। यदि अनुमति मिल जाती है तो मजलिस में निर्धारित संख्या के हिसाब से लोग बैठ सकेंगे।
तीनों इमामबारगाह में मजलिस का अलग समय
सहारनपुर। शहर में बड़ा इमामबाड़ा जाफर नवाज, छोटा इमामबाड़ा मोहल्ला अंसारियान और सामानियों का इमामबाड़ा मोहल्ला कायस्थान में है। बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी और छोटे इमामबाड़ा के प्रबंधक अथर जैदी उर्फ दादू ने बताया कि बड़े इमामबाड़ा में साढ़े आठ से साढ़े 10 तक, छोटे इमामबाड़े में साढ़े 10 से साढ़े 12 बजे तक और तीसरे इमामबाड़ा में शाम पांच से सात बजे मजलिस होती है। प्रशासन से आग्रह किया है कि इमामबाड़ा में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठने की अनुमति दी जाए। वहां पर थर्मल स्क्रीनिंग और मास्क का भी इंतजाम रखा जाएगा तथा भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी जाएगी।
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निकाले जाते थे चार जुलूस
सहारनपुर। बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी ने बताया कि 21 अगस्त से मुहर्रम की शुरुआत होने पर 25 अगस्त, 26 अगस्त, 27 अगस्त, फिर 10 मुहर्रम का 30 अगस्त को मातमी जुलूस निकलना था, लेकिन शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए जुलूस नहीं निकाला जाएगा।
ये होता है मुहर्रम के तहत
बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी ने बताया कि मुहर्रम के दौरान अंजुमन ए इमामियां और अंजुमन ए अकबरिया नोहाख्वानी और मातम करते हैं। मुहर्रम की पांच तारीख का जुलूस समानियों के इमामबाड़ा से शुरू होकर छोटे इमामबाड़े में समापन होता था। छह तारीख को छोटे इमामबाड़े से बड़े इमामबाड़े तक जुलूस निकलता था। अलम बरामद होता है, जिसमें एक बड़ा अलम और 20 से 25 छोटे अलम बरामद होते हैं। सात तारीख को बड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े तक जुलूस निकलता है। वहीं, मुहर्रम की 10 तारीख को बड़े इमामबाड़े से जुलूस निकलता है, जो करबला के मैदान घास कांटा पुरानी चुंगी पहुंचता है।
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मोहर्रम की 10 तारीख पर 30 अगस्त को करबला के मैदान में समापन हो जाएगा। कोरोना काल के कारण इस बार शिया सोगवार मातमी जुलूस नहीं निकाल पाएंगे।
दरअसल, कोविड-19 के मद्देनजर शासन ने गाइडलाइन जारी की हुई है। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने एक दिन पहले ही शिया समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया था कि कहीं पर भी भीड़ इकट्ठा नहीं होगी और जुलूस भी नहीं निकाला जाएगा। इसी के मद्देनजर शिया समुदाय के लोगों ने मुहर्रम की सभी 10 तारीख पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है। बृहस्पतिवार को चांद दिखाई दे गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मुहर्रम की पहली तारीख होगी और मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। इमामबारगाहों के प्रबंधकों का कहना है कि मजलिसों में 15 से 20 लोगों के बैठने की प्रशासन से अनुमति मांगी है, साथ ही शिया धर्मगुरुओं से भी बात हो रही है। यदि अनुमति मिल जाती है तो मजलिस में निर्धारित संख्या के हिसाब से लोग बैठ सकेंगे।
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तीनों इमामबारगाह में मजलिस का अलग समय
सहारनपुर। शहर में बड़ा इमामबाड़ा जाफर नवाज, छोटा इमामबाड़ा मोहल्ला अंसारियान और सामानियों का इमामबाड़ा मोहल्ला कायस्थान में है। बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी और छोटे इमामबाड़ा के प्रबंधक अथर जैदी उर्फ दादू ने बताया कि बड़े इमामबाड़ा में साढ़े आठ से साढ़े 10 तक, छोटे इमामबाड़े में साढ़े 10 से साढ़े 12 बजे तक और तीसरे इमामबाड़ा में शाम पांच से सात बजे मजलिस होती है। प्रशासन से आग्रह किया है कि इमामबाड़ा में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठने की अनुमति दी जाए। वहां पर थर्मल स्क्रीनिंग और मास्क का भी इंतजाम रखा जाएगा तथा भीड़ इकट्ठा नहीं होने दी जाएगी।
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निकाले जाते थे चार जुलूस
सहारनपुर। बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी ने बताया कि 21 अगस्त से मुहर्रम की शुरुआत होने पर 25 अगस्त, 26 अगस्त, 27 अगस्त, फिर 10 मुहर्रम का 30 अगस्त को मातमी जुलूस निकलना था, लेकिन शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए जुलूस नहीं निकाला जाएगा।
ये होता है मुहर्रम के तहत
बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक डॉ. अथर जैदी ने बताया कि मुहर्रम के दौरान अंजुमन ए इमामियां और अंजुमन ए अकबरिया नोहाख्वानी और मातम करते हैं। मुहर्रम की पांच तारीख का जुलूस समानियों के इमामबाड़ा से शुरू होकर छोटे इमामबाड़े में समापन होता था। छह तारीख को छोटे इमामबाड़े से बड़े इमामबाड़े तक जुलूस निकलता था। अलम बरामद होता है, जिसमें एक बड़ा अलम और 20 से 25 छोटे अलम बरामद होते हैं। सात तारीख को बड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े तक जुलूस निकलता है। वहीं, मुहर्रम की 10 तारीख को बड़े इमामबाड़े से जुलूस निकलता है, जो करबला के मैदान घास कांटा पुरानी चुंगी पहुंचता है।

-- डाक्टर अथर अब्बास जैदी, प्रबंधक, बड़ा इमामबाड़ा, सहारनपुर- फोटो : SAHARANPUR