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श्रीमद्भागवत के श्रवण से होता है मोक्ष प्राप्त : राधिका
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कलश यात्रा में शामिल महिलाएं और सिर पर धारण किए हुए श्रीमद्भागवत।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। राधा विहार स्थित महाशक्ति पीठ वैष्णवी महाकाली मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। इससे पूर्व बैंडबाजों संग कलश यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर देवी राधिका श्रीजी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मोक्ष प्राप्त होता है।
श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर मंदिर से मंगल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें 108 महिलाएं शामिल हुई। इसके साथ ही राधा-कृष्ण और श्री शिव-पार्वती की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। कलश यात्रा में सर्वप्रथम धर्म ध्वज लेकर युवक चल रहे थे। इनके साथ ही भगवान श्री गणेश रथ पर विराजमान होकर चल रहे थे। इनके अलावा ज्ञानेंद्र, विभा पुंडीर, हेमंत, ज्योति गुप्ता, अनिल चौहान श्रीमद्भागवत शिरोधार्य कर चल रहे थे। क्षेत्र में बैंडबाजों संग भ्रमण करने के बाद कलश यात्रा मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
वृंदावन से आई देवी राधिका श्रीजी ने कहा कि भागवत महापुराण साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है, जिसमें समस्त ग्रंथ, मंत्र और संत भाव समाहित है। व्यस्त दिनचर्या में परमात्मा की कृपा के बिना सही तरह जीवन चलना संभव नहीं है। यदि कोई जीव समर्पित भाव से श्री कृष्ण को नियमित श्रद्धा भाव से भजता हैं तो प्रभु उसे अवश्य प्राप्त होते हैं।
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इस दौरान स्वामी कालेंद्रानंद महाराज, अरुण स्वामी, राजेंद्र धीमान, रमेश शर्मा, नरेश चंदेल, दिनेश ठाकुर, रविंद्र चौधरी, नरेश त्यागी, सुरेंद्र धीमान, विवेक गर्ग, रोहित बजाज, विकास शर्मा, वर्षा, कमलेश, सुचेता, गीता, अनीता, कविता, शैलेश, सविता मौजूद रहे।
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श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अवसर पर मंदिर से मंगल कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें 108 महिलाएं शामिल हुई। इसके साथ ही राधा-कृष्ण और श्री शिव-पार्वती की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। कलश यात्रा में सर्वप्रथम धर्म ध्वज लेकर युवक चल रहे थे। इनके साथ ही भगवान श्री गणेश रथ पर विराजमान होकर चल रहे थे। इनके अलावा ज्ञानेंद्र, विभा पुंडीर, हेमंत, ज्योति गुप्ता, अनिल चौहान श्रीमद्भागवत शिरोधार्य कर चल रहे थे। क्षेत्र में बैंडबाजों संग भ्रमण करने के बाद कलश यात्रा मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
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वृंदावन से आई देवी राधिका श्रीजी ने कहा कि भागवत महापुराण साक्षात भगवान श्री कृष्ण का वांग्मय स्वरूप है, जिसमें समस्त ग्रंथ, मंत्र और संत भाव समाहित है। व्यस्त दिनचर्या में परमात्मा की कृपा के बिना सही तरह जीवन चलना संभव नहीं है। यदि कोई जीव समर्पित भाव से श्री कृष्ण को नियमित श्रद्धा भाव से भजता हैं तो प्रभु उसे अवश्य प्राप्त होते हैं।
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इस दौरान स्वामी कालेंद्रानंद महाराज, अरुण स्वामी, राजेंद्र धीमान, रमेश शर्मा, नरेश चंदेल, दिनेश ठाकुर, रविंद्र चौधरी, नरेश त्यागी, सुरेंद्र धीमान, विवेक गर्ग, रोहित बजाज, विकास शर्मा, वर्षा, कमलेश, सुचेता, गीता, अनीता, कविता, शैलेश, सविता मौजूद रहे।