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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Missing and not returning alive

लापता हुए और जिंदा नहीं लौट पाए

Fri, 27 Dec 2019 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:00 AM IST
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Missing and not returning alive
सहारनपुर। शहर के हैंडीक्राफ्ट कारोबारी के पुत्र अब्दुल रज्जाक हत्याकांड से पहले भी ऐसे कई सनसनीखेज मामले पिछले पांच सालों में सामने आए हैं, जब लापता हुआ शख्स सकुशल नहीं लौटा और उसकी लाश मिली। कुछ के शव जिले में मिले तो कुछ के जनपद से बाहर। हालांकि, पुलिस ने हत्याओं के खुलासे भी किए हैं।
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थाना कुतुबशेर के दाऊद सराय निवासी हैंडीक्राफ्ट कारोबारी रिहान का पुत्र 18 दिसंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। बुधवार को उसका शव रुड़की क्षेत्र से बरामद हुआ। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अब्दुल रज्जाक की हत्या की गई है। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। इससे पूर्व भी ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं, जब लापता हुए व्यक्ति को पुलिस जिंदा बरामद नहीं कर पाई है। इन मामलों में देखा गया है कि रंजिश की वजह से अपहरण कर हत्या की गई, लेकिन गुमशुदगी दर्ज होते ही पुलिस अगर एक्टिव मोड में आती तो गायब हुए व्यक्ति को सकुशल बरामद किया जा सकता था।
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केस-1
एक माह पूर्व उत्तराखंड के चूड़ियाला माहेश्वरी गांव निवासी लोक निर्माण विभाग का ठेकेदार सुभाष चौधरी लापता हुआ और अगले दिन सहारनपुर के थाना फतेहपुर क्षेत्र में उसका शव बरामद हुआ। सुभाष की हत्या तंत्र क्रिया के चलते की गई थी। इसमें पुलिस ने केस का खुलासा करते हुए हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
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केस-2
तीन साल पूर्व बेहट अड्डा निवासी अधिवक्ता प्रदीप का पुत्र लापता हो गया था। अधिवक्ता ने एक व्यक्ति के पर अपहरण करने का शक जाहिर किया था। पुलिस ने सरसावा क्षेत्र से एक सप्ताह बाद शव बरामद कर चार आरोपियों गिरफ्तार किया था।
केस-3
चार साल पूर्व हकीकतनगर निवासी होटल कारोबारी का पुत्र सन्नी घर से लापता हुआ था। तीन दिन बाद उसका शव मल्हीपुर रोड स्थित यमुना एक्शन प्लांट में पड़ा मिला था। पुलिस ने बाद में एक आरोपी का चालान किया।
केस-4
मोहल्ला शंकरपुरी निवासी नरेश 2015 में लापता हो गया था। परिजनों ने थाने में तहरीर दी थी, लेकिन उसका शव चिलकाना रोड पर बड़ी नहर के निकट से एक सप्ताह बाद बरामद हुआ था।
तीन वर्षों में लापता हुए लोगों की संख्या
बीते तीन सालों में बच्चों सहित बड़ों के लापता होने की संख्या जिले में बढ़ी है। पुलिस रिकार्ड में दर्ज गुमशुदगी इसका प्रमाण है। जनपद में ऐसे 285 लोगों को पुलिस बरामद नहीं कर पाई है, जो लापता चल रहे हैं।

वर्ष------------------------दर्ज गुमशुदगी
2019----------------------125
2018----------------------90
2017----------------------70
लापता हुए लोगों की गुमशुदगी दर्ज करते ही पुलिस तलाश शुरू करती है। कई लोगों को तुरंत ढूंढकर उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया है। हत्याओं के मामले ज्यादातर रंजिशन हैं। फिर भी पुलिस का प्रयास रहता है कि मोबाइल फोन की सीडीआर और सर्विलांस के माध्यम लापता हुए व्यक्ति को सकुशल बरामद किया जाए। - दिनेश कुमार, एसएसपी
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