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बरसात में आम पर शूटी मोल्ड का प्रकोप
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 17 Jun 2016 12:29 AM IST
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आम के पेड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में बरसात ने आम पर शूटी मोल्ड का प्रकोप बढ़ा दिया है। इसके साथ ही एंथ्रेक्नोज कवक के आ जाने से प्रभावित फल काला होकर सड़ने लगता है। इस रोग के चलते जिले में आम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र के सह निदेशक फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बरसात के चलते खासतौर पर आम के घने बागों में शूटी मोल्ड का प्रकोप देखने को मिल रहा है। आम में लगने वाले चूषक कीट, भुनगा, स्केल और गुजिया कीटों के प्रकोप वाले पेड़ों पर यह कीट मधुश्राव करता है।
जिससे पत्तियां और टहनियां चिपचिपी होकर काली पड़ जाती हैं। इससे जहां पेड़ की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है, वहीं बरसात शुरू होते ही यह आम के फलों को प्रभावित कर देता है। इससे प्रभावित फल काला पड़ जाता है।
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जिसके चलते जहां बाजार में इसका भाव कम मिलता है, वहीं कुछ समय बाद यह सड़ने भी लगता है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि अधिकतर यह रोग घने बागों में देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रभावित पेड़ों पर घुलनशील स्टार्च दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से यह फफूंदी पपड़ी बनकर उतर जाती है। इसके अलावा रैंचो, मेटीरान 55 प्रतिशत और पाइराक्लोट्रोविन 5 प्रतिशत डब्लू जीसी की एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर और इसमें स्टीकर मिलाकर साफ मौसम में छिड़काव करने से फलों में कालापन दूर हो जाता है। इससे फलों में चमक भी वापस आ जाती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के सह निदेशक फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि बरसात के चलते खासतौर पर आम के घने बागों में शूटी मोल्ड का प्रकोप देखने को मिल रहा है। आम में लगने वाले चूषक कीट, भुनगा, स्केल और गुजिया कीटों के प्रकोप वाले पेड़ों पर यह कीट मधुश्राव करता है।
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जिससे पत्तियां और टहनियां चिपचिपी होकर काली पड़ जाती हैं। इससे जहां पेड़ की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है, वहीं बरसात शुरू होते ही यह आम के फलों को प्रभावित कर देता है। इससे प्रभावित फल काला पड़ जाता है।
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जिसके चलते जहां बाजार में इसका भाव कम मिलता है, वहीं कुछ समय बाद यह सड़ने भी लगता है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि अधिकतर यह रोग घने बागों में देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रभावित पेड़ों पर घुलनशील स्टार्च दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से यह फफूंदी पपड़ी बनकर उतर जाती है। इसके अलावा रैंचो, मेटीरान 55 प्रतिशत और पाइराक्लोट्रोविन 5 प्रतिशत डब्लू जीसी की एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर और इसमें स्टीकर मिलाकर साफ मौसम में छिड़काव करने से फलों में कालापन दूर हो जाता है। इससे फलों में चमक भी वापस आ जाती है।