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दूध में पानी की मिलावट, मलाई भी कर गए चट
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सहारनपुर। दूध में मिलावट का खेल जारी है। जिसका खुलासा सैंपल की जांच में हो रहा है। प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई न किए जाने के कारण मिलावटी दूध का कारोबार करने वाले जनता के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जिला खाद्य विभाग हर महीने औसतन दूध के 10 सैंपल लेता है। इन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ या वाराणसी सरकारी लैब में भेजा जाता है। जांच में दूध के नमूने अधोमानक पाए जा रहे हैं। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट में इसकी सुनवाई होती है। जिसमें दूध कारोबारी को नोटिस देकर जवाब मांगा जाता है। एक वर्ष के दौरान ऐसे 80 मामलों में जुर्माना लगाया जा चुका है।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एसबी सिंह ने बताया कि उनकी कोर्ट में दूध के नमूनों के अधोमानक होने पर खाद्य विभाग वाद दायर करता है। अधोमानक एवं अपमिश्रित दूध के मामलों में पिछले एक वर्ष में लगभग सभी में जुर्माना लगाया गया है।
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-- प्रयोगशाला में होता है विश्लेषण ---
सरकारी प्रयोगशाला में खाद्य विश्लेषक दूध जांच करते हैं। दूध में सॉलिड फैट मानक की जांच की जाती है। दूध में वाह्य विजातीय पदार्थ की मात्रा का भी पता लगाया जाता है। जिला अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह ने बताया कि महीने में दूध के औसतन आठ से दस सैंपल लिए जाते हैं। इनमें से छह से सात नमूने अधोमानक पाए जाते हैं।
कम है प्रति पशु दूध का औसत उत्पादन
- मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि जनपद में गाय और भैंसों की संख्या 738477 है। इनमें 266504 गाय और 471973 भैंसें हैं। गाय हो या भैंस इसका दूध देने का औसत समय वर्ष में 300 दिन माना जाता है। वैसे तो गाय पांच से 15 लीटर और भैंस आठ से 15 लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। लेकिन 300 दिन में गाय का दूध देने का औसत चार लीटर प्रतिदिन और भैंस का पांच लीटर प्रतिदिन का है।
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जिला खाद्य विभाग हर महीने औसतन दूध के 10 सैंपल लेता है। इन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ या वाराणसी सरकारी लैब में भेजा जाता है। जांच में दूध के नमूने अधोमानक पाए जा रहे हैं। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की कोर्ट में इसकी सुनवाई होती है। जिसमें दूध कारोबारी को नोटिस देकर जवाब मांगा जाता है। एक वर्ष के दौरान ऐसे 80 मामलों में जुर्माना लगाया जा चुका है।
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अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एसबी सिंह ने बताया कि उनकी कोर्ट में दूध के नमूनों के अधोमानक होने पर खाद्य विभाग वाद दायर करता है। अधोमानक एवं अपमिश्रित दूध के मामलों में पिछले एक वर्ष में लगभग सभी में जुर्माना लगाया गया है।
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-- प्रयोगशाला में होता है विश्लेषण ---
सरकारी प्रयोगशाला में खाद्य विश्लेषक दूध जांच करते हैं। दूध में सॉलिड फैट मानक की जांच की जाती है। दूध में वाह्य विजातीय पदार्थ की मात्रा का भी पता लगाया जाता है। जिला अभिहित अधिकारी रणधीर सिंह ने बताया कि महीने में दूध के औसतन आठ से दस सैंपल लिए जाते हैं। इनमें से छह से सात नमूने अधोमानक पाए जाते हैं।
कम है प्रति पशु दूध का औसत उत्पादन
- मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव सक्सेना ने बताया कि जनपद में गाय और भैंसों की संख्या 738477 है। इनमें 266504 गाय और 471973 भैंसें हैं। गाय हो या भैंस इसका दूध देने का औसत समय वर्ष में 300 दिन माना जाता है। वैसे तो गाय पांच से 15 लीटर और भैंस आठ से 15 लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। लेकिन 300 दिन में गाय का दूध देने का औसत चार लीटर प्रतिदिन और भैंस का पांच लीटर प्रतिदिन का है।