फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Medical college's mistake was heavy on 67 students

67 छात्रों पर भारी पड़ी मेडिकल कॉलेज की गलती

Sat, 21 Aug 2021 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Aug 2021 11:36 PM IST
विज्ञापन
Medical college's mistake was heavy on 67 students
सहारनपुर। ग्लोकल मेडिकल कॉलेज की गलती की 67 छात्रों और उनके परिवारों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। डॉक्टर बनने का सपना संजोने वाले 67 छात्रों के जीवन के पांच साल बर्बाद हो गए, साथ ही लोन लेकर लाखों रुपये फीस भरने वाले अभिभावक भी ठगे गए हैं।
विज्ञापन

वर्ष 2016 में नीट पास कर अनेक छात्रों ने ग्लोकल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। 67 छात्र ऐसे थे, जिन्हें कॉलेज ने निजी काउंसिलिंग कर एमबीबीएस में दाखिला दिया था। पहले वर्ष उनकी कक्षाएं चलीं और परीक्षा भी हुई। मगर दूसरे वर्ष पढ़ाई व्यवस्था ठप हो जाने की वजह से विद्यार्थी सड़कों पर आए थे। उन्होंने कॉलेज स्थानांतरित कराने की मांग को लेकर करीब 20 दिन तक धरना प्रदर्शन किए थे। साथ ही कैंडल मार्च तक निकाला था। इनमें से 24 छात्रों को अन्य कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया था, मगर करीब 67 छात्रों को ग्लोकल मेडिकल कॉलेज में ही रखा गया था। ऐसे छात्रों ने कॉलेज बदलने की मांग को लेकर कोर्ट में भी याचिका दायर की तो, पता चला कि कॉलेज ने छात्र छात्राओं का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया था, इसका ब्योरा एमसीआर (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) के पास भी नहीं था। यानी तभी तय हो गया था कि दाखिले फर्जी हैं। मगर छात्र और उनके परिवार न्याय की उम्मीद कर रहे थे। मगर सुप्रीम कोर्ट ने भी अब उनके दाखिले को अवैध बताया और छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया। इस मामले में छात्रों के साथ जो भी हुआ है उसके लिए एक ओर जहां कॉलेज जिम्मेदार है, वहीं छात्रों और उनके अभिभावकों की नासमझी भी कम जिम्मेदार नहीं है।
विज्ञापन

प्रबंधक पर दर्ज कराई गई थी रिपोर्ट
ग्लोकल मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक मोहम्मद वाजिद के खिलाफ एमसीआई के मानकों को पूरा नहीं करने, निर्धारित से अधिक फीस वसूलने और परीक्षा से वंचित रखने के आरोप में सितंबर 2019 में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। छात्र छात्राओं द्वारा प्रदर्शन करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने उपजिलाधिकारी बेहट और सीएमओ को जांच सौंपी थी। इसके बाद सीएचसी बेहट प्रभारी डॉक्टर नितिन कंडवाल की तहरीर पर मिर्जापुर थाने में यह रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्लोकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार निजामुद्दीन का कहना है कि यह मेरी तैनाती से पहले का मामला है, उस वक्त में यहां नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने दाखिले के संबंध में क्या आदेश किया है, उसकी कॉपी मिलने पर ही कुछ कहा जा सकेगा। कॉलेज में नियमानुसार ही दाखिले किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed