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शिवालिक जंगल में करंट से मखना हाथी की मौत

Mon, 07 Feb 2022 12:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 12:00 AM IST
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Makhna elephant dies due to current in Shivalik forest
हाथी का पोस्टमार्टम करती चिकित्सकों की टीम - फोटो : SAHARANPUR
बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। रविवार की तड़के शिवालिक वन प्रभाग की मोहंड रेंज की थाप्पुल बीट के अंतर्गत एक जंगली मखना हाथी नीचे लटक रही हाईटेंशन विद्युत लाइन के तारों की चपेट में आ गया। करंट लगने पर उसकी मौके ही मौत हो गई। हाथी की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया। चिकित्सकों के पैनल से हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे गड्ढा खोदकर दबवा दिया।
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रविवार की सुबह चार बजे गश्त से लौट रहे वन दरोगा शिवराज सिंह और वन रक्षक श्रवण कुमार ने थाप्पुल बीट में एक हाथी को मृत अवस्था में पड़े देखा। इसके बाद उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी मोहंड एमके बलोदी को इसकी सूचना दी। हाथी की मौत की सूचना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में वन क्षेत्राधिकारी के साथ ही डीएफओ शिवालिक श्वेता सेन मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच पड़ताल की। इसके बाद पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गिल, डॉ. धर्मराज वर्मा, डॉ. अनिल यादव, वाइल्ड लाइफ के डॉ. राजेंद्र सिंह नौटियाल, डॉ. देवव्रत पंवार, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. अंकुर पाल के पैनल ने मृत हाथी का पोस्टमार्टम किया। करीब तीन घंटे तक चली पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद हाथी के शव को गड्ढा खुदवाकर नमक डालकर दबवा दिया गया।
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एमके बलोदी ने बताया कि हाथी की मौत विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। जिस जगह पर हाथी को करंट लगा है, वहां उच्च विद्युत क्षमता के बिजली तार जमीन से मात्र नौ फीट की ऊंचाई पर लटके हैं। इनकी चपेट में आने से ही हाथी को करंट लगा और उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पीएम कराने के बाद बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद विद्युत विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मखना नस्ल का करीब 40 साल की उम्र का था हाथी
मौके पर पहुंचे वाइल्ड लाइफ के देवव्रत कुमार ने बताया कि हाथी मखना नस्ल का है, जिसके दांत नहीं होते हैं। इसकी उम्र करीब 40 से 45 वर्ष के बीच थी। हाथी की उम्र करीब सत्तर से अस्सी वर्ष होती है। अक्सर मखना हाथी झुंड की बजाए अकेला ही चलता है। उन्होंने इसे बड़ी क्षति बताया है।
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