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सहारनपुर में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संवेदनहीनता, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:19 AM IST
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सहारनपुर में रिक्शे में जाता शव।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में पांच दिन पूर्व छुटमलपुर में बस से उतरते समय कुचलकर एक बुजुर्ग की हुई मौत के मामले में पुलिस ने संवेदनहीनता दिखाई। पांच दिन तक उसका शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में पड़ा रहा।
बृहस्पतिवार को पैसे देकर अंतिम संस्कार करने के लिए शव को खुले रिक्शे में रखवाकर भिजवा दिया। जबकि अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी रही।
हरिद्वार से बस में बैठकर छुटमलपुर आ रहे लगभग 60 वर्षीय एक व्यक्ति की छुटमलपुर में उतरते समय 20 अगस्त को बस से कुचलकर मौत हो गई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
तभी से शव को शिनाख्त के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। पुलिस ने न तो उसकी पहचान ही कराने का प्रयास किया और न ही दूसरे थाने से संपर्क कर शव की शिनाख्त के पोस्टर ही लगवाए।
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पांच दिन तक शव जिला अस्पताल में रखे रहने के बाद भी जब पुलिस के पास कोई नहीं पहुंचा तो पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक खुले रिक्शा में शव को रखवा दिया और रिक्शे वाले को ही मृतक के अंतिम संस्कार के लिए पैसे देकर भेज दिया। रिक्शा चालक शव को रिक्शे में रखकर शहर में घूमता रहा।
उधर, अस्पताल में एक दो नहीं कई एंबुलेंस खड़ी रहीं। पुलिस ने शव अज्ञात में होने के चलते संवेदनहीनता दिखाई और शव को खुले रिक्शे में रखकर अंतिम संस्कार के लिए भिजवा दिया। उसके साथ एक होमगार्ड राजपाल भी चल रहा था।
इस मामले में होमगार्ड राजपाल का कहना था कि जिला अस्पताल ने एंबुलेंस देने से मना कर दिया, इसलिए रिक्शा में शव को ले जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर सत्य सिंह का कहना है कि एंबुलेंस सिर्फ अस्पताल कें मरीजों अथवा अस्पताल में मरने वालों के शव को किसी के घर पहुंचाने के लिए है। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था पुलिस को ही करनी है।
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बृहस्पतिवार को पैसे देकर अंतिम संस्कार करने के लिए शव को खुले रिक्शे में रखवाकर भिजवा दिया। जबकि अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी रही।
हरिद्वार से बस में बैठकर छुटमलपुर आ रहे लगभग 60 वर्षीय एक व्यक्ति की छुटमलपुर में उतरते समय 20 अगस्त को बस से कुचलकर मौत हो गई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
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तभी से शव को शिनाख्त के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। पुलिस ने न तो उसकी पहचान ही कराने का प्रयास किया और न ही दूसरे थाने से संपर्क कर शव की शिनाख्त के पोस्टर ही लगवाए।
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पांच दिन तक शव जिला अस्पताल में रखे रहने के बाद भी जब पुलिस के पास कोई नहीं पहुंचा तो पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक खुले रिक्शा में शव को रखवा दिया और रिक्शे वाले को ही मृतक के अंतिम संस्कार के लिए पैसे देकर भेज दिया। रिक्शा चालक शव को रिक्शे में रखकर शहर में घूमता रहा।
उधर, अस्पताल में एक दो नहीं कई एंबुलेंस खड़ी रहीं। पुलिस ने शव अज्ञात में होने के चलते संवेदनहीनता दिखाई और शव को खुले रिक्शे में रखकर अंतिम संस्कार के लिए भिजवा दिया। उसके साथ एक होमगार्ड राजपाल भी चल रहा था।
इस मामले में होमगार्ड राजपाल का कहना था कि जिला अस्पताल ने एंबुलेंस देने से मना कर दिया, इसलिए रिक्शा में शव को ले जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर सत्य सिंह का कहना है कि एंबुलेंस सिर्फ अस्पताल कें मरीजों अथवा अस्पताल में मरने वालों के शव को किसी के घर पहुंचाने के लिए है। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था पुलिस को ही करनी है।