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बसपा सुप्रीमो सोशल इंजीनियरिंग के सहारे फिर सत्ता पाने की जुगत में जुटी
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 01 Oct 2016 03:58 PM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली में शामिल भीड़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सोशल इंजीनियरिंग के सहारे मिशन-2017 से पहले अपनी जमीन मजबूत कर रही बहुजन समाज पार्टी की मुखिया का रुख सहारनपुर में रैली में कुछ बदला सा नजर आया।
सर्वसमाज के नारे में जाति और धर्म को साधने की बजाय पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सोशल इंजीनियरिंग में दलित, किसान, महिला और नौजवान थे। यही कारण है कि एक-एक वर्गों के हितों की बात कर उन्हें दूसरी पार्टियों से हो रहे नुकसान को समझाया।
महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, किसानों के ऋण समस्या, दलितों को आरक्षण के प्रति आगाह और नौजवानों केे रोजगार की समस्या उठाकर माया ने अपने नए सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले की रूपरेखा तैयार की है। अपने डेढ़ घंटे के भाषण में विरोधियों पर हमलावर हुई तो अपनी पुरानी सरकारों की उपलब्धियों से हर वर्ग को रिझाने की पुरजोर कोशिश भी की।
दिल्ली रोड के कॉसमॉस ग्राउंड पर आयोजित सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रैली में मायावती का पहला निशाना अपना बेस दलित वोट बैंक रहा। अपने तीखे तेवर से अपने वोटबैंक को रिझाने की कोशिश के साथ ही विरोधियों को कोई मौका नहीं देना चाह रही थी। भाषण की शुरुआत में संत ज्योतिबाफुले, बाबा साहब और कांशीराम को याद कर दलितों को भावुक करने की कोशिश की।
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दलितों पर अपना दावा मजबूत करने के लिए कहा केन्द्र सरकार समीक्षा के बहाने दलितों का आरक्षण छीनने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कोर्ट में पदोन्नति बिल के लिए सही पैरवी नहीं की। पदोन्नति बिल कांग्रेस और बीजेपी ने पास नहीं होने दिया। भाजपा प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे रही ताकि उसे आरक्षण नहीं देना पड़े। बीजेपी सरकार दलित विरोधी है। रोहिल वेमुला, ऊना, दयाशंकर कांड बीजेपी की देन है।
उन्होंने समानता का मुददा उठाकर दलितों की सहानुभूति बटोरी। इसके बाद माया ने किसानों की दुखती रग को टटोला। पहले बैंक लोन और साहूकारों के चक्कर में फंसे किसानों की बात की। उन्होंने कहा कांग्रेस ने अमीर किसानों का कर्जा माफ किया था। गरीब किसानों का कर्जा कांग्रेस ने नहीं माफ किया था। एसी में बैठने वाले किसानों का कर्जा माफ किया था।
इसके बाद भाजपा को जमीन अधिग्रहण कानून पर घेरा। अपने इस बयान से कांग्रेस और भाजपा को किसान विरोधी करार दिया। प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध का मुद्दा उठाते हुए बुलंदशहर कांड की याद ताजा की। मायावती ने यहां तक कहा कि 75 जिलों में हर दिन कोई-कोई महिला अपराध जरुर सामने आता है। इसके बाद नौजवानों को अपने पाले में करने के लिए पहले केन्द्र सरकारको कोसा।
कहा, लोकसभा में पीएम उम्मीदवार ने रोजगार का वादा किया था तो क्या मिला। इसके बाद वादा किया हमारी सरकार आएगी तो हम बेरोजगारी भत्ता नहीं देंगे, बल्कि युवाओं को रोजगार देंगे। मायावती ने बेहद सधे अंदाज में इन वर्गों के अलग-अलग मुद्दों पर बात कर उन्हें रिझाने की कोशिश की।
बसपा का गढ़ माना जाता है सहारनपुर
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर बसपा का गढ़ माना जाता है। मायावती के सहारनपुर से खास लगाव की वजह भी यही रही है। वह खुद दो बार हरौड़ा विधान सभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। इसके अलावा पार्टी संस्थापक कांशीराम भी यहां से लोक सभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
वर्ष 2007 में कुल सात विधान सभा क्षेत्रों में से पांच पर बसपा के प्रत्याशी और वर्ष 2012 में बसपा के चार प्रत्याशी विजयी रहे थे। हालाकि बसपा ने बदले में सहारनपुर को दिया भी बहुत कुछ है। बसपा ने ही सहारनपुर को मंडल का दर्जा दिया था।
इसके अलावा शामली जिला भी बसपा की ही देन है। रविवार की रैली में मायावती ने मंच से खुद इस बात को कहा। आगामी विधान सभा चुनाव में भी बसपा ने सहारनपुर की सात विधान सभाओं में से कम से कम छह पर जीत का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य मुस्लिम मतदाताओं के साथ आए बिना हासिल करना मुश्किल है।
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सर्वसमाज के नारे में जाति और धर्म को साधने की बजाय पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सोशल इंजीनियरिंग में दलित, किसान, महिला और नौजवान थे। यही कारण है कि एक-एक वर्गों के हितों की बात कर उन्हें दूसरी पार्टियों से हो रहे नुकसान को समझाया।
महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, किसानों के ऋण समस्या, दलितों को आरक्षण के प्रति आगाह और नौजवानों केे रोजगार की समस्या उठाकर माया ने अपने नए सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले की रूपरेखा तैयार की है। अपने डेढ़ घंटे के भाषण में विरोधियों पर हमलावर हुई तो अपनी पुरानी सरकारों की उपलब्धियों से हर वर्ग को रिझाने की पुरजोर कोशिश भी की।
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दिल्ली रोड के कॉसमॉस ग्राउंड पर आयोजित सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रैली में मायावती का पहला निशाना अपना बेस दलित वोट बैंक रहा। अपने तीखे तेवर से अपने वोटबैंक को रिझाने की कोशिश के साथ ही विरोधियों को कोई मौका नहीं देना चाह रही थी। भाषण की शुरुआत में संत ज्योतिबाफुले, बाबा साहब और कांशीराम को याद कर दलितों को भावुक करने की कोशिश की।
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दलितों पर अपना दावा मजबूत करने के लिए कहा केन्द्र सरकार समीक्षा के बहाने दलितों का आरक्षण छीनने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कोर्ट में पदोन्नति बिल के लिए सही पैरवी नहीं की। पदोन्नति बिल कांग्रेस और बीजेपी ने पास नहीं होने दिया। भाजपा प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे रही ताकि उसे आरक्षण नहीं देना पड़े। बीजेपी सरकार दलित विरोधी है। रोहिल वेमुला, ऊना, दयाशंकर कांड बीजेपी की देन है।
उन्होंने समानता का मुददा उठाकर दलितों की सहानुभूति बटोरी। इसके बाद माया ने किसानों की दुखती रग को टटोला। पहले बैंक लोन और साहूकारों के चक्कर में फंसे किसानों की बात की। उन्होंने कहा कांग्रेस ने अमीर किसानों का कर्जा माफ किया था। गरीब किसानों का कर्जा कांग्रेस ने नहीं माफ किया था। एसी में बैठने वाले किसानों का कर्जा माफ किया था।
इसके बाद भाजपा को जमीन अधिग्रहण कानून पर घेरा। अपने इस बयान से कांग्रेस और भाजपा को किसान विरोधी करार दिया। प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध का मुद्दा उठाते हुए बुलंदशहर कांड की याद ताजा की। मायावती ने यहां तक कहा कि 75 जिलों में हर दिन कोई-कोई महिला अपराध जरुर सामने आता है। इसके बाद नौजवानों को अपने पाले में करने के लिए पहले केन्द्र सरकारको कोसा।
कहा, लोकसभा में पीएम उम्मीदवार ने रोजगार का वादा किया था तो क्या मिला। इसके बाद वादा किया हमारी सरकार आएगी तो हम बेरोजगारी भत्ता नहीं देंगे, बल्कि युवाओं को रोजगार देंगे। मायावती ने बेहद सधे अंदाज में इन वर्गों के अलग-अलग मुद्दों पर बात कर उन्हें रिझाने की कोशिश की।
बसपा का गढ़ माना जाता है सहारनपुर
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर बसपा का गढ़ माना जाता है। मायावती के सहारनपुर से खास लगाव की वजह भी यही रही है। वह खुद दो बार हरौड़ा विधान सभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। इसके अलावा पार्टी संस्थापक कांशीराम भी यहां से लोक सभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
वर्ष 2007 में कुल सात विधान सभा क्षेत्रों में से पांच पर बसपा के प्रत्याशी और वर्ष 2012 में बसपा के चार प्रत्याशी विजयी रहे थे। हालाकि बसपा ने बदले में सहारनपुर को दिया भी बहुत कुछ है। बसपा ने ही सहारनपुर को मंडल का दर्जा दिया था।
इसके अलावा शामली जिला भी बसपा की ही देन है। रविवार की रैली में मायावती ने मंच से खुद इस बात को कहा। आगामी विधान सभा चुनाव में भी बसपा ने सहारनपुर की सात विधान सभाओं में से कम से कम छह पर जीत का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य मुस्लिम मतदाताओं के साथ आए बिना हासिल करना मुश्किल है।