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अमर उजाला हैल्दी फैमली फिट इंडिया कार्यक्रम
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जिला अस्पताल में एकल विद्यालय अभियान और अमर उजाला की ओर से आयोजित संयुक्त कार्यक्रम में विचार रख?
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। देश में लोग मधुमेह की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि लोगों का खानपान और दिनचर्या बदल गई है। ज्यादा आराम करना भी शरीर के लिए घातक साबित हो रहा है क्योंकि, शारीरिक श्रम के कार्य छोड़ दिए हैं, जिस वजह से मधुमेह रोग बढ़ रहा है। इस रोग की रोकथाम प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
मधुमेह दिवस पर अमर उजाला और एकल विद्यालय अभियान के तहत जिला अस्पताल सभागार में हैल्दी फैमिली फिट इंडिया विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में एकल विद्यालय ग्रामीण अभियान के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष इंद्र कुमार अग्रवाल और सीएमओ बीएस सोढ़ी शामिल हुए। नोडल अधिकारी डाक्टर एके त्रिपाठी ने कहा कि जीवनशैली में आ रहा बदलाव जीवन के लिए ही घातक साबित हो रहा है। हमें संयमित खानपान के साथ रोजाना व्यायाम करना होगा। जंक फूड से दूर रहना चाहिए। इंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि एकल विद्यालय अभियान के तहत गांव-गांव में लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बच्चों को बचपन से ही संयमित खानपान और अच्छी दिनचर्या बनाने के प्रति जागरूक किया रहा है। बच्चों को संस्कार शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में हम अपने खानपान को भूल गए हैं। जागने और सोने के समय बदल गए हैं, जिस कारण मधुमेह रोग बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद से शुगर पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने गिलोए का सेवन करने की सलाह दी। उन्होंने गिलोए, आंवला, तुलसी और एलोवरा का अधिक सेवन करने के लिए कहा। सीएमओ बीएस सोढ़ी ने कहा कि शुगर की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को शुगर है तो उसकी दवा नियमित लेनी चाहिए। रोजाना व्यायाम करने के साथ ही खानपान का ध्यान रखना चाहिए। तभी हम शुगर के मरीजों की बढ़ती संख्या पर कंट्रोल कर पाएंगे, जरा सी लापरवाही जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। इस दौरान एकल विद्यालय अभियान के भाग कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता, समिति अध्यक्ष सुनील गुप्ता, अंचल अध्यक्ष आशीष अग्रवाल, महामंत्री मनीष, अनुपम गुप्ता, आदेेश जिंदल, विजय, वीना बजाज, कोमल, चेतन मदान, राखी, प्रीति, दीपा, रईस आलम मौजूद रहे।
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मधुुमेह के प्रकार
- टाइप-वन: इसमें शून्य से 30 वर्ष तक के लोग आते हैं, जिनमें मधुमेह होने का खतरा 10 फीसदी होता है।
- टाइप टू-2 इसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के लोग आते हैं, जिनको मधुमेह होने का खतरा 90 फीसदी रहता है।
- जीडीएम: इसमें मधुुमेह की शिकार गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे को मधुमेह होने का खतरा दस फीसदी रहता है।
मधुमेह के लक्षण
- बार-बार पेशाब का आना और अधिक प्यास लगना।
- बहुत अधिक भूख लगना और अचानक वजन कम होना।
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना।
- निजी अंग में बार-बार इंफेक्शन होना।
जटिल लक्षण
- गुर्दे खराब होना, जिससे चेहरे, पैरों और हाथों पर सूजन आना।
- अंधापन या मोतिया होना।
- दिल पर असर, मधुमेह के मरीजों को हार्ट अटैक का खतरा सामान्य मरीजों से 50 गुना अधिक होता है। मरीजों को दर्द रहित अटैक आ सकता है।
- नसों पर असर, जिससे हाथों और पैरों में जल हो सकती है।
- बार-बार इंफेक्शन, जिससे न्यूमोनिया या टीबी हो सकती है।
- दिमाग की नसों पर असर आने से लकवा हो सकता है।
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मधुमेह दिवस पर अमर उजाला और एकल विद्यालय अभियान के तहत जिला अस्पताल सभागार में हैल्दी फैमिली फिट इंडिया विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में एकल विद्यालय ग्रामीण अभियान के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष इंद्र कुमार अग्रवाल और सीएमओ बीएस सोढ़ी शामिल हुए। नोडल अधिकारी डाक्टर एके त्रिपाठी ने कहा कि जीवनशैली में आ रहा बदलाव जीवन के लिए ही घातक साबित हो रहा है। हमें संयमित खानपान के साथ रोजाना व्यायाम करना होगा। जंक फूड से दूर रहना चाहिए। इंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि एकल विद्यालय अभियान के तहत गांव-गांव में लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। बच्चों को बचपन से ही संयमित खानपान और अच्छी दिनचर्या बनाने के प्रति जागरूक किया रहा है। बच्चों को संस्कार शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में हम अपने खानपान को भूल गए हैं। जागने और सोने के समय बदल गए हैं, जिस कारण मधुमेह रोग बढ़ रहा है।
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उन्होंने कहा कि आयुर्वेद से शुगर पर कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने गिलोए का सेवन करने की सलाह दी। उन्होंने गिलोए, आंवला, तुलसी और एलोवरा का अधिक सेवन करने के लिए कहा। सीएमओ बीएस सोढ़ी ने कहा कि शुगर की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को शुगर है तो उसकी दवा नियमित लेनी चाहिए। रोजाना व्यायाम करने के साथ ही खानपान का ध्यान रखना चाहिए। तभी हम शुगर के मरीजों की बढ़ती संख्या पर कंट्रोल कर पाएंगे, जरा सी लापरवाही जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है। इस दौरान एकल विद्यालय अभियान के भाग कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता, समिति अध्यक्ष सुनील गुप्ता, अंचल अध्यक्ष आशीष अग्रवाल, महामंत्री मनीष, अनुपम गुप्ता, आदेेश जिंदल, विजय, वीना बजाज, कोमल, चेतन मदान, राखी, प्रीति, दीपा, रईस आलम मौजूद रहे।
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मधुुमेह के प्रकार
- टाइप-वन: इसमें शून्य से 30 वर्ष तक के लोग आते हैं, जिनमें मधुमेह होने का खतरा 10 फीसदी होता है।
- टाइप टू-2 इसमें 30 वर्ष से अधिक आयु के लोग आते हैं, जिनको मधुमेह होने का खतरा 90 फीसदी रहता है।
- जीडीएम: इसमें मधुुमेह की शिकार गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे को मधुमेह होने का खतरा दस फीसदी रहता है।
मधुमेह के लक्षण
- बार-बार पेशाब का आना और अधिक प्यास लगना।
- बहुत अधिक भूख लगना और अचानक वजन कम होना।
- चश्मे का नंबर बार-बार बदलना।
- निजी अंग में बार-बार इंफेक्शन होना।
जटिल लक्षण
- गुर्दे खराब होना, जिससे चेहरे, पैरों और हाथों पर सूजन आना।
- अंधापन या मोतिया होना।
- दिल पर असर, मधुमेह के मरीजों को हार्ट अटैक का खतरा सामान्य मरीजों से 50 गुना अधिक होता है। मरीजों को दर्द रहित अटैक आ सकता है।
- नसों पर असर, जिससे हाथों और पैरों में जल हो सकती है।
- बार-बार इंफेक्शन, जिससे न्यूमोनिया या टीबी हो सकती है।
- दिमाग की नसों पर असर आने से लकवा हो सकता है।