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जीवन है अनमोल, जिंदगी पर डिप्रेशन न होने दें हावी
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सहारनपुर। कोरोना काल के बीच डिप्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिले में कारोबारी और पुलिसकर्मी सहित पांच लोग दो सप्ताह में खुद की जीवन लीला भी समाप्त कर चुके हैं। इनकी मौत की वजह अवसाद ही रहा है।
मनोरोग विशेषज्ञों के यहां भी ऐसे मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ी है। ऐसे में इन लोगों को काउंसिलिंग, अपनों का साथ और इलाज की जरूरत है, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में यह संभव न हो पाने की वजह लोग खुदकशी कर रहे हैं।
यह हैं डिप्रेशन के लक्षण
-- नींद न आना
-- अकेले रहने का मन करना
--घबराहट होना, भूख न लगना
-- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
-- मन में खुदकशी के विचार आना।
चिकित्सक बोले, ऐसे करें बचाव
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ एजाज अहमद और डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि ऐसे लोगों की काउंसिलिंग और इलाज की आवश्यकता है। लक्षण देखकर उसे अकेला नहीं रहने देना चाहिए। कोरोना काल में बहुत लोगों ने अपनों को खोया है, जिस वजह से मानसिक रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। काउंसिलिंग से काम न चले तो इलाज तुरंत दिलाना चाहिए। परिवार के लोगों को भी एक-दूसरे के लिए समय निकलाना चाहिए।
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पारिवारिक विवाद भी बनते हैं कारण
खुदकशी करने और डिप्रेशन की वजह पारिवारिक विवाद भी सामने आए हैं। चिकित्सकों के यहां भी ऐसे मामले सामने आते हैं, जब विवाद की वजह से लोग मानसिक तनाव में होते हैं। इसके अलावा थानों में बड़ी संख्या में घरेलू विवाद व हिंसा के मामले आते हैं। हालांकि, महिला थाने में ऐसे परिवारों के बीच काउंसिलिंग भी कराई जाती है।
लगातार बढ़ रहे खुदकुशी के मामले
-- देवबंद क्षेत्र में सिपाही ने गोली मारकर आत्महत्या की।
-- कोतवाली मंडी के राघवपुरम में चावल कारोबारी ने गोली मारकर आत्महत्या की।
-- श्यामनगर कॉलोनी में विवाहिता ने फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त की।
-- बोमंजी रोड पर युवा फर्नीचर कारोबारी ने फांसी लगाकर मौत को गले लगाया।
-- डाकघर के निकट एक बैंक से सेवानिवृत्त कर्मचारी ने गोली मारकर आत्महत्या की।
पारिवारिक विवाद निपटाने का पुलिस का पूरा प्रयास रहता है। साथ ही समय-समय पर लोगों को गलत कदम उठाने से रोकने को जागरूक किया जाता है। -- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी
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मनोरोग विशेषज्ञों के यहां भी ऐसे मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ी है। ऐसे में इन लोगों को काउंसिलिंग, अपनों का साथ और इलाज की जरूरत है, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में यह संभव न हो पाने की वजह लोग खुदकशी कर रहे हैं।
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यह हैं डिप्रेशन के लक्षण
-- नींद न आना
-- अकेले रहने का मन करना
--घबराहट होना, भूख न लगना
-- मन में बुरे ख्याल आना, काम न मन न लगना
-- मन में खुदकशी के विचार आना।
चिकित्सक बोले, ऐसे करें बचाव
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ एजाज अहमद और डॉ. अमरजीत पोपली का कहना है कि ऐसे लोगों की काउंसिलिंग और इलाज की आवश्यकता है। लक्षण देखकर उसे अकेला नहीं रहने देना चाहिए। कोरोना काल में बहुत लोगों ने अपनों को खोया है, जिस वजह से मानसिक रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। काउंसिलिंग से काम न चले तो इलाज तुरंत दिलाना चाहिए। परिवार के लोगों को भी एक-दूसरे के लिए समय निकलाना चाहिए।
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पारिवारिक विवाद भी बनते हैं कारण
खुदकशी करने और डिप्रेशन की वजह पारिवारिक विवाद भी सामने आए हैं। चिकित्सकों के यहां भी ऐसे मामले सामने आते हैं, जब विवाद की वजह से लोग मानसिक तनाव में होते हैं। इसके अलावा थानों में बड़ी संख्या में घरेलू विवाद व हिंसा के मामले आते हैं। हालांकि, महिला थाने में ऐसे परिवारों के बीच काउंसिलिंग भी कराई जाती है।
लगातार बढ़ रहे खुदकुशी के मामले
-- देवबंद क्षेत्र में सिपाही ने गोली मारकर आत्महत्या की।
-- कोतवाली मंडी के राघवपुरम में चावल कारोबारी ने गोली मारकर आत्महत्या की।
-- श्यामनगर कॉलोनी में विवाहिता ने फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त की।
-- बोमंजी रोड पर युवा फर्नीचर कारोबारी ने फांसी लगाकर मौत को गले लगाया।
-- डाकघर के निकट एक बैंक से सेवानिवृत्त कर्मचारी ने गोली मारकर आत्महत्या की।
पारिवारिक विवाद निपटाने का पुलिस का पूरा प्रयास रहता है। साथ ही समय-समय पर लोगों को गलत कदम उठाने से रोकने को जागरूक किया जाता है। -- डॉ. एस चनप्पा, एसएसपी