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जीवन खुदा की देन है, एहसास दिलाता है रोजा
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सहारनपुर। जीवन खुदा की देन है। व्यक्ति को हमेेेेशा अच्छे कार्य करने चाहिए और खुदा की इबादत में समय बीताना चाहिए। एक-दूसरे काम आना ही हर किसी का कर्तव्य है। जीवन खुदा की देन है, पवित्र रमजान माह इसका अहसास दिलाता है। जमीयत दावतुल मुसलमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए।
सवाल- जनपद मैनपुरी निवासी फराज सिद्दीकी ने पूछा कि कोरोना संक्रमण फैलने वाली बीमारी है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है, तो क्या उसके तीमारदार को रोजा रखना चाहिए या नहीं।
जवाब- अगर तीमारदार के लिए यकीनन खतरा है और डाक्टर मना कर दें तो रोजा नहीं रखना चाहिए। बाद में इसकी कजा अदा करें।
सवाल- मोहल्ला आली निवासी सरफराज ने पूछा कि क्या कोई व्यक्ति कुरान की आयतों और जिक्र यानी तस्बीह बिना वूजु करे पढ़ सकता है।
जवाब- कुरान की आयातों और तस्बीह को बिना वूजु करे पढ़ सकते हैं, लेकिन कुरान बिना वूजु छूना जायज नहीं है।
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सवाल- जनपद मैनपुरी निवासी फराज सिद्दीकी ने पूछा कि कोरोना संक्रमण फैलने वाली बीमारी है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है, तो क्या उसके तीमारदार को रोजा रखना चाहिए या नहीं।
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जवाब- अगर तीमारदार के लिए यकीनन खतरा है और डाक्टर मना कर दें तो रोजा नहीं रखना चाहिए। बाद में इसकी कजा अदा करें।
सवाल- मोहल्ला आली निवासी सरफराज ने पूछा कि क्या कोई व्यक्ति कुरान की आयतों और जिक्र यानी तस्बीह बिना वूजु करे पढ़ सकता है।
जवाब- कुरान की आयातों और तस्बीह को बिना वूजु करे पढ़ सकते हैं, लेकिन कुरान बिना वूजु छूना जायज नहीं है।