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हलचल: समीकरण की नैया पर सवार राजनीतिक दलों के खिवैया, भाजपा राम मंदिर तो सपा PDA को बता रही जीत का आधार

Thu, 08 Feb 2024 01:27 PM IST
Dimple Sirohi विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर
विनीत तोमर, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 08 Feb 2024 01:27 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों में उठापटक जारी है। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के एनडीए में शामिल होने की खबरों के बीच राजनीतिक हलचल जारी है। विभिन्न दलों के नेता आगामी चुनाव में हार जीत का गणित समझने में जुटे हैं।

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Leaders of political parties riding on the boat of equation, SP is citing PDA a PDA as the victory
लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सियासी गलियारों में भी हलचल शुरू हो गई है। अभी तक किसी पार्टी ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की, लेकिन सभी राजनीतिक दलों ने जीत के समीकरण बैठाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा पदाधिकारी जहां राम मंदिर निर्माण और नगर निगम चुनाव में जीत के आंकड़ों को अपना समीकरण बनाकर चल रहे हैं। वहीं सपा पीडीए को जीत का आधार बता रही है।

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कांग्रेस और बसपा के भी अपने समीकरण हैं, जिनसे जीत का दावा किया जा रहा है। कुल मिलाकर राजनीतिक दलों की अपनी ढपली अपना राग वाली स्थिति है। सियासत के इस खेल में कौन किसे मात देने में कामयाब होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन मौजूदा परिवेश में सभी जीत के लुभावने सपने जरूर देख रहे हैं। 
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भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सैनी का कहना है कि पार्टी की तरफ से अनुसूचित बस्ती संपर्क अभियान चलाया गया, जिससे अनुसूचित वर्ग में कम से कम 25 फीसद वोट प्रतिशत बढ़ा है। सहारनपुर लोकसभा सीट से दूसरे राजनीतिक दलों की तरफ से दो से तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में आ सकते हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों में बंटवारा होगा, जिसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। नगर निगम चुनाव में भी भाजपा के प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में जीत मिली थी। राम मंदिर निर्माण के बाद भाजपा के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा है। हर हाल में भाजपा प्रत्याशी की जीत होगी।
 

सपा जिलाध्यक्ष अब्दुल वाहिद का कहना है कि पार्टी ने पीडीए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। पीडीए के माध्यम से गठबंधन को भी मजबूत किया जा रहा है। सपा के साथ मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे अधिक है और सहारनपुर लोकसभा सीट पर मुस्लिमों की संख्या काफी है, जो पार्टी की जीत का आधार बनेंगे। लोगों में भाजपा को लेकर दहशत का माहौल है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुजफ्फर अली का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस को चार लाख नौ हजार मिले। 2019 में दो लाख आठ हजार वोट मिले। संगठन ने पिछले कुछ वर्षों में जिले और ब्लाॅक की कमेटी को बूथ स्तर तक मजबूत किया है। जिला पंचायत में भी अच्छा वोट प्रतिशत रहा है। जिसे पार्टी टिकट देगी उसे मजबूती के साथ लड़ाया जाएगा।

बसपा जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद का कहना है कि पार्टी के साथ 65 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम और एससी वर्ग है। इसके अलावा अन्य वर्गों का वोट भी पार्टी को मिलता है। मौजूदा समीकरण बसपा के पक्ष में बन रहे हैं, जिसके आधार पर बसपा प्रत्याशी को बड़े अंतर से जिताया जाएगा।

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