फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   KVK will become the model of natural farming

प्राकृतिक खेती का मॉडल बनेगा केवीके

Tue, 19 Jul 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 12:18 AM IST
विज्ञापन
KVK will become the model of natural farming
सहारनपुर। जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर को प्राकृतिक खेती के मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा। जिससे वह जनपद के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन सके। धान की खेती से इसकी शुरूआत की जाएगी। प्राकृतिक तरीके से खेती करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र को एक देशी गाय मिली है। इसके गोमूत्र और गोबर आदि का प्रयोग पोषक तत्वों की पूर्ति करने से लेकर कीट प्रबंधन तक किया जाएगा।
विज्ञापन

रासायनिक खेती से प्राप्त खाद्यान्नों में कीटनाशकों के कुछ अंश रह जाते हैं। इसके प्रयोग से मानव शरीर से लेकर मृदा स्वास्थ्य तक विपरीत असर पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके चलते जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र परिसर को प्राकृतिक खेती के मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसमें देशी गाय के गोमूत्र से लेकर गोबर तक का कीटनाशक एवं पोषक तत्व के लिए उपयोग किया जाएगा। प्राकृतिक खेती की शुरूआत धान की फसल से की जाएगी। इसके बाद विभिन्न प्रकार की दलहनी और गेहूं आदि फसल की जाएंगी।
विज्ञापन

जीवामृत एवं घन जीवामृत से मिलेगा फसल को पोषण
प्राकृतिक खेती को पोषण देने के लिए जीवामृत एवं घन जीवामृत का प्रयोग किया जाएगा। इसे देशी गाय के मूत्र और गोबर आदि से तैयार किया जाएगा। जीवामृत बनाने के लिए गोमूत्र, गोबर, गुड़, बेसन और मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। इन्हें एक ड्रम में मिलाकर सुबह-शाम पांच मिनट तक लकड़ी के डंडे से घुमाया जाता है। जीवामृत चार से छह दिन में तैयार हो जाता है। घन जीवामृत बनाने के लिए देशी गाय के गोबर को सुखाकर गोमूत्र, गुड़, बेसन और मिट्टी को मिलाकर एक कोने में छाया में ढककर रख देते हैं। यह खाद छह सात महीने तक प्रयोग किया जा सकता है। प्राकृतिक खेती में कीटों पर नियंत्रण के लिए नामास्त्र, ब्रह्मास्त्र आदि का इस्तेमाल होगा। इसे गोबर, गोमूत्र, नीम के पत्ते, तंबाकू, लहसुन, लाल मिर्च आदि से तैयार किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसानों को मिलेगी प्रेरणा
प्राकृतिक खेती न सिर्फ मानव स्वास्थ्य के लिए बल्कि मृदा स्वास्थ्य के लिए वरदान है। इसमें फसल की लागत भी नाममात्र की है। जिससे यह किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित होगी। केवीके परिसर में प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित होने से यह जनपद के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। इसे देखकर जिले किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे। --- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed