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फार्मासिस्ट और कक्ष सेवक के भरोसे चल रही कोटा पीएचसी

Sat, 21 May 2022 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 May 2022 11:36 PM IST
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Kota PHC running on the basis of pharmacist and room servant
मनीष अग्रवाल कोटा - फोटो : SAHARANPUR
नागल (सहारनपुर)। क्षेत्र के 19 गांवों के बाशिंदों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किया गया कोटा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एकमात्र फार्मासिस्ट और कक्ष सेवक के भरोसे चल रहा है। चिकित्सक न होने की वजह से क्षेत्र की जनता परेशान है।
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इस पीएचसी का निर्माण वर्ष 2008 में बसपा सरकार के समय में हुआ था। इस केंद्र पर चिकित्सा प्रभारी, चिकित्साधिकारी, महिला चिकित्साधिकारी, पर्यवेक्षक पुरुष, पर्यवेक्षक महिला, एएनएम, सफाई कर्मी, चौकीदार आदि के पद हैं जो रिक्त पड़े हैं। वर्तमान में केवल यहां एक फार्मासिस्ट एवं कक्ष सेवक ही रोगियों के उपचार के लिए उपलब्ध हैं। केंद्र पर एक महिला चिकित्सक की तैनाती है, लेकिन वह अप्रैल के पहले सप्ताह से अवकाश पर चल रही हैं। ग्रामीण बताते हैं की गत पांच वर्षों से अस्पताल में किसी भी महिला की डिलीवरी नहीं हुई है। ऐसे में प्रसव पीड़िताओं को नागल या फिर सहारनपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। सुविधाओं के न होने के कारण अस्पताल में मात्र 20-25 सामान्य रोगियों की ओपीडी होती है। इमरजेंसी के नाम पर यहां कोई सुविधा नहीं है। देखरेख के अभाव में अस्पताल प्रांगण में बड़ी-बड़ी घास उग गई है, जिसमें मच्छर पनप रहे हैं। क्षेत्रवासियों ने जनप्रतिनिधियों से पीएचसी पर ध्यान देकर यहां पर्याप्त संख्या में स्टाफ की तैनाती और संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
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झोलाछाप से उपचार कराने की मजबूरी
कोटा निवासी मनीष अग्रवाल का कहना है कि जिस सुविधा की उम्मीद जनता को पीएचसी से थी वह नहीं मिली। रोगियों को झोलाछाप से मजबूरी में उपचार कराना पड़ता है। उन्होंने पीएचसी की दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
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बुखार पीड़ित को नहीं मिल रहा उपचार
रमेश चंद का कहना है कि वह लंबे समय से बुखार से पीड़ित चल रहा है। कई बार पीएचसी पर गया, लेकिन चिकित्सक न होने के कारण उचित उपचार नहीं मिल सका। फार्मासिस्ट कभी पीएचसी पर मिल जाता है कभी नहीं। ऐसे में अस्पताल बनने का लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
बच्चों का उपचार कराने आया नहीं मिला चिकित्सक
आसिफ का कहना है कि वह पांच किमी चल कर कोटा पीएचसी पर अपने बच्चों का उपचार कराने आया था, लेकिन चिकित्सक के अभाव में मायूस लौटना पड़ा। उसके बच्चों को स्कीन एलर्जी है। अब उसे मजबूरी में जिला अस्पताल जाना पड़ेगा।
चार बिस्तर, आपरेशन थिएटर सब बेकार
इसरार का कहना है कि कोटा अस्पताल में कहने तो को चार बिस्तर की सुविधा और ऑपरेशन थिएटर भी है, लेकिन शायद ही यहां कभी रोगी भर्ती हुआ हो। आपरेशन थिएटर भी बेकार है। इसका कोई लाभ रोगियों को नहीं मिल पा रहा है। मामूली चोटिल को भी रेफर किया जाता है।
पीएचसी कोटा पर महिला चिकित्सक दीपिका तैनात हैं लेकिन वह अप्रैल के प्रथम सप्ताह से छुट्टी पर हैं। जिले में चिकित्सकों की कमी के कारण केंद्र पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है। फिर भी वह व्यवस्था बनाने को प्रयासरत हैं।

डॉ. मृणाल राठी
सीएचसी प्रभारी सुनहेटी खड़खड़ी

रमेशचंद सीडकी

रमेशचंद सीडकी- फोटो : SAHARANPUR

आसिफ भलस्वा ईसापुर

आसिफ भलस्वा ईसापुर- फोटो : SAHARANPUR

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा- फोटो : SAHARANPUR

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