{"_id":"5916094a4f1c1b231f854229","slug":"know-the-history-of-bhima-army-army-in-saharanpur-bawal","type":"story","status":"publish","title_hn":"सहारनपुर बवाल में जानिए भीम आर्मी सेना का इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहारनपुर बवाल में जानिए भीम आर्मी सेना का इतिहास
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 13 May 2017 12:47 AM IST
विज्ञापन
भीम आर्मी सेना का संस्थापन चंद्रशेखर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर के शब्बीरपुर बवाल के बाद नौ मई को हुई हिंसा में भीम आर्मी भारत एकता मिशन का नाम आने के बाद प्रशासन से लेकर आम आदमी तक के बीच इस संगठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
नौ मई को जनपद में जगह-जगह हुई आगजनी और तोड़फोड़ में इसी संगठन के सदस्यों का हाथ माना जा रहा है। पिछले दो साल में सहारनपुर सहित वेस्ट यूपी के कई गांवों में मजबूत पैठ बना चुकी भीम आर्मी अब प्रशासन के लिए चुनौती बनी है।
हालांकि इस संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि यह दलित समाज के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने को बनी थी। संगठन का जन्म छह साल पुुराना माना जा रहा है, मगर हरकत में यह पिछले करीब दो साल से ही है।
विज्ञापन
पहली बार लोगों को इसका पता तब चला, जब थाना गागलहेड़ी के गांव घड़कौली में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर कालिख पोतने का मामला सामने आया। भीम आर्मी के सदस्यों ने न केवल विरोध किया, बल्कि गांव में पुलिस को भी दौड़ा लिया था।
उसके बाद से यह संगठन लगातार सक्रिय बना हुआ है। जहां भी दलित उत्पीड़न की घटनाएं होती हैं वहां संगठन के सदस्य पहुंचकर विरोध दर्ज कराते हैं। शब्बीरपुर बवाल के बाद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने बिना प्रशासन से अनुमति लिए ही गांधी पार्क में एक पंचायत को बुलाया और सोशल मीडिया के
जरिए कई जिलों में इसका प्रचार भी किया। सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले दिनों सड़क दूधली में डॉ. अंबेडकर की शोभायात्रा को लेकर हुए सांप्रदायिक बवाल में भीम आर्मी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। भीम आर्मी का आरोप था कि भाजपा नेता ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए यह कराया।
यही वजह रही कि भीम आर्मी ने सोशल मीडिया के जरिये अपने सदस्यों से सड़क दूधली प्रकरण में कोई बयानबाजी या शामिल न होने की हिदायत दी। अब शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की शोभायात्रा को लेकर हुए जातीय संघर्ष पर भीम आर्मी ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई।
पंचायत कर कार्रवाई के लिए प्रशासन को दो दिन का समय दिया और फिर नौ मई को जिले में जगह-जगह भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने बवाल किया।
पिछले दो साल से सक्रिय भीम आर्मी भारत एकता मिशन संगठन ने अपने पैर उत्तर प्रदेश के बाहर उत्तराखंड और हरियाणा में भी पसार लिए हैं।
गौरतलब है कि हरियाणा में करीब 30 से 40 फीसदी आबादी दलितों की है, जहां आसानी से लोग संगठन से जुड़ रहे हैं। इसी प्रकार देहरादून और हरिद्वार से गहरे संबंध होने की वजह से वहां के युवा भी तेजी से जुड़ रहे हैं। सहारनपुर जनपद के लगभग प्रत्येक गांव में संगठन के सदस्य हैं। एक अनुमान के अनुसार जनपद में संगठन के सदस्यों की संख्या दस हजार से अधिक है।
विज्ञापन
नौ मई को जनपद में जगह-जगह हुई आगजनी और तोड़फोड़ में इसी संगठन के सदस्यों का हाथ माना जा रहा है। पिछले दो साल में सहारनपुर सहित वेस्ट यूपी के कई गांवों में मजबूत पैठ बना चुकी भीम आर्मी अब प्रशासन के लिए चुनौती बनी है।
विज्ञापन
हालांकि इस संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि यह दलित समाज के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने को बनी थी। संगठन का जन्म छह साल पुुराना माना जा रहा है, मगर हरकत में यह पिछले करीब दो साल से ही है।
विज्ञापन
पहली बार लोगों को इसका पता तब चला, जब थाना गागलहेड़ी के गांव घड़कौली में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर कालिख पोतने का मामला सामने आया। भीम आर्मी के सदस्यों ने न केवल विरोध किया, बल्कि गांव में पुलिस को भी दौड़ा लिया था।
उसके बाद से यह संगठन लगातार सक्रिय बना हुआ है। जहां भी दलित उत्पीड़न की घटनाएं होती हैं वहां संगठन के सदस्य पहुंचकर विरोध दर्ज कराते हैं। शब्बीरपुर बवाल के बाद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने बिना प्रशासन से अनुमति लिए ही गांधी पार्क में एक पंचायत को बुलाया और सोशल मीडिया के
जरिए कई जिलों में इसका प्रचार भी किया। सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले दिनों सड़क दूधली में डॉ. अंबेडकर की शोभायात्रा को लेकर हुए सांप्रदायिक बवाल में भीम आर्मी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की। भीम आर्मी का आरोप था कि भाजपा नेता ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए यह कराया।
यही वजह रही कि भीम आर्मी ने सोशल मीडिया के जरिये अपने सदस्यों से सड़क दूधली प्रकरण में कोई बयानबाजी या शामिल न होने की हिदायत दी। अब शब्बीरपुर में महाराणा प्रताप की शोभायात्रा को लेकर हुए जातीय संघर्ष पर भीम आर्मी ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई।
पंचायत कर कार्रवाई के लिए प्रशासन को दो दिन का समय दिया और फिर नौ मई को जिले में जगह-जगह भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने बवाल किया।
पिछले दो साल से सक्रिय भीम आर्मी भारत एकता मिशन संगठन ने अपने पैर उत्तर प्रदेश के बाहर उत्तराखंड और हरियाणा में भी पसार लिए हैं।
गौरतलब है कि हरियाणा में करीब 30 से 40 फीसदी आबादी दलितों की है, जहां आसानी से लोग संगठन से जुड़ रहे हैं। इसी प्रकार देहरादून और हरिद्वार से गहरे संबंध होने की वजह से वहां के युवा भी तेजी से जुड़ रहे हैं। सहारनपुर जनपद के लगभग प्रत्येक गांव में संगठन के सदस्य हैं। एक अनुमान के अनुसार जनपद में संगठन के सदस्यों की संख्या दस हजार से अधिक है।