फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   khuvashpur fire

अब तो मत छलिये, सुन लीजिए धाड़ का दर्द

Thu, 28 May 2020 08:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2020 08:48 PM IST
विज्ञापन
khuvashpur fire
अब तो मत छलिये, सुन लीजिए धाड़ का दर्द
विज्ञापन

खुवाशपुर अग्निकांड
सहारनपुर। सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों सबने धाड़ के साथ छल किया है। 20 हजार से अधिक आबादी जो शिवालिक की तलहटी और आसपास बसती है, वह एक अदद फायर ब्रिगेड स्टेशन और पेयजल के लिए तीन दशक से तरस रही है। इस दौरान तमाम दलों की सरकारें रहीं। वायदे सांसद, विधायक कब से करते आ रहे हैं लेकिन इसे धरातल पर नहीं उतार सके। तहसीलदार आशुतोष का दावा है कि 40 परिवार अग्निकांड में प्रभावित हुए हैं, जबकि सैकड़ों डेरे जलकर तबाह हुए हैं। नुकसान का सरकारी सर्वे होगा। वहीं बृहस्पतिवार को सांसद हाजी फजलुर्रहमान भी गांव पहुंचे और पीड़ितों की व्यथा जानी। बेहट विधायक नरेश सैनी भी पहुंचे। लगभग सभी दलों के जनप्रतिनिधियों ने मदद का आश्वासन दिया।
घाड़ क्षेत्र में तबाही के आंकड़े
2000 में 318 परिवार बेघर हुए। 22 मवेशियों एवं एक ग्रामीण की मौत
2001 में 414 मकान जले और 4 मवेशियों व एक ग्रामीण की मौत
2002 में 205 घर व दो मवेशी जले
2003 में 211 घर जले और 6 मवेशियों की मौत
2004 में 206 घर जले, 6 मवेशियों की मौत
2005 में 216 घर जले, 2 मवेशियों की मौत
2006 में 107 मकान और 23 मवेशी जले
2007 में 118 घर जले, 27 मवेशियों की मौत
2008 में 153 घर जले, पांच ग्रामीणों की मौत
2009 में घाड़ क्षेत्र में सबसे बड़ा अग्निकांड गांव कासमपुर में हुआ। 632 मकान जलेे, 103 मवेशियों और 5 ग्रामीणों की मौत
2010 में 20 मकान जले
2011 में 28 मकान जले, 4 मवेशियों की मौत
2015 में 39 घर जले
2016 में 37 मकान जले
2017 में 39 घर जले
वर्जन
घाड़ मजदूर मोर्चा वर्ष 1985 से घाड़ क्षेत्र में फायर स्टेशन की स्थापना की मांग करता आ रहा है। आंदोलन भी किए गए, लेकिन गूंगी और बहरी सरकारों ने नहीं सुनी।
विज्ञापन

- चाणूराम, सह संयोजक घाड़ मजदूर मोर्चा
1997 से भारतीय किसान यूनियन से जुड़ा हूं। 23 साल से पेयजल संकट और अग्निकांड से होने वाले नुकसान के मुद्दे को लेकर आंदोलनरत हूं। लेकिन पेयजल और फायर स्टेशन के लिए कुछ नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

- मोहम्मद आलिम, ग्राम प्रधान नूरपुर भरावड़
वर्जन
फायर स्टेशन जिला मुख्यालय पर है, जो इस क्षेत्र से 40 किमी दूर है। ऐसे में बेहट में फायर स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वह हर बार फाइलों में दब गया। तीन बार मुद्दा विस में उठाया जा चुका है। विगत वर्ष में मंजूरी मिल गई थी। कुछ माह पहले गांव जाटोवाला के पास भूमि उपलब्ध हो गई थी, परंतु लॉकडाउन होने के बाद कुछ नहीं हो पाया। पेयजल की समस्या के समाधान के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
नरेश सैनी, विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed