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खांडसारी उद्योग: लाइसेंस 58, चलाने की तैयारी सिर्फ तीन की
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सहारनपुर। नई खांडसारी नीति लागू होने के बावजूद जनपद में खांडसारी उद्योग पनप नहीं पा रहा है। जिले में खांडसारी के 58 लाइसेंस हैं, जिनमें से इस बार मात्र तीन को ही चलाने की तैयारी चल रही है। गत वर्ष भी सिर्फ पांच खांडसारी इकाईयां की चल सकी थीं।
एक समय जनपद में खांडसारी उद्योग बड़ा सफल था। धीरे धीरे चीनी मिलों की संख्या बढ़ती रही, जिसका सीधा असर खांडसारी इकाईयों पर पड़ा। जिले में अभी भी खांडसारी के 58 लाइसेंस हैं। इनमें से सात खांडसारी इकाईयों के लाइसेंस गत वर्ष नई नीति के बाद बने। गत वर्ष जनपद में पांच खांडसारी इकाईयां चलीं। इनमें चौंदाहेडी, रामपुर मनिहारान, कंदुकी, गोपाली एवं नल्हेडा गुर्जर की खांडसारी इकाईयां शामिल हैं। खांडसारी विभाग की ओर से कराए गए निरीक्षण में इस बार मात्र केंदुकी, गोपाली और नल्हेडा गुर्जर में स्थित खांडसारी इकाईयों को ही चलाने की तैयारी चल रही है। इनमें से प्रत्येक इकाई की पेराई क्षमता दो हजार क्विंटल प्रतिदिन है। माना जा रहा है कि आर्थिक संकट के चलते खांडसारी उद्योग नहीं चल पा रहे हैं।
खांडसारी इकाईयों के बंद होने के कारण
- चीनी मिलों के मुकाबले कम उन्नत तकनीक
- सस्ते श्रमिकों की कमी
- खांड एवं गुड का भाव अपेक्षाकृत कम रहना
- कोल्हू से गन्ना खरीद में प्रतियोगिता
- प्रोत्साहन के लिए विशेष अनुदान नहीं
जनपद में खांडसारी के 58 लाइसेंस हैं। इनमें से सिर्फ तीन इकाईयों में पेराई शुरू करने की तैयारी चल रही है। जबकि पिछले सीजन में भी खांडसारी की पांच इकाईयां चली थी। खांडसारी की अन्य इकाईयों को भी चलाने का प्रयास किया जा रहा है। - राजेश्वर यादव, सहायक चीनी आयुक्त।
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आंकडों की नजर में गन्ना
गन्ना क्षेत्रफल -115900.348 हेक्टेयर
अनुमानित उत्पादकता -821.16 प्रति हेक्टेयर
अनुमानित चीनी परता - 10.75 प्रतिशत
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एक समय जनपद में खांडसारी उद्योग बड़ा सफल था। धीरे धीरे चीनी मिलों की संख्या बढ़ती रही, जिसका सीधा असर खांडसारी इकाईयों पर पड़ा। जिले में अभी भी खांडसारी के 58 लाइसेंस हैं। इनमें से सात खांडसारी इकाईयों के लाइसेंस गत वर्ष नई नीति के बाद बने। गत वर्ष जनपद में पांच खांडसारी इकाईयां चलीं। इनमें चौंदाहेडी, रामपुर मनिहारान, कंदुकी, गोपाली एवं नल्हेडा गुर्जर की खांडसारी इकाईयां शामिल हैं। खांडसारी विभाग की ओर से कराए गए निरीक्षण में इस बार मात्र केंदुकी, गोपाली और नल्हेडा गुर्जर में स्थित खांडसारी इकाईयों को ही चलाने की तैयारी चल रही है। इनमें से प्रत्येक इकाई की पेराई क्षमता दो हजार क्विंटल प्रतिदिन है। माना जा रहा है कि आर्थिक संकट के चलते खांडसारी उद्योग नहीं चल पा रहे हैं।
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खांडसारी इकाईयों के बंद होने के कारण
- चीनी मिलों के मुकाबले कम उन्नत तकनीक
- सस्ते श्रमिकों की कमी
- खांड एवं गुड का भाव अपेक्षाकृत कम रहना
- कोल्हू से गन्ना खरीद में प्रतियोगिता
- प्रोत्साहन के लिए विशेष अनुदान नहीं
जनपद में खांडसारी के 58 लाइसेंस हैं। इनमें से सिर्फ तीन इकाईयों में पेराई शुरू करने की तैयारी चल रही है। जबकि पिछले सीजन में भी खांडसारी की पांच इकाईयां चली थी। खांडसारी की अन्य इकाईयों को भी चलाने का प्रयास किया जा रहा है। - राजेश्वर यादव, सहायक चीनी आयुक्त।
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आंकडों की नजर में गन्ना
गन्ना क्षेत्रफल -115900.348 हेक्टेयर
अनुमानित उत्पादकता -821.16 प्रति हेक्टेयर
अनुमानित चीनी परता - 10.75 प्रतिशत