{"_id":"66e0a3ec8abdf8f9a0007614","slug":"jamiat-will-go-to-high-court-against-the-decision-of-assam-foreign-tribunal-madani-saharanpur-news-c-30-1-smrt1024-131192-2024-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"असम फॉरेन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी जमीयत : मदनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
असम फॉरेन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी जमीयत : मदनी
Wed, 11 Sep 2024 01:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 11 Sep 2024 01:24 AM IST
विज्ञापन
देवबंद(सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत असम फाॅरेन ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। मदनी का कहना है कि असम में मुसलमानों के खिलाफ कानून के दोहरे मापदंड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मंगलवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि असम राज्य में मुसलमानों के खिलाफ क्रूर सरकारी उत्पीड़न का दुष्चक्र जोरों पर है। इसी के तहत 28 असहाय मुसलमानों को जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर जबरन डिटेंशन कैंपों में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का ईमानदारी से पालन किए बिना एकतरफा फैसला सुनाना और फिर उसे जबरन डिटेंशन कैंप भेज देना एक अमानवीय कार्य है। आरोप लगाया कि असम राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से यही सब कुछ हो रहा है।
मौलाना मदनी ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 लोगों को एक पक्षीय आदेश द्वारा विदेशी घोषित किया गया है। उन्हें ट्रिब्यूनल के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं दिया गया। दूसरी ओर इस प्रकार के मामलों में जो गैर-मुस्लिम हैं। उनके लिए औपचारिक रूप से एक अधिसूचना जारी करके सीएए के अंतर्गत नागरिकता देने की बात कही गई। कहा कि जमीयत उलमा-ए- हिंद इस मामले को मानवता के आधार पर लड़ेगी और लोगों को इंसाफ दिलाने का काम करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि असम राज्य में मुसलमानों के खिलाफ क्रूर सरकारी उत्पीड़न का दुष्चक्र जोरों पर है। इसी के तहत 28 असहाय मुसलमानों को जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर जबरन डिटेंशन कैंपों में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का ईमानदारी से पालन किए बिना एकतरफा फैसला सुनाना और फिर उसे जबरन डिटेंशन कैंप भेज देना एक अमानवीय कार्य है। आरोप लगाया कि असम राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से यही सब कुछ हो रहा है।
विज्ञापन
मौलाना मदनी ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार 12 लोगों को एक पक्षीय आदेश द्वारा विदेशी घोषित किया गया है। उन्हें ट्रिब्यूनल के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर ही नहीं दिया गया। दूसरी ओर इस प्रकार के मामलों में जो गैर-मुस्लिम हैं। उनके लिए औपचारिक रूप से एक अधिसूचना जारी करके सीएए के अंतर्गत नागरिकता देने की बात कही गई। कहा कि जमीयत उलमा-ए- हिंद इस मामले को मानवता के आधार पर लड़ेगी और लोगों को इंसाफ दिलाने का काम करेगी।
विज्ञापन