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अविमुक्तेश्वरानंद बोले: 'राम मंदिर में प्रतीकात्मक शिखर बनाना स्वागत योग्य', अयोध्या न जाने के निर्णय पर कायम

Sat, 20 Jan 2024 10:28 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 20 Jan 2024 10:28 PM IST
सार

Saharanpur News : जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा कि राम मंदिर में प्रतीकात्मक शिखर बनाना स्वागत योग्य है। हालांकि अभी भी वे श्रीराम लला प्रतिष्ठा के मौके पर ना जाने के अपने पूर्व के निर्णय पर ही कायम हैं।

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Jagadguru Shankaracharya Avimukteshwaranand said Building a symbolic peak is welcome in Ram temple
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा कि अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर में प्रतीकात्मक शिखर बनाया जा रहा है। यह कदम स्वागत योग्य है। यह शास्त्रसम्मत है जो सभी को अच्छा लगेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी वे श्रीराम लला प्रतिष्ठा के मौके पर ना जाने के अपने पूर्व के निर्णय पर ही कायम हैं।

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जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द जी महाराज शनिवार की देर शाम सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में माता शांकभरी जयंती में शामिल होने के लिए पधारे हैं। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने रास्ते में आते हुए सुना है कि श्रीरामलला मंदिर में कपड़े का प्रतीकात्मक शिखर बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि बिना शिखर के नहीं करना चाहिए था। प्रतीक ही सही भूल सुधार किया जा रहा है।

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कहा कि देश का हिंदू शास्त्र के अनुसार चलता है। मंदिर के कर्ताधर्ता इस बात को स्वीकार करें कि भूल की थी और अब वे सुधार की तरफ है। इस बात को वे स्पष्ट करें कि देखिए हमने शास्त्र सम्मत किया है। इससे हिंदू समाज को भी खुशी होगी। उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्य केवल क्षेत्राधिकार के कारण अलग हैं, बाकि शास्त्र तो सबके एक ही हैं।

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इससे पहले उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में स्पष्ट उल्लेख है कि जैसे दिन और रात एक दूसरे के पूरक हैं। ऐसे ही देवी संपत एवं आसुरी संपत एक दूसरे के पूरक है। देवी संपत मोक्ष की ओर ले जाने वाला है एवं आसुरी संपत बंधन में डालने वाला है। जो बंधन में होता है वह मुक्त होना चाहता है और जो मुक्त है वह कभी-कभी उसके मन में आता है कि वह भी बंधन में हो।

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इस मौके पर अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी सहजानंद जी महाराज, राजू शर्मा, सत्यम शर्मा, शुभम शर्मा सहित दंडी स्वामी उपस्थित रहे।

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