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Saharanpur News: बंटवारे को हो गए 24 साल, संपत्तियों निस्तारण आज तक नहीं
Thu, 26 Dec 2024 08:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 26 Dec 2024 08:38 AM IST
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सहारनपुर। उत्तराखंड को बने 24 साल बीत चुके हैं, लेकिन आवास विकास परिषद सहारनपुर को अपने हिस्से की संपत्तियों का रुपया आज तक नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में आवास विकास परिषद सहारनपुर की करीब ढाई अरब रुपये की संपत्तियां फंसी हुई हैं। इनकी देखरेख आवास-विकास परिषद सहारनपुर को करनी पड़ रही है। कुछ पर कब्जे भी हो चुके हैं।
उत्तराखंड बनने से पहले श्रीनगर, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की सहारनपुर का हिस्सा थे। आवास विकास परिषद सहारनपुर ही वहां आवासीय योजनाएं चलाता था। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से कटकर उत्तराखंड राज्य की स्थापना की गई, लेकिन आवास विकास परिषद की संपत्तियां आज तक नहीं बांटी गई हैं।
श्रीनगर में आवास विकास परिषद सहारनपुर की करीब 300 बीघा भूमि खाली पड़ी है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 125 करोड़ यानी सवा अरब रुपये है। देहरादून में तीन योजनाएं नेहरू नगर, इंदिरा नगर और राजपुरा रोड स्थित दून विहार आवास विकास परिषद सहारनपुर की बसाई हुई हैं, जिनमें परिषद की कई संपत्तियां खाली हैं।
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हरिद्वार में भी तीन योजनाएं हैं, जिनमें बहादराबाद-1, बहादराबाद-2 और शिवालिक नगर। यहां भी करोड़ों के प्लॉट खाली पड़े हैं। ऋषिकेश में वीरभद्र योजना और रुड़की में गंगा विहार योजना आवास विकास परिषद सहारनपुर की ही है। इन दोनों जगहों पर भी संपत्तियां खाली हैं। संपत्तियों का बंटवारा हो गया था, लेकिन आवास विकास परिषद सहारनपुर को उसके हिस्से की संपत्तियों का रुपया आज तक नहीं मिला है। इन संपत्तियों की मौजूदा कीमत करीब 250 करोड़ यानी करीब ढाई अरब है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री स्तर से संपत्तियों का बंटवारा होना है, लेकिन इसी इंतजार में 24 साल बीत गए हैं।
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अनेक संपत्तियों पर हो चुके कब्जे
आवास विकास परिषद के पास पर्याप्त अधिकारी नहीं होने और संपत्तियां दूर होने के कारण संपत्तियों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। नतीजा, सभी जगहों पर संपत्तियों पर कब्जे हो चुके हैं और हो रहे हैं। इसे लेकर आवास विकास परिषद सहारनपुर के अधिकारी संबंधित जनपदों के आवास विकास परिषदों से संपर्क करते हैं, लेकिन परिणाम शून्य है।
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उत्तराखंड के देहरादून, श्रीनगर, हरिद्वार सहित कई जनपदों में आवास विकास परिषद सहारनपुर की संपत्तियां हैं, जिनका रुपया आज तक नहीं मिला है। अरबों रुपये की संपत्तियों की देखभाल भी नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से कई जगह कब्जे भी हैं। - सूरजपाल, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद, सहारनपुर
उत्तराखंड बनने से पहले श्रीनगर, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की सहारनपुर का हिस्सा थे। आवास विकास परिषद सहारनपुर ही वहां आवासीय योजनाएं चलाता था। वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश से कटकर उत्तराखंड राज्य की स्थापना की गई, लेकिन आवास विकास परिषद की संपत्तियां आज तक नहीं बांटी गई हैं।
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श्रीनगर में आवास विकास परिषद सहारनपुर की करीब 300 बीघा भूमि खाली पड़ी है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 125 करोड़ यानी सवा अरब रुपये है। देहरादून में तीन योजनाएं नेहरू नगर, इंदिरा नगर और राजपुरा रोड स्थित दून विहार आवास विकास परिषद सहारनपुर की बसाई हुई हैं, जिनमें परिषद की कई संपत्तियां खाली हैं।
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हरिद्वार में भी तीन योजनाएं हैं, जिनमें बहादराबाद-1, बहादराबाद-2 और शिवालिक नगर। यहां भी करोड़ों के प्लॉट खाली पड़े हैं। ऋषिकेश में वीरभद्र योजना और रुड़की में गंगा विहार योजना आवास विकास परिषद सहारनपुर की ही है। इन दोनों जगहों पर भी संपत्तियां खाली हैं। संपत्तियों का बंटवारा हो गया था, लेकिन आवास विकास परिषद सहारनपुर को उसके हिस्से की संपत्तियों का रुपया आज तक नहीं मिला है। इन संपत्तियों की मौजूदा कीमत करीब 250 करोड़ यानी करीब ढाई अरब है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री स्तर से संपत्तियों का बंटवारा होना है, लेकिन इसी इंतजार में 24 साल बीत गए हैं।
अनेक संपत्तियों पर हो चुके कब्जे
आवास विकास परिषद के पास पर्याप्त अधिकारी नहीं होने और संपत्तियां दूर होने के कारण संपत्तियों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। नतीजा, सभी जगहों पर संपत्तियों पर कब्जे हो चुके हैं और हो रहे हैं। इसे लेकर आवास विकास परिषद सहारनपुर के अधिकारी संबंधित जनपदों के आवास विकास परिषदों से संपर्क करते हैं, लेकिन परिणाम शून्य है।
उत्तराखंड के देहरादून, श्रीनगर, हरिद्वार सहित कई जनपदों में आवास विकास परिषद सहारनपुर की संपत्तियां हैं, जिनका रुपया आज तक नहीं मिला है। अरबों रुपये की संपत्तियों की देखभाल भी नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से कई जगह कब्जे भी हैं। - सूरजपाल, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद, सहारनपुर

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद

राजकुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर।संवाद