सांप्रदायिकता को मात देती रही है कैराना की सियासत
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विधानसभा के 16 चुनावों में 12 बार हिंदू विधायक चुने गए हैं। इतना ही नहीं, कैराना लोकसभा सीट पर आठ बार हिंदू सांसद भी दिल्ली पहुंचे हैं, जबकि मुस्लिम केवल इस क्षेत्र से छह बार ही चुने जा सके हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि कानून व्यवस्था और सांप्रदायिकता को आधार मानकर पलायन का मुद्दा उठा रहे सांसद हुकुम सिंह इसी कैराना से सात बार विधानसभा पहुंच चुके हैं।
भले ही सियासतदा कैराना पलायन प्रकरण को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हो, मगर वहां के सियासी आंकड़े इससे अलग ही हैं। वर्ष 1957 से लेकर वर्ष 2014 के बीच अब तक 16 विधानसभा चुनाव कैराना सीट पर हो चुके हैं।
मगर, अब तक केवल चार मुस्लिम विधायक ही इस क्षेत्र से विधानसभा पहुंच पाए हैं। अगर देखा जाए तो सांसद हुकुम सिंह का कैराना की सियासत में बड़ा दखल रहा है। छह बार विधायक चुने जाने के दौरान वे चार बार मुस्लिम प्रत्याशियों को मात देेने में कामयाब रहे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ष 1996 से लेकर 2012 तक लगातार चार बार विधायक रहे। हालांकि इससे पहले वे दो बार मुनव्वर हसन, एक बार राजेश्वर बंसल और एक बार बशीर अहमद से सियासी पटखनी खा चुके थे।
लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन को जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा था। इसके बाद भी नाहिद हसन अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनिल कुमार को महज 1099 मतों से ही हरा पाए थे।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कैराना विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी हिंदुओं की अपेक्षा 44275 ज्यादा है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में हिंदू आबादी ज्यादा है। मगर नगर क्षेत्र में हिंदू आबादी मुसलमानों की संख्या में आधी से भी कम है।
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कैराना की जनसंख्या पांच लाख 86 हजार 254 है। इसमें हिंदू जनसंख्या दो लाख 66 हजार 61 है, जबकि मुस्लिम जनसंख्या तीन लाख 10 हजार 336 है। शहरी क्षेत्र की आबादी एक लाख 69 हजार 660 है।
इसमें हिंदू आबादी महज 50 हजार 843 है, जबकि मुस्लिम आबादी एक लाख 16 हजार 669 है। ग्रामीण क्षेत्र में हिंदू जनसंख्या दो लाख 15 हजार 218 है। जबकि यहां मुस्लिम जनसंख्या एक लाख 93 हजार 667 है।
कैराना विधानसभा में वीरेंद्र वर्मा पहले विधायक बने। इसके बाद 1962 में चंदन सिंह ने पूर्व विधायक को मात दी। 1967 में एस जंग विधायक चुने गए और दो साल बाद ही हुए चुनाव में चंद्रभान ने जीत हासिल की।
1974 में हुकुम सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर बशीर अहमद को हराया तो तीन साल बाद हुए चुनाव में बशीर ने हुकुम सिंह से बदला चुका लिया। 1980 से 85 तक दो बार लगातार हुकुम सिंह विधानसभा पहुंचे।
1989 में राजेश्वर बंसल और 1991, 93 में मुनव्वर हसन ने हुकुम सिंह को हराया। इसके बाद चार बार लगातार हुकुम सिंह ने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। करीब दो साल पहले हुए उपचुनाव में नाहिद हसन ने अनिल कुमार को हराने में कामयाबी पाई।
कैराना से चुने गए सांसदों की सूची
1962 में यशपाल सिंह, 1967 में गयूर अली खान, 1971 में शफाकत जंग, 1977 में चंदन सिंह, 1980 में गायत्री देवी, 1984 में अख्तर हसन, 1989 एवं 1991 में हरपाल सिंह पंवार, 1996 में मुनव्वर हसन, 1998 में वीरेंद्र वर्मा, 1999 में आमिर आलम खान, 2004 में अनुराधा चौधरी, 2009 में तबस्सुम बेगम, 2014 में हुकुम सिंह।