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Saharanpur News: आंख की रोशनी जाने पर बीमा कंपनियां देंगी 11.55 लाख रुपये
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- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का आदेश
अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नाक के साइनस ऑपरेशन के दौरान दाईं आंख की रोशनी जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आयोग ने दोनों बीमा कंपनियों को 11,55,670 रुपये की मूल क्षतिपूर्ति राशि ब्याज के साथ अदा करने को कहा है।
गौरव सैनी निवासी पंजाबी बाग ने आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि वह डिक्सन टेक्नोलॉजी कंपनी देहरादून में इंजीनियर के पद पर तैनात थे। उन्होंने फरवरी 2020 में देहरादून के पटेल नगर स्थित महंत इंद्रेश अस्पताल में नाक के साइनस का ऑपरेशन कराया। ऑपरेशन के बाद उनकी दाईं आंख की रोशनी चली गई। दोबारा ऑपरेशन कराने पर भी सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन आंख की रोशनी वापस नहीं आ सकी।
गौरव ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपचार पर खर्च हुई धनराशि और अन्य क्षतियों की भरपाई के लिए आयोग में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष सतीश कुमार, सदस्य नूतन शर्मा और राजीव कुमार ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद चिकित्सकों को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना। अपने आदेश में कहा कि महंत इंद्रेश अस्पताल और डॉ. शरद हरनोट नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से प्रोफेशनल इंडेमिनिटी डॉक्टर्स पॉलिसी के तहत बीमित है। ऐसे में राशि कंपनियों द्वारा अदा की जाएगी।
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- 30 सितंबर 2021 से देय होगा ब्याज
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि 10,35,670 रुपये की राशि पर 30 सितंबर 2021 से नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। इसके अतिरिक्त एक लाख रुपये मानसिक कष्ट और 20 हजार रुपये परिवाद व्यय के लिए दिए जाएंगे। इस प्रकार मूल क्षतिपूर्ति राशि 11,55,670 रुपये है। इसमें ब्याज सहित वास्तविक देय राशि इससे अधिक होगी। दोनों बीमा कंपनियों को 5,17,835-5,17,835 रुपये देने होंगे।
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अदालत से
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नाक के साइनस ऑपरेशन के दौरान दाईं आंख की रोशनी जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। आयोग ने दोनों बीमा कंपनियों को 11,55,670 रुपये की मूल क्षतिपूर्ति राशि ब्याज के साथ अदा करने को कहा है।
गौरव सैनी निवासी पंजाबी बाग ने आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि वह डिक्सन टेक्नोलॉजी कंपनी देहरादून में इंजीनियर के पद पर तैनात थे। उन्होंने फरवरी 2020 में देहरादून के पटेल नगर स्थित महंत इंद्रेश अस्पताल में नाक के साइनस का ऑपरेशन कराया। ऑपरेशन के बाद उनकी दाईं आंख की रोशनी चली गई। दोबारा ऑपरेशन कराने पर भी सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ स्थित पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन आंख की रोशनी वापस नहीं आ सकी।
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गौरव ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपचार पर खर्च हुई धनराशि और अन्य क्षतियों की भरपाई के लिए आयोग में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष सतीश कुमार, सदस्य नूतन शर्मा और राजीव कुमार ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद चिकित्सकों को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार माना। अपने आदेश में कहा कि महंत इंद्रेश अस्पताल और डॉ. शरद हरनोट नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से प्रोफेशनल इंडेमिनिटी डॉक्टर्स पॉलिसी के तहत बीमित है। ऐसे में राशि कंपनियों द्वारा अदा की जाएगी।
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- 30 सितंबर 2021 से देय होगा ब्याज
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि 10,35,670 रुपये की राशि पर 30 सितंबर 2021 से नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। इसके अतिरिक्त एक लाख रुपये मानसिक कष्ट और 20 हजार रुपये परिवाद व्यय के लिए दिए जाएंगे। इस प्रकार मूल क्षतिपूर्ति राशि 11,55,670 रुपये है। इसमें ब्याज सहित वास्तविक देय राशि इससे अधिक होगी। दोनों बीमा कंपनियों को 5,17,835-5,17,835 रुपये देने होंगे।