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स्कूलों को दिए एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के निर्देश
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सहारनपुर। शासन और प्रशासन की रोक के बावजूद पब्लिक स्कूल अभिभावकों पर दुकान विशेष से किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। साथ ही प्रशासन के निर्देश के बाद भी एनसीईआरटी की किताबों को पाठ्यक्रम में नहीं शामिल किया जा रहा है। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों को पत्र जारी कर निर्देशित किया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दूबे ने बताया कि अनेक अभिभावकों ने प्रशासन से शिकायत की है कि पब्लिक स्कूल उन पर दुुकान विशेष से किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदल दिया जाता है, जिसका मकसद यह है कि अभिभावक हर साल नई किताबें खरीदें। अभिभावकों का यह भी आरोप है कि पब्लिक स्कूल एनसीईआरटी की किताबें पाठ्यक्रम में नहीं लगा रहे हैं। इस संबंध में बीते दिनों एडीएम-प्रशासन एसबी सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसके बाद सभी बोर्ड के विद्यालयों को निर्देश दिए गए थे।
मगर अभिभावकों की शिकायतें अब भी मिल रही हैं। इससे जाहिर होता है कि स्कूल मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में सभी स्कूलों को निर्देशित किया जाता है कि वह एनसीईआरटी की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल करें। साथ ही पांच वर्ष से पहले पाठ्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव ना करें। इसके अलावा किताबें दुकान विशेष से खरीदने के लिए दबाव ना बनाया जाए। यदि किसी स्कूल द्वारा ऐसा किए जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित प्रधानाचार्य और प्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दूबे ने बताया कि अनेक अभिभावकों ने प्रशासन से शिकायत की है कि पब्लिक स्कूल उन पर दुुकान विशेष से किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। साथ ही प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदल दिया जाता है, जिसका मकसद यह है कि अभिभावक हर साल नई किताबें खरीदें। अभिभावकों का यह भी आरोप है कि पब्लिक स्कूल एनसीईआरटी की किताबें पाठ्यक्रम में नहीं लगा रहे हैं। इस संबंध में बीते दिनों एडीएम-प्रशासन एसबी सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसके बाद सभी बोर्ड के विद्यालयों को निर्देश दिए गए थे।
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मगर अभिभावकों की शिकायतें अब भी मिल रही हैं। इससे जाहिर होता है कि स्कूल मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में सभी स्कूलों को निर्देशित किया जाता है कि वह एनसीईआरटी की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल करें। साथ ही पांच वर्ष से पहले पाठ्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव ना करें। इसके अलावा किताबें दुकान विशेष से खरीदने के लिए दबाव ना बनाया जाए। यदि किसी स्कूल द्वारा ऐसा किए जाने की शिकायत मिलती है तो संबंधित प्रधानाचार्य और प्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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