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Saharanpur News: बगैर टीबी की दवा के जूझ रहे मासूम
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-पिछले कई दिनों से जिले में बच्चों की टीबी दवा खत्म
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जिले में बगैर टीबी दवा के मासूम जूझ रहे हैं। जिला क्षय रोग विभाग में बच्चों की दवा खत्म हैं। ऐसे में बच्चों की जान पर बन आई है। इनमें ज्यादातर बच्चे ऐसे गरीब परिवारों के हैं, जो मेडिकल स्टोर से महंगी दवा नहीं खरीद सकते हैं।
जिले में टीबी के करीब 5100 मरीज सक्रिय हैं। इनमें लगभग 342 बच्चे टीबी से पीड़ित हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम हैं। जिला क्षय रोग विभाग में बच्चों की टीबी दवा की पिछले कुछ दिनों से किल्लत बनी हुई है। ऐसे में बच्चे दवा का इंतजार कर रहे हैं और डॉटस सेंटर से उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। उन्हें कोई बताने को तैयार नहीं हैं कि दवा कब तक आएगी। ऐसे में बच्चों की जान पर बन आई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले दवा कई महीनों की एक साथ मिल जाती थी, लेकिन इन दिनों दो-दो महीने की ही दवा आ रही है। जिले में दवा की सप्लाई बरेली से होती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बच्चों को अधिक खतरा
चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में बड़ों के मुकाबले रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। जिसके चलते संक्रमण का खतरा अधिक होता है। बच्चों का उम्र के हिसाब से कम बढ़ना या वजन में कमी आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। बच्चों की भूख, वजन में कमी, दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार और रात के समय पसीने की समस्या हो रही है तो चिकित्सक से परामर्श लें।
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2025 तक कैसे टीबी मुक्त होगा जिला
जिले को टीबी मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम कोशिशें की जा रही है। इसके बाद भी जिले में टीबी के मरीजों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं। वर्तमान में टीबी मरीजों की संख्या करीब 5100 है, जबकि साल को खत्म होने में अभी छह महीने शेष हैं। बच्चे भी तेजी के साथ टीबी की चपेट में आ रहे हैं।
टीबी की दवा पहले के मुकाबले अब कम आने से समस्या बनी है। फिलहाल हमारे पास बच्चों की टीबी दवा नहीं है। बरेली से दवा आती है। सोमवार तक दवा पहुंचेंगी। उसके बाद बच्चों को दवा दिलाई जाएगी। - सर्वेश कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जिले में बगैर टीबी दवा के मासूम जूझ रहे हैं। जिला क्षय रोग विभाग में बच्चों की दवा खत्म हैं। ऐसे में बच्चों की जान पर बन आई है। इनमें ज्यादातर बच्चे ऐसे गरीब परिवारों के हैं, जो मेडिकल स्टोर से महंगी दवा नहीं खरीद सकते हैं।
जिले में टीबी के करीब 5100 मरीज सक्रिय हैं। इनमें लगभग 342 बच्चे टीबी से पीड़ित हैं, जिनकी उम्र 14 साल से कम हैं। जिला क्षय रोग विभाग में बच्चों की टीबी दवा की पिछले कुछ दिनों से किल्लत बनी हुई है। ऐसे में बच्चे दवा का इंतजार कर रहे हैं और डॉटस सेंटर से उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। उन्हें कोई बताने को तैयार नहीं हैं कि दवा कब तक आएगी। ऐसे में बच्चों की जान पर बन आई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पहले दवा कई महीनों की एक साथ मिल जाती थी, लेकिन इन दिनों दो-दो महीने की ही दवा आ रही है। जिले में दवा की सप्लाई बरेली से होती है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बच्चों को अधिक खतरा
चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में बड़ों के मुकाबले रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। जिसके चलते संक्रमण का खतरा अधिक होता है। बच्चों का उम्र के हिसाब से कम बढ़ना या वजन में कमी आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। बच्चों की भूख, वजन में कमी, दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार और रात के समय पसीने की समस्या हो रही है तो चिकित्सक से परामर्श लें।
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2025 तक कैसे टीबी मुक्त होगा जिला
जिले को टीबी मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम कोशिशें की जा रही है। इसके बाद भी जिले में टीबी के मरीजों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं। वर्तमान में टीबी मरीजों की संख्या करीब 5100 है, जबकि साल को खत्म होने में अभी छह महीने शेष हैं। बच्चे भी तेजी के साथ टीबी की चपेट में आ रहे हैं।
टीबी की दवा पहले के मुकाबले अब कम आने से समस्या बनी है। फिलहाल हमारे पास बच्चों की टीबी दवा नहीं है। बरेली से दवा आती है। सोमवार तक दवा पहुंचेंगी। उसके बाद बच्चों को दवा दिलाई जाएगी। - सर्वेश कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी