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घाड़ में बढ़ रहा पेयजल संकट, हैंडपंपों से भी कम आ रहा पानी

Thu, 18 Jun 2020 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2020 11:27 PM IST
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Increasing drinking water crisis in the valley, less water coming from hand pumps
बेहट के हबीबपुर तपोवन में प्राकृतिक जल स्रोत के कुएं से आई पाइप लाइन से पानी भर्ती महिलाएं। - फोटो : SAHARANPUR
बेहट/शाकंभरी (सहारनपुर)। गर्मी में घाड़ इलाके के लोग गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। ज्यादातर हैंडपंपों के हलक सूख चुके है और जो चालू हालत में है भी उनसे पानी निकालना आसान नहीं है। वाटर लेवल तीन सौ से चार सौ फीट की गहराई पर है। हैंडपंपों से पानी भी नाममात्र का आ रहा है। पेयजल परियोजनाओं से पीने के पानी की आपूर्ति कराने वाली पाइप लाइनें भी खस्ताहाल में हैं। इनसे सही तरीके से पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती। उधर, प्राकृतिक जल स्रोत भी लगभग सूखने के कगार पर है। कई गांवों में तो लोगों को टैंकरों से पानी मंगाना पड़ रहा है।
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कोठड़ी बहलोलपुर : शिवालिक जंगल से सटा यह गांव सात गांवों का समूह है। इसमें कोठड़ी चेतराम, कोठड़ी दोस्त मोहम्मद, कोठड़ी खुशीराम, कोठड़ी तुलसी, कोठड़ी पालियान, कोठड़ी धर्म सिंह व कोठड़ी भिक्खू गांव शामिल है। इन सभी गांवों की आबादी भी सात हजार से अधिक है। इन गांवों के लिए स्थापित पेयजल परियोजना की पाइप लाइनें जगह-जगह से लगभग बंद हो चुकी है। कोठड़ी तुलसी और कोठड़ी खुशीराम में तो पेयजल की आपूर्ति पूरी तरह से ठप पड़ी है। ग्राम प्रधान चौधरी ताहिर ने बताया कि उनके द्वारा दो टैंकर की व्यवस्था की गई है, जिनमें बाहर पानी मंगवाकर पूर्ति करनी पड़ रही है। हैंडपंप भी वाटर लेवल नीचे जाने से बूंद-बूंद पानी ही दे रहे हैं।
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हबीबपुर तपोवन: इस गांव में तीन गांव खुवाशपुर, मोहम्मदपुर झझरा उर्फ डाडल और हिंदूवाला आते हैं। इन गांवों को पेयजल आपूर्ति कराने के लिए ट्यूबवेल तो लगा दिया गया, लेकिन वाटर टैंक नहीं बनाया गया। इससे विद्युत आपूर्ति संचालित होने पर ही इन गांवों को पेयजल की आपूर्ति हो पाती है। यहां वाटर लेवल 300 से 400 फीट नीचे है। ग्राम प्रधान रियाजुल चौधरी ने बताया कि हैंडपंप से पानी भरने के लिए एक साथ तीन से चार लोगों को लगना पड़ता है। एक बाल्टी पानी के लिए 5 से 10 मिनट लगते है, ऐसे में लोगों जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पाता।
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हैंडपंप लगाने में भी आता है लाखों का खर्च
घाड़ इलाके की जमीन कंकरीली व पथरीली है। यहां वाटर लेवल तीन सौ से चार सौ फीट पहुंच जाता है। मशीनों से पत्थरों को काटकर ही यहां हैंडपंप लगाया जा सकता है, जिस पर ढाई से तीन लाख रुपये का खर्च आता है।
कोठड़ी समेत सभी पेयजल परियोजनाओं की क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत के लिए शासन को इस्टीमेट बनाकर भेजा है। बजट मिलते ही मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा।

- राजेंद्र सिंह, परियोजना निदेशक जल निगम सहारनपुर।

बेहट के खुवाशपुर में हैडपंप से घड़े में पानी भरकर ले जाती महिला।

बेहट के खुवाशपुर में हैडपंप से घड़े में पानी भरकर ले जाती महिला।- फोटो : SAHARANPUR

बेहट के कोठड़ी बहलोलपुर में टैंकर से पानी भरते ग्रामीण।

बेहट के कोठड़ी बहलोलपुर में टैंकर से पानी भरते ग्रामीण।- फोटो : SAHARANPUR

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