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बढ़ता निजीकरण रेल सेवाओं और रेलयात्रियों के लिए खतरा
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सहारनपुर। नारदर्न रेलवे मेंस यूनियन से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार रेलवे में लगातार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। इस बार के बजट में भी इसके संकेत दे दिए हैं। यह बढ़ता निजीकरण केवल कर्मचारियों के लिए ही खतरनाक नहीं होगा बल्कि रेलयात्रियों के लिए भी सही नहीं होगा। उनके लिए रेल यात्रा से लेकर रेल सेवाएं तक महंगी हो जाएंगी। एनआरएमयू की शाखाओं के सचिव अवतार सिंह और परमजीत सिंह ने कहा कि देशभर के रेलवे कर्मचारी लंबे समय से निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही पुरानी पेंशन को बहाल करने सहित वेतनमान स्तर में सुधार की मांग उठाई जाती रही है। लेकिन बजट पेश होने के बाद बेहद निराशा हुई। उन्होंने कहा कि बजट से जो संकेत मिले हैं, उससे यही लगता है कि रेल सेवाओं से लेकर सुविधाओं तक आने वाले दौर में बेहद महंगी हो जाएंगी।
प्राइवेट हाथों में 150 ट्रेेनें और 600 स्टेशन
एनआरएमयू पदाधिकारियों के मुताबिक अभी तक जो जानकारी उन तक पहुंची है, उसके मुताबिक 150 ट्रेेनें और 600 स्टेशन प्राइवेट हाथों में जा चुके हैं। सफाई से लेकर अन्य काम तो पहले ही निजी हाथों में हैं। इसलिए सरकार से यही चाहते हैं कि समय रहते ऐसे फैसले बंद करके रेल कर्मचारियों के साथ आम लोगों के हित में निर्णय किए जाए। अन्यथा आने वाला दौर सही नहीं होगा।
वेटिंग, बुकिंग से लेकर सीट तक के लिए बदलेंगे हालात
कुछ रेलवे कर्मचारियों ने आशंका जताई कि जिस तरह निजी हाथों में रेल सेवाएं जा रही हैं। उससे इस बात की पूरी आशंका है कि स्टेशन परिसर और ट्रेनों में वेटिंग से लेकर, बुकिंग और विंडो जैसी सीट के लिए अलग से प्रीमियम चार्ज तक यात्रियों को देना पड़ेगा। इसलिए कर्मचारी ही नहीं यात्रियों के लिए भी ये हालात चिंताजनक हैं।
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आरपीएफ के वजूद को लेकर आशंकित
पिछले कुछ महीनों में सरकार की ओर से लिए गए कुछ फैसलों के बारे मे प्रतिक्रिया देते हुए आरपीएफ से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने नाम का खुलासा न करते हुए आशंका जताई कि वे भी संशय में हैं। कुछ दिन पहले ही आरपीएफ का नाम बदलने और रेलवे बोर्ड के सदस्य कम होने के बारे में पता चला था। आरपीएफ की पावर पहले ही काफी कम की जा चुकी हैं। आने वाले समय में आरपीएफ का वजूद रहेगा या नहीं। इसे लेकर आशंकित हैं।
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प्राइवेट हाथों में 150 ट्रेेनें और 600 स्टेशन
एनआरएमयू पदाधिकारियों के मुताबिक अभी तक जो जानकारी उन तक पहुंची है, उसके मुताबिक 150 ट्रेेनें और 600 स्टेशन प्राइवेट हाथों में जा चुके हैं। सफाई से लेकर अन्य काम तो पहले ही निजी हाथों में हैं। इसलिए सरकार से यही चाहते हैं कि समय रहते ऐसे फैसले बंद करके रेल कर्मचारियों के साथ आम लोगों के हित में निर्णय किए जाए। अन्यथा आने वाला दौर सही नहीं होगा।
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वेटिंग, बुकिंग से लेकर सीट तक के लिए बदलेंगे हालात
कुछ रेलवे कर्मचारियों ने आशंका जताई कि जिस तरह निजी हाथों में रेल सेवाएं जा रही हैं। उससे इस बात की पूरी आशंका है कि स्टेशन परिसर और ट्रेनों में वेटिंग से लेकर, बुकिंग और विंडो जैसी सीट के लिए अलग से प्रीमियम चार्ज तक यात्रियों को देना पड़ेगा। इसलिए कर्मचारी ही नहीं यात्रियों के लिए भी ये हालात चिंताजनक हैं।
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आरपीएफ के वजूद को लेकर आशंकित
पिछले कुछ महीनों में सरकार की ओर से लिए गए कुछ फैसलों के बारे मे प्रतिक्रिया देते हुए आरपीएफ से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने नाम का खुलासा न करते हुए आशंका जताई कि वे भी संशय में हैं। कुछ दिन पहले ही आरपीएफ का नाम बदलने और रेलवे बोर्ड के सदस्य कम होने के बारे में पता चला था। आरपीएफ की पावर पहले ही काफी कम की जा चुकी हैं। आने वाले समय में आरपीएफ का वजूद रहेगा या नहीं। इसे लेकर आशंकित हैं।