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सात साल में भी शुरू नहीं हो सका वेस्ट मैनेजमेंट
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 01 Mar 2017 11:59 PM IST
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोसेसिंग प्लांट
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में स्मार्ट सिटी योजना की राह सहारनपुर के लिए आसान नहीं है। स्मार्ट सिटी की टीम योजना में चयन होने के बाद भले ही कचरा उठान से लेकर उसके प्रबंधन तक के बड़े-बड़े सपने दिखा रही हो।
मगर, हकीकत यह है कि कचरा ही इस समय स्मार्ट सिटी की राह का सबसे बड़ी बाधा है। हैरत की बात है कि नगर निगम बनने के सात साल बाद भी अधिकारी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सके हैं।
योजना के तहत सहारनपुर की सेकेंड प्रजेंटेशन चार मार्च को लखनऊ में होनी है। प्रस्ताव में कचरे को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कही गई हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बिंदू के तहत कहा गया है कि कचरा उठाने के लिए नगर निगम की जो गाड़ियां शहर में घूमती हैं।
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उन सभी में जीपीएस लगाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गाड़ियां समय से और प्रतिदिन कचरा उठा रही हैं या नहीं। इसके अलावा कचरे का इस्तेमाल खाद आदि बनाने में इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है।
मगर हकीकत यह है कि नगर निगम बनने के सात साल बाद भी नगर निगम के अधिकारी कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं कर सके हैं। वर्तमान में शहर से प्रतिदिन 272 मीट्रिक टन कचरा निकलता है।
इस कचरे को नगर निगम कमेला कॉलोनी क्षेत्र में डालता है। इससे पहले कचरा चिलकाना रोड और पुराना कलसिया रोड पर डाला जाता था। कचरे की वजह से क्षेत्रवासियों में नाराजगी है।
हैरत यह है कि नगर निगम के अधिकारी पिछले पांच साल से कचरा प्रबंधन के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। कई बार जमीन मिल जाने के दावे भी हो चुके हैं, मगर कार्रवाई उसके आगे बढ़ती अभी तक नजर नहीं आई है।
सहारनपुर में कई संस्थाएं शहर में डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल खाद आदि बनाने में कर रही हैं। मगर जितना कचरा संस्थाएं उठा रही हैं, वह कुल कचरे का मुश्किल से सात से आठ फीसदी ही है। कचरा उठाने के लिए उक्त संस्थाएं लोगों से शुल्क भी वसूलती हैं।
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मगर, हकीकत यह है कि कचरा ही इस समय स्मार्ट सिटी की राह का सबसे बड़ी बाधा है। हैरत की बात है कि नगर निगम बनने के सात साल बाद भी अधिकारी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सके हैं।
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योजना के तहत सहारनपुर की सेकेंड प्रजेंटेशन चार मार्च को लखनऊ में होनी है। प्रस्ताव में कचरे को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कही गई हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बिंदू के तहत कहा गया है कि कचरा उठाने के लिए नगर निगम की जो गाड़ियां शहर में घूमती हैं।
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उन सभी में जीपीएस लगाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गाड़ियां समय से और प्रतिदिन कचरा उठा रही हैं या नहीं। इसके अलावा कचरे का इस्तेमाल खाद आदि बनाने में इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है।
मगर हकीकत यह है कि नगर निगम बनने के सात साल बाद भी नगर निगम के अधिकारी कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं कर सके हैं। वर्तमान में शहर से प्रतिदिन 272 मीट्रिक टन कचरा निकलता है।
इस कचरे को नगर निगम कमेला कॉलोनी क्षेत्र में डालता है। इससे पहले कचरा चिलकाना रोड और पुराना कलसिया रोड पर डाला जाता था। कचरे की वजह से क्षेत्रवासियों में नाराजगी है।
हैरत यह है कि नगर निगम के अधिकारी पिछले पांच साल से कचरा प्रबंधन के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। कई बार जमीन मिल जाने के दावे भी हो चुके हैं, मगर कार्रवाई उसके आगे बढ़ती अभी तक नजर नहीं आई है।
सहारनपुर में कई संस्थाएं शहर में डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल खाद आदि बनाने में कर रही हैं। मगर जितना कचरा संस्थाएं उठा रही हैं, वह कुल कचरे का मुश्किल से सात से आठ फीसदी ही है। कचरा उठाने के लिए उक्त संस्थाएं लोगों से शुल्क भी वसूलती हैं।