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थायरॉइड के इलाज में खानपान और दिनचर्या में सुधार जरूरी
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सहारनपुर। बालों का झड़ना, त्वचा का खुष्क रहना, हर वक्त थकान रहना, कम खाने के बावजूद वजन बढ़ना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन साइलेंट किलर थायरॉइड की वजह से हो सकता है। ऐसे लोगों को तुरंत अच्छे फिजीशियन से संपर्क कर अपनी जांच करानी चाहिए। यदि जांच में थायरॉइड आता है तो दिनचर्या और खानपान में सुधार लाकर तथा इलाज कराकर इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीएस सोढ़ी का कहना है कि खराब दिनचर्या और गलत खानपान थायरॉइड होने का बड़ा कारण है। दुनिया भर में तेजी से इसके मरीज बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार हर दसवां व्यक्ति थायरॉइड का शिकार है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए ही लोगों को जागरूक करने के मकसद से ही विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है, लेकिन उसके बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें पांच से दस मरीजों में थायरॉइड के लक्षण रहते हैं। ऐसे मरीजों को जांच की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल के ही वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल कुमार वोहरा ने बताया कि थायरॉइड के मरीजों को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चावल, पास्ता, ब्रेड आदि खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा शरीर में फैट बढ़ाने वाले भोजन से भी परहेज करना चाहिए। भोजन में मक्खन, मीट जैसे वसायुक्त फू़ड्स को कम करें। फाइबर का सेवन अच्छा माना जाता है।
हाइपोथायरॉइडिज्म
- वजन बढ़ना
- थकान
- अवसाद
- मानसिक तनाव
- बालों का झड़ना
- त्वचा का रूखा और पतला होना
-सांस फूलना
-नींद कम आना
यह है थायरॉइड
सांस की नली के ऊपर थायरॉइड तितली के आकार का एक ग्लैंड होता है। थायरॉइड ग्लैंड थ्योरिकसिन नाम का हार्मोन बनाती है। यह हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और शरीर में सेल्स को कंट्रोल करता है। यह दो प्रकार के होते हैं। थायरॉइड हार्मोन में कमी से हाइपोथायरॉयडिज्म (अचानक वजन बढ़ना) होता है। थायरॉइड हार्मोन के बढ़ने से हाइपरथायरॉयडिज्म होता है। आहार में उचित आयोडीन स्तर बनाए रखने और कच्ची गॉइट्रोजेनिक सब्जियों के उपयोग को सीमित करने से थायरॉइड रोगों से बचने में मदद मिलती है।
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परेशानी
जिला अस्पताल में जांच सुविधा ठप
एसबीडी जिला अस्पताल में थायरॉइड की जांच की सुविधा है। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये की मशीन है, लेकिन मशीन बीते करीब तीन माह से खराब पड़ी है। ऐसे में मरीजों को जांच कराने के लिए प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मशीन अमेरिकी कंपनी की है, जिसको ठीक करने का ठेका एक अन्य कंपनी पर है। मशीन का कोई भी पुर्जा खराब होने पर उसके लिए मेल भेजी जाती है। पुर्जा अमेरिका से मंगवाया जाता है। इसके बाद टेक्नीशियन से संपर्क कर मशीन ठीक कराई जाती है। उम्मीद है कि मशीन जल्द ठीक होगी।
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एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीएस सोढ़ी का कहना है कि खराब दिनचर्या और गलत खानपान थायरॉइड होने का बड़ा कारण है। दुनिया भर में तेजी से इसके मरीज बढ़ रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार हर दसवां व्यक्ति थायरॉइड का शिकार है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए ही लोगों को जागरूक करने के मकसद से ही विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है, लेकिन उसके बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें पांच से दस मरीजों में थायरॉइड के लक्षण रहते हैं। ऐसे मरीजों को जांच की सलाह दी जाती है। जिला अस्पताल के ही वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. अनिल कुमार वोहरा ने बताया कि थायरॉइड के मरीजों को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चावल, पास्ता, ब्रेड आदि खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा शरीर में फैट बढ़ाने वाले भोजन से भी परहेज करना चाहिए। भोजन में मक्खन, मीट जैसे वसायुक्त फू़ड्स को कम करें। फाइबर का सेवन अच्छा माना जाता है।
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हाइपोथायरॉइडिज्म
- वजन बढ़ना
- थकान
- अवसाद
- मानसिक तनाव
- बालों का झड़ना
- त्वचा का रूखा और पतला होना
-सांस फूलना
-नींद कम आना
यह है थायरॉइड
सांस की नली के ऊपर थायरॉइड तितली के आकार का एक ग्लैंड होता है। थायरॉइड ग्लैंड थ्योरिकसिन नाम का हार्मोन बनाती है। यह हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और शरीर में सेल्स को कंट्रोल करता है। यह दो प्रकार के होते हैं। थायरॉइड हार्मोन में कमी से हाइपोथायरॉयडिज्म (अचानक वजन बढ़ना) होता है। थायरॉइड हार्मोन के बढ़ने से हाइपरथायरॉयडिज्म होता है। आहार में उचित आयोडीन स्तर बनाए रखने और कच्ची गॉइट्रोजेनिक सब्जियों के उपयोग को सीमित करने से थायरॉइड रोगों से बचने में मदद मिलती है।
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जिला अस्पताल में जांच सुविधा ठप
एसबीडी जिला अस्पताल में थायरॉइड की जांच की सुविधा है। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये की मशीन है, लेकिन मशीन बीते करीब तीन माह से खराब पड़ी है। ऐसे में मरीजों को जांच कराने के लिए प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि मशीन अमेरिकी कंपनी की है, जिसको ठीक करने का ठेका एक अन्य कंपनी पर है। मशीन का कोई भी पुर्जा खराब होने पर उसके लिए मेल भेजी जाती है। पुर्जा अमेरिका से मंगवाया जाता है। इसके बाद टेक्नीशियन से संपर्क कर मशीन ठीक कराई जाती है। उम्मीद है कि मशीन जल्द ठीक होगी।