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जिले में भी कहर बरपा चुकी हैं अवैध पटाखा फैक्टरियां
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सहारनपुर। जिस तरह आगरा में अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ और कई लोगों की जान चली गई, वैसा कहर सहारनपुर भी झेल चुका है। पूर्व में ऐसी कई घटनाएं जिले में हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई थी। कुछ हादसे लाइसेंसी पटाखा फैक्टरी और गोदाम में हुए तो मकानों में अवैध रूप से पटाखा बनाने के दौरान भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।
सहारनपुर में शहर से लेकर देहात तक बारूद का काम घरों में कराया जाता रहा है। एक साल पूर्व ही शहर के मोहल्ला आतिशबाजान में एक घर में पटाखे बनाते समय आग लगी थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, रामपुर मनिहारान में भी घर में पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके अलावा गंगोह रोड स्थित चंद्र विहार कॉलोनी में घर के भीतर ही पटाखे बनाने के दौरान विस्फोट होने पर महिला की मौत हो गई थी।
घरों से बरामद हुई थी विस्फोटक सामग्री
26 मई 2019 को चंद्र विहार कॉलोनी में पटाखों से विस्फोट में महिला की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने सात घरों में तलाशी ली थी। तब पांच घरों से ही करीब 20 बोरे विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। महिला की मौत और अवैध रूप से पटाखा बनवाने के मामले में सुभाष फायर वर्क्स के गोदाम को भी सील किया था और फर्म के संचालक सहित कई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
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यह घटनाएं भी रहीं प्रमुख
- 11 मई 2019 को गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव छज्जपुरा में पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगी थी, जिसमें कई श्रमिक झुलस गए थे।
-- 30 नवंबर 2019 को पुंवारका में पटाखा फैक्टरी में आग लगने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि कई कर्मचारी बुरी तरह झुलस गए। यह फैक्टरी सदर कोतवाली के मोहल्ला चंद्र नगर निवासी मनदीप उर्फ लवली की थी।
हरकत में आए अफसर, किया निरीक्षण (फोटो 16,16ए)
सहारनपुर। उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक अली अब्बास और मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह ने सोमवार को ही तीन स्थानों पर पटाखा फैक्टरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान गागलहेड़ी क्षेत्र में गांव छज्जपुरा, जनता रोड पर और चकहरेटी में भी पटाखा फैक्टरी पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया। फैक्टरी में मौजूद कर्मचारियों से वहां पर अग्निशमन संबंधी इंतजामों की जानकारी ली। उपजिलाधिकारी सदर ने बताया कि निरीक्षण किया गया है और मानकों का पालन करने का निर्देश दिया है। वहीं, मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह ने बताया कि तीनों फैक्टरी के संचालकों को हिदायत दी है कि अग्निशमन संबंधी किसी भी मानक का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
जिले में 59 लाइसेंस
पटाखा बनाने और बिक्री करने को लेकर प्रशासन से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके तहत जिले में पटाखा बनाने वालों के 21 और पटाखा बिक्री करने वालों के 38 लाइसेंस हैं।
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सहारनपुर में शहर से लेकर देहात तक बारूद का काम घरों में कराया जाता रहा है। एक साल पूर्व ही शहर के मोहल्ला आतिशबाजान में एक घर में पटाखे बनाते समय आग लगी थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, रामपुर मनिहारान में भी घर में पटाखा बनाते समय हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके अलावा गंगोह रोड स्थित चंद्र विहार कॉलोनी में घर के भीतर ही पटाखे बनाने के दौरान विस्फोट होने पर महिला की मौत हो गई थी।
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घरों से बरामद हुई थी विस्फोटक सामग्री
26 मई 2019 को चंद्र विहार कॉलोनी में पटाखों से विस्फोट में महिला की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने सात घरों में तलाशी ली थी। तब पांच घरों से ही करीब 20 बोरे विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। महिला की मौत और अवैध रूप से पटाखा बनवाने के मामले में सुभाष फायर वर्क्स के गोदाम को भी सील किया था और फर्म के संचालक सहित कई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
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यह घटनाएं भी रहीं प्रमुख
- 11 मई 2019 को गागलहेड़ी क्षेत्र के गांव छज्जपुरा में पटाखा फैक्टरी में भीषण आग लगी थी, जिसमें कई श्रमिक झुलस गए थे।
-- 30 नवंबर 2019 को पुंवारका में पटाखा फैक्टरी में आग लगने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि कई कर्मचारी बुरी तरह झुलस गए। यह फैक्टरी सदर कोतवाली के मोहल्ला चंद्र नगर निवासी मनदीप उर्फ लवली की थी।
हरकत में आए अफसर, किया निरीक्षण (फोटो 16,16ए)
सहारनपुर। उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक अली अब्बास और मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह ने सोमवार को ही तीन स्थानों पर पटाखा फैक्टरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान गागलहेड़ी क्षेत्र में गांव छज्जपुरा, जनता रोड पर और चकहरेटी में भी पटाखा फैक्टरी पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया। फैक्टरी में मौजूद कर्मचारियों से वहां पर अग्निशमन संबंधी इंतजामों की जानकारी ली। उपजिलाधिकारी सदर ने बताया कि निरीक्षण किया गया है और मानकों का पालन करने का निर्देश दिया है। वहीं, मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह ने बताया कि तीनों फैक्टरी के संचालकों को हिदायत दी है कि अग्निशमन संबंधी किसी भी मानक का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
जिले में 59 लाइसेंस
पटाखा बनाने और बिक्री करने को लेकर प्रशासन से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके तहत जिले में पटाखा बनाने वालों के 21 और पटाखा बिक्री करने वालों के 38 लाइसेंस हैं।