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फाइलों से बाहर आए कार्ययोजना तो सुधरे नदियों की सेहत

Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Sep 2021 11:08 PM IST
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If the action plan comes out of the files, the health of the rivers will improve
सहारनपुर। नदियों को स्वच्छ बनाने की कवायद फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। औपचारिकता निभाने को अधिकारी मीटिंग करते हैं, अभियान चलाने के दावे होते हैं और कार्ययोजना बनाई जाती हैं, मगर यह सब कुछ फाइलों में कैद हो जाता है। नतीजा कुछ नहीं निकलता और नदियों प्रदूषण से घिरी हुई हैं। इससे आसपास के इलाके भी प्रभावित है।
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सहारनपुर शहर के बीच से ही पांवधोई और ढमोला नदी बहती हैं तो काली नदी और कृष्णा नदी का उद्गम स्थल सहारनपुर जिले से ही है। अपने उद्गम स्थल से नदियां स्वच्छ जल के साथ बहती हैं, लेकिन शहर में आते ही प्रदूषण से भर जाती हैं।
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पांवधोई नदी
शकलापुरी गांव के नजदीक से निकलने वाली पांवधोई नदी शहर के बीच से होते हुए करीब सात किलोमीटर राकेश सिनेमा के पास आकर ढमोला नदी में गिरती है। पांवधोई नदी उद्गम स्थल से स्वच्छ चलती है, लेकिन दो किलोमीटर दूरी पर विश्वास नगर में आकर इतनी प्रदूषित हो जाती है तो कि इसके पास तक खड़ा नहीं हो सकते हैं। पांवधोई की स्वच्छता के लिए नगर निगम की तरफ से कवायद तो की गईं, लेकिन बरसात के दिनों के अलावा यह नदी गंदगी से अटी रहती है।
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ढमोला नदी
जनता रोड पर ढमोला गांव के पास ढमोला नदी का पानी साफ रहता है। शहर की तरफ आते ही रास्ते में तमाम फैक्टरियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के मिलने से यह जहरीली हो जाती है। शहर के भी तमाम नालों और फैक्टरियों से निकलने वाले प्रदूषण को समेटते हुए यह नन्दी फिरोजपुर गांव से आगे जाकर हिंडन नदी में गिरती है।
- कृष्णा नदी
इसका उद्गम स्थल नानौता क्षेत्र के कृष्णी गांव से है। कुछ दूरी पर भनेड़ा खेमचंद के बाद शामली जनपद की सीमा शुरू हो जाती है और बागपत में बरनावा के पास पहुंचकर यह हिंडन नदी में मिल जाती है। कृष्णा नदी के प्रदूषण की वजह से ही इसके किनारे के भनेड़ा खेमचंद सहित अन्य गांवों में भूजल प्रदूषित हो गया है।

ये हुई कवायद, नतीजे सिफर
एनजीटी के आदेश पर ढमोला और पांवधोई नदी के पुनरुद्घार के लिए ढमोला- पांवधोई पुनरुद्घार समिति बनाई गई। जून माह में समिति ने दोनों नदियों के किनारों पर तितली पार्क व अन्य स्थानीय जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए पेड़ पौधे लगाने की बात कही। ढमोला नदी में गिरने वाले क्रेजी नाले के पानी को ट्रीट करने रेमिडिएशन साइट बनाई, जहां ऑक्सीजन देने वाले बैक्टीरिया नाले में डाले गए। राकेश सिनेमा के पास ही ढमोला में बेस पर पौधे लगाकर वेटलैंड और रीवर फ्रंट तक बनाने के दावे हुए। रीवर फ्रंट पर 21 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया, मगर काम कुछ नहीं हुआ।
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