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सुविधाएं मिलें तो पैरालंपिक में आएंगे और पदक

Wed, 08 Sep 2021 11:59 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 11:59 PM IST
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If facilities are available, they will come to Paralympics and get medals.
सहारनपुर। पैरालंपिक में इस बार कई खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। सहारनपुर जिले में भी ऐसी कई प्रतिभाएं हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर चुकी हैं, लेकिन सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में पैरालंपिक में पहुंचकर पदक जीतना मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके अपने स्तर पर जुटाए संसाधनों से वह तैयारी करने में लगे हैं तो कुछ ने अब उम्मीद छोड़ दी है। पेश है ऐसे खिलाड़ियों पर रिपोर्ट...
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एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे रवि ठाकुर
गांव रणखंडी निवासी 24 वर्षीय रवि ठाकुर भाला फेंक में 2017 से अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत रहे हैं। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में वह तीन बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर दो स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने पंचकुला में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता और 2021 में बंगलुरू में हुई प्रतियोगिता में भी कांस्य पदक जीता। ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन किन्हीं कारणवश खेलने नहीं जा सके। रवि का कहना है कि वह अब एशियन गेम्स की तैयारी दिल्ली जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कर रहे हैं। उन्होंने अपने गांव में स्पोर्ट्स डिफेंस वॉरियर एकेडमी खोल रखी है, जिसमें 100 से ज्यादा युवाओं को अभ्यास कराते हैं। रवि का कहना है कि सरकारी स्तर से दिव्यांग खिलाड़ियों के खेल में सुधार के लिए कोई सुविधा नहीं मिल रही है, यदि सुविधा मिले तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी पदक जीत सकते हैं।
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माता पिता का हुआ निधन, अब गुजर बसर का संकट
गांव पिलखना निवासी प्रवीण गोला फेंक में इसी साल मार्च माह में गाजियाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहे। उससे पहले 2018 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में छठे स्थान पर रहे थे। प्रवीण का कहना है कि 17 साल पहले उनके पिता जयपाल सिंह का निधन हो गया था और कोरोना काल में मां मिमला देवी की मौत हो गई। तीन बड़ी बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। उनका मकान कच्चा है, जिसकी छत कड़ियों की है। अब खेलने से ज्यादा गुजर बसर की चिंता है, क्योंकि सरकार के स्तर पर कोई सुविधा नहीं मिलती। खेल कोटे में कहीं नौकरी भी नहीं मिली।
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काश, मिल पातीं सुविधाएं: अनुज
गांव पटनी निवासी अनुज ने पंचकुला में हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाला फेंक में पांचवां स्थान प्राप्त किया, जबकि इससे पहले वह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे हैं। वह बताते हैं कि सहारनपुर स्टेडियम और देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्टेडियम में अभ्यास किया। इसके बाद 1500 मीटर दौड़ का भी अभ्यास किया और 4.32 मिनट में दौड़ पूरी की। तभी कुहनी में चोट और अन्य दिक्कतों की वजह से आगे नहीं खेल सके। अनुज का कहना है कि इस बार पैरालंपिक में चार गोल्ड मेडल आए हैं, मगर नीरज चोपड़ा की तरह देश में कोई हलचल नहीं दिखी है। अगर मैं भी सामान्य होता तो राष्ट्रीय स्तर पर पांचवां स्थान प्राप्त करने पर सरकारी नौकरी तक मिल जाती, लेकिन पैरा खिलाड़ियों के लिए ऐसा नहीं हो रहा।
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